पोटलां। स्मार्ट हलचल|ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं में अब लीक से हटकर नए क्षेत्रों में करियर बनाने का जज्बा तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में उम्मेदपुरा गांव के प्रतिभावान युवा देवेन्द्र पुर्बिया पिता नानालाल पुर्बिया ने मर्चेंट नेवी (Merchant Navy) में चयनित होकर न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे पोटलां क्षेत्र उम्मेदपुरा का नाम रोशन किया है। मर्चेंट नेवी की कठिन प्रक्रिया और प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद देवेन्द्र के प्रथम बार अपने गृह नगर आगमन पर ग्रामीणों, परिजनों और युवाओं द्वारा एक ऐतिहासिक व भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।
गांव की सीमा पर ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ अगवानी
देवेन्द्र पुर्बिया के पोटलां पहुँचने की सूचना मिलