दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट 2026 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने दुनिया में ग्लोबल साउथ की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है, जिसमें कोई भी हमेशा ताकतवर नहीं रह सकता है. चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिक्स की बैठक की मेजबानी के लिए धन्यवाद कहा है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया में बहुत बड़े और ऐतिहासिक बदलाव हो रहे हैं. ऐसे समय में विकासशील देशों की एकजुटता और उनका बढ़ता प्रभाव दुनिया को बहुध्रुवीय (Multipolar) बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में किसी एक देश के दबदबे के खिलाफ संदेश देते हुए कहा कि दुनिया में नियम सभी देशों की भागीदारी से बनने चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘ताकतवर ही सही है’ की सोच को काफी पहले पीछे छोड़ दिया जाना चाहिए था। चीनी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को जरूरी बताया।
उन्होंने चीन की Global Development Initiative का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसके तहत 120 से अधिक देशों में 2,000 से ज्यादा परियोजनाएं पूरी की गई हैं और 2 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है.
उन्होंने यह भी बताया कि चीन ने उसके साथ राजनयिक संबंध रखने वाले 53 अफ्रीकी देशों के लिए जीरो-टैरिफ ट्रेड की सुविधा दी है.
जलवायु परिवर्तन पर भी सहयोग की अपील
वैश्विक चुनौतियों पर बोलते हुए जिनपिंग ने देशों से समस्याओं के मूल कारणों को दूर करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की. उन्होंने पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही.
उन्होंने पेरिस जलवायु समझौते को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता भी बताई और जलवायु परिवर्तन से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण करार दिया.
AI को मानव कल्याण से जोड़ने की बात
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी Artificial Intelligence (AI) को लेकर भी चीनी राष्ट्रपति ने अपना रुख रखा. उन्होंने कहा कि AI का विकास मानव कल्याण और समाज की भलाई के लिए होना चाहिए.
शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया का हर देश चाहे वह छोटा हो या बड़ा, अमीर हो या गरीब, सब सम्मान का हकदार है. विकासशील देशों (Global South) को बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय मामलों में सभी देशों की बराबर भागीदारी सुनिश्चित हो सके. उन्होंने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) में सही दिशा में सुधार करने, निष्पक्ष व्यापार नियमों को बढ़ावा देने और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) का समर्थन करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम में सुधार करके विकासशील देशों की आवाज और प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाना चाहिए.
लोगों के हित में विकास, चीन की पहल: जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि किसी भी बड़े काम को हासिल करने के लिए सबसे पहले लोगों के हितों को आगे रखना जरूरी है. विकासशील देशों को 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए. चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अपनी ‘ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव’ के तहत चीन ने अब तक 120 से अधिक देशों में 2,000 से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरे किए हैं और 2 लाख से अधिक लोगों को ट्रेनिंग दी है. उन्होंने कहा कि चीन ने अपने साथ कूटनीतिक संबंध रखने वाले 53 अफ्रीकी देशों के लिए जीरो टैरिफ ट्रेड की सुविधा है.
जलवायु और नई तकनीक पर सहयोग
वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए शी जिनपिंग ने समस्याओं के मूल कारणों को हल करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि देशों को मिलकर पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों का मुकाबला करना चाहिए और पेरिस जलवायु समझौते को पूरी तरह लागू करना चाहिए. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि AI का डेवलपमेंट एंड ह्यूमन वेलफेयर और अच्छाई के लिए होना चाहिए. इसके लिए एक वैश्विक सहमति से नियम बनाने की जरूरत है ताकि नई टेक्नोलॉजी का फायदा सभी देशों को समान रूप से मिल सके.