बनकाखेड़ा तेजा गायन का हुआ महा संगम, राजस्थानी संस्कृति की दिखी झलक, बड़ला रही प्रथम, पक्षी घर का हुआ उद्घाटन

सांवर वैष्णव

सवाईपुर :- स्मार्ट हलचल|सवाईपुर क्षेत्र के बनकाखेड़ा गांव में सुप्रसिद्ध श्री मोचडिया के मंड देवनारायण भगवान के मंदिर प्रांगण में राजस्थान में लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज के जीवन और यशोगाथा पर आधारित विशाल तेजा गायन का महा संगम रविवार को‌ देखने को मिला । तेजा गायन महा सम्मेलन में अलगोजा, ढोलक, मजीरा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर वीर तेजाजी महाराज के लोकगीत व जीवन-गाथा का गायन किया गया । आयोजक समिति के सदस्य शंकरलाल जाट व नारायण भदाला ने बताया कि भारतीय संस्कृति को जागृत करने और युवाओं को संस्कृति से जोड़ने को लेकर इस कार्यक्रम का आयोजन बनकाखेड़ा में भगवान मोचड़िया के मंड देवनारायण मंदिर प्रांगण में रविवार को किया गया । इस विशाल तेजा गायन कार्यक्रम में जिले भर से 51 गांवों की तेजा गायन की टीम भाग लिया, जो अलगोजा, ढोलक, मंजीरा के साथ सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज की जीवन गाथा का बखान किया । तेजा गायन महा सम्मेलन सुबह 11:00 बजे प्रारंभ हुआ, जो सायं 4:00 बजे तक चला, सभी टीम में अपनी पारंपरिक व राजस्थानी धोती-कुर्ता में थी, जिससे कार्यक्रम एक अलग ही दिखा । इस महा सम्मेलन में तेजा गायन में प्रथम आने वाली जाटों का बड़ला टीम को ₹ 21,000 व दूसरे स्थान पर आने वाली भोली टीम को ₹ 11,000 एवं तीसरे स्थान पर आने वाली ब्राह्मणों की जित्या टीम को ₹ 5100 नगद पुरस्कार स्वरूप दिये गए । इसके साथ ही प्रतियोगिता में शेष सभी टीमों को ₹ 1100 – ₹ 1100 का पुरस्कार दिया गया । इस कार्यक्रम का आयोजन भगवान देवनारायण की कृपा और जन सहयोग से किया गया । वही देवनारायण मंदिर के पास बने पक्षी घर का भी रविवार को ही उद्घाटन किया गया, भामाशाह शंकर लाल गुगड़ ने अपने माता-पिता की स्मृति में पक्षी घर का निर्माण करवाया ।।

राजस्थानी संस्कृति की दिखाई दी झलक

तेजा गायन महा सम्मेलन में सभी टीमों द्वारा धोती कुर्ता व गमछा के साथ कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंची, सभी टीमों में एक ही वेशभूषा में दिखाई दी, एक ही पंडाल के तले बड़ी संख्या में एक ही परिधान में दिखाई पड़ने से समय के साथ लुप्त हो रही राजस्थानी संस्कृति फिर से जीवित हो उठी और सभी राजस्थान के इस परिधान में अलगोजा व ढोलक की धुन पर नाचने गाते दिखे ।।

छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग सभी रंगे देशी रंग में

तेजा गायन के महासंगम में कुल 51 टीमों ने भाग लिया, इन टीमों में कंपटीशन देखने को मिला कि कौन सबसे अच्छा गायन करता है इन टीमों में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हिस्सा लिया, सभी अपने-अपने अंदाज में वाद्य यंत्रों के साथ तेजा गायन करने लगे हर टीम दूसरी टीम से बढ़कर लग रही थी । इस तेजा गायन महोत्सव में विजेता टीम का चयन के लिए निर्णायक गोपाल लाल आचार्य, कवि दीपक पारीक, नंदू शर्मा व सतीश कुमार व्यास ने टीमों के गायन, वादन, नृत्य, वेशभूषा, प्रस्तुती करण के आधार पर अंक दिए ।।

ग्रामीणों का उमड़ा हुजूम लगा मेला, प्रसादी का किया वितरण

तेजा गायन महा सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे, जिस माहौल मेरे जैसा हो गया । तेजा गायन के महासंगम को देखने के लिए बनकाखेड़ा, सवाईपुर, ढ़ेलाणा, बड़ला, चावंडिया, ककरोलिया माफी, कंवलियास माफी, सोपुरा जाटों का, सालरिया, रेड़वास, जित्यास, नोहरा, कुड़ी, अगरपुरा, पीथास सहित दर्जनों गांवों में महिला-पुरूष, युवक-युवतियां और बच्चे देखने पहुंचे । इस दौरान करीब 10 हजार लोगों का भोजन तैयार किया गया । भोग लगाकर प्रसादी वितरण की गई ।।