बजरी परिवहन का वीडियो बनाकर पुलिस अधिकारियों को भेजने वाले युवक की अवैध गिरफ्तारी पर सवाल, बनेठा पुलिस की कार्रवाई जांच के घेरे में,

युवक के साथ बनेठा थाने में आरोपी हेड कांस्टेबल दयाराम जाट द्वारा मारपीट व दुर्व्यवहार के लगाए आरोप-गिरफ्तारी के स्थान और फर्जी कार्रवाई को लेकर उठे गंभीर सवाल

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलचल|उनियारा सर्किल के बनेठा थाना क्षेत्र में कथित अवैध बजरी परिवहन का वीडियो बनाकर पुलिस अधिकारियों को भेजने वाले एक युवक को नियम विरूद्ध मनगढ़ंत तरीके से शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किए जाने का मामला सामने आया है। युवक एवं उसके परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, पुलिस की ओर से युवक के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, मीनों की झोपड़ियां निवासी प्रधान मीणा ने शुक्रवार, 11 सितंबर की रात सूरज्या भैरू मोड़-अलीगढ़ रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास बजरी से भरे करीब आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का वीडियो बनाया तथा उसे पुलिस अधिकारियों को भेजा। इसके बाद बनास नदी क्षेत्र में डेम के पास बजरी भरने वाले अन्य वाहनों की जानकारी मिलने पर युवक वहां भी गया था।
*युवक व परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप*
युवक एवं उसके परिजनों का आरोप है कि बजरी परिवहन से जुड़े कुछ लोगों की ओर से पीछा करने एवं मारपीट की धमकी मिलने के बाद युवक सवाई माधोपुर जिले के शिवाड़ स्थित देवनारायण भोजनालय पर खाना खाने चला गया। परिजनों के अनुसार, शुक्रवार देर रात करीब 11:51 बजे बनेठा थाना पुलिस के थानाधिकारी का रीडर हेड कांस्टेबल एवं ड्यूटी ऑफिसर दयाराम जाट(323), 112 वाहन चालक कालूराम चौधरी सहित एक अन्य प्राइवेट बजरी माफिया व्यक्ति नरेश (नरसी) गुर्जर निवासी कल्याणपुरा वहां पहुंचे और युवक को जबरन गिरफ्तार कर अपने साथ ले गए। युवक ने आरोप लगाया है कि शिवाड़ से पुलिस वाहन में बिठाने के बाद रास्ते में उसके साथ मारपीट व गाली गलौच कर बाल नोचे गए। बनेठा थाने लाने के बाद उसके साथ मारपीट की गई तथा गाली-गलौच एवं जातिसूचक शब्द इस्तेमाल किए गए तथा बाल पकड़कर खींचने का भी आरोप लगाया गया है। युवक का दावा है कि उसके कान के नीचे एवं गाल पर चोट के निशान स्पष्ट हैं। कथित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। पुलिस का विस्तृत पक्ष इस संबंध में सामने आना शेष है।
*गिरफ्तारी के स्थान और प्रक्रिया को लेकर सवाल*
युवक सहित परिजनों एवं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रधान मीणा को सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र के शिवाड़ से बनेठा थाना पुलिस द्वारा पकड़ा गया था, तो गिरफ्तारी का वास्तविक स्थान, पुलिस दल की रवानगी एवं वापसी, रोजनामचा रपट तथा गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए। युवक का दावा है कि शिवाड़ स्थित देवनारायण भोजनालय में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और युवक को वहां से ले जाने की घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। उनके अनुसार संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित की गई है। ऐसे में जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि युवक को वास्तव में किस स्थान से पकड़ा गया और यदि बनेठा थाना क्षेत्र से बाहर कार्रवाई की गई थी तो संबंधित पुलिस प्रक्रिया क्या अपनाई गई।
*गिरफ्तारी के कारण को लेकर अलग-अलग विरोधाभास जानकारी का दावा*
मामले में मीडिया द्वारा पुलिस से जानकारी लेने पर गिरफ्तारी के कारण को लेकर अलग-अलग विरोधाभास जानकारी मिलने का दावा किया गया है। एक पत्रकार के अनुसार थानाधिकारी हीरालाल वर्मा एवं हेड कांस्टेबल दयाराम जाट ने युवक के शराब के नशे में होने तथा शांतिभंग की कार्रवाई किए जाने की बात बताई। वहीं, दूसरे पत्रकार को थानाधिकारी द्वारा युवक को बजरी की रैकी करने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने की बात बताए जाने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, परिजनों का कहना है कि युवक को शिवाड़ स्थित भोजनालय से पकड़ा गया। ऐसे में गिरफ्तारी के कारण और स्थान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की जा रही है। अगर युवक किसी मामले में फरार था तो अकेला हैड कांस्टेबल दयाराम जाट ही शिवाड़ क्यों किस नियम कानून के तहत वहां पहुंचा। यह भी जानकारी सामने आई हैं कि हेड कांस्टेबल दयाराम जाट बिना अनुमति व बिना रोजनामचा रपट के दूसरे जिले के थाना क्षेत्र में नियम विरूद्ध बजरी माफिया को 112 पुलिस वाहन में अपने साथ लेकर गया था। पुलिस ने युवक के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई करते हुए उसे उपखंड मजिस्ट्रेट, उनियारा के समक्ष पेश किया। इसके बाद शनिवार शाम युवक को पाबंद कर रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
