अध्यक्ष की कुर्सी पर सियासी घमासान, आठ मीणा पार्षदों के बावजूद समाज को मौका नहीं मिलने पर आक्रोश

भाजपा से अल्केश पवन वैष्णव, कांग्रेस से प्रमोद देवी शर्मा और निर्दलीय कांता नरेश मीणा मैदान में; 15 पार्षदों के साथ भाजपा के पास बहुमत, पर अपनों की नाराजगी से गरमाया तापमान

जहाजपुर (स्मार्ट हलचल/अलकेश पारीक)

जहाजपुर नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर कस्बे का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। भाजपा द्वारा अल्केश पवन वैष्णव को अध्यक्ष पद का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर नामांकन दाखिल करवाए जाने के बाद मीणा समाज की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। 25 वार्डों में से 8 मीणा पार्षदों के जीतकर आने के बावजूद समाज को प्रतिनिधित्व न मिलने के विरोध में बुधवार सुबह सैकड़ों समाजजन माला जी महाराज मंदिर के पास एकत्रित हुए और कड़ा विरोध दर्ज कराया।

विधायक से वार्ता के बाद SDM कार्यालय पहुंचे समाजजन, बाड़ेबंदी से मुक्ति की मांग

बैठक के दौरान समाज के लोगों ने क्षेत्रीय विधायक गोपीचंद मीणा से वार्ता कर अध्यक्ष पद मीणा समाज के पार्षद को देने की मांग रखी। वार्ता के तुरंत बाद समाज के लोग एकजुट होकर उपखंड कार्यालय पहुंचे और एसडीएम के समक्ष अपनी बात रखते हुए बाड़ेबंदी में मौजूद मीणा समाज के 5 पार्षदों को मुक्त कराने की मांग उठाई। समाज का कहना था कि जब 8 पार्षद समाज से जीतकर आए हैं, तो निर्णय में उनके स्वतंत्र मत और प्रतिनिधित्व को तरजीह मिलनी चाहिए।

अल्केश वैष्णव के नाम पर नगर में खुशी का माहौल

दूसरी ओर, भाजपा द्वारा अल्केश पवन वैष्णव को प्रत्याशी बनाए जाने से पार्टी समर्थकों और नगरवासियों में भारी उत्साह है। समर्थकों ने मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया। कस्बे में इसे करीब 30 वर्षों बाद नगर के ही किसी स्थानीय पार्षद को अध्यक्ष बनने का अवसर मिलने के रूप में देखा जा रहा है।

🛑 जहाजपुर पालिका: दलीय स्थिति व अध्यक्ष प्रत्याशी

  • कुल वार्ड: 25 (भाजपा: 15, निर्दलीय: 07, कांग्रेस: 03)
  • भाजपा प्रत्याशी: अल्केश पवन वैष्णव
  • कांग्रेस प्रत्याशी: प्रमोद देवी शर्मा
  • निर्दलीय प्रत्याशी: कांता नरेश मीणा

अब सबकी नजरें पार्षदों के रुख पर

भाजपा के पास 15 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद निर्दलीय कांता नरेश मीणा के मैदान में उतरने और समाज की नाराजगी से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। अब देखना यह है कि मतदान के दिन पार्षद पार्टी लाइन पर चलते हैं या समाज की नाराजगी चुनावी समीकरणों में उलटफेर करती है।