*पुलिस को सूचना देने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल*
युवक सहित परिजनों, स्थानीय लोगों एवं अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद राजस्थान का कहना है कि पुलिस आमजन से अवैध एवं संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील करती है। ऐसे में यदि युवक ने बजरी परिवहन का वीडियो बनाकर पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराया था, तो उसके बाद उसी युवक के खिलाफ की गई कार्रवाई के कारण को स्पष्ट किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों का सवाल है कि युवक द्वारा पुलिस अधिकारियों को भेजे गए वीडियो में यदि बजरी से भरे वाहन दिखाई दे रहे थे, तो उन वाहनों की पहचान और उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई की भी जानकारी सामने आनी चाहिए।
*हेड कांस्टेबल की डीओ ड्यूटी को लेकर भी उठे सवाल*
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई है कि 7 से 11 सितंबर तक हेड कांस्टेबल दयाराम जाट (323) की ड्यूटी ऑफिसर के रूप में रही। इसी अवधि में कथित बजरी परिवहन को लेकर सामने आई शिकायतों एवं वीडियो के संदर्भ में भी स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में लगाए जा रहे आरोपों एवं चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित रिकॉर्ड एवं उच्च अधिकारियों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं ग्रामीणों ने हैड कांस्टेबल दयाराम जाट से जुड़ी आय संपत्ति की जांच करवाने की मांग भी रखी गई हैं।
*हैड कांस्टेबल के स्थानांतरण को लेकर भी मांगी जानकारी*
स्थानीय लोगों के अनुसार हेड कांस्टेबल दयाराम जाट (323) के स्थानांतरण को लेकर भी चर्चा है। यदि उनका स्थानांतरण आदेश जारी हुआ था तो उन्हें बनेठा थाने से रिलीव किए जाने अथवा नहीं किए जाने की प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ कुछ अन्य गंभीर आरोपों व कथित अवैध चौथ वसूली की चर्चाएं भी सामने आई हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी या पुलिस विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।
*रिकॉर्ड एवं साक्ष्यों की जांच की मांग*
स्थानीय लोगों ने उच्च पुलिस अधिकारियों से 11 सितंबर की रात की पुलिस गश्त, शिवाड़ जाने का कारण, रोजनामचा रपट, गिरफ्तारी का वास्तविक स्थान, गिरफ्तारी का आधार तथा शांतिभंग की कार्रवाई से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही बनेठा थाना क्षेत्र के 112 वाहन की जीपीएस लोकेशन, संबंधित अवधि के थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज तथा युवक द्वारा पुलिस अधिकारियों को भेजे गए वीडियो की जांच कराने की मांग भी की गई है। यदि शिवाड़ स्थित भोजनालय का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच कर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
*जांच के बाद स्पष्ट होंगे प्रमुख सवाल*
* युवक को शांतिभंग में गिरफ्तार करने का वास्तविक आधार क्या था?
* युवक को वास्तव में किस स्थान से पुलिस ने पकड़ा?
* यदि कार्रवाई थाना क्षेत्र से बाहर हुई तो संबंधित पुलिस प्रक्रिया क्या अपनाई गई?
* 11 सितंबर की रात शिवाड़ जाने का उल्लेख रोजनामचा रपट में दर्ज है या नहीं?
* पुलिस अधिकारियों को भेजे गए बजरी परिवहन के वीडियो पर क्या कार्रवाई हुई?
* वीडियो में दिखाई देने वाले वाहनों की पहचान कर उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई या नहीं?
* युवक द्वारा लगाए गए मारपीट एवं दुर्व्यवहार के आरोपों की मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों से जांच हुई या नहीं?
* 112 वाहन की संबंधित अवधि की जीपीएस लोकेशन क्या बताती है?
* यदि हेड कांस्टेबल दयाराम जाट का स्थानांतरण हुआ था तो उनके रिलीव होने की प्रशासनिक स्थिति क्या है?
* मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता रोजनामचा, गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, जीपीएस डाटा एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
* पुलिस या संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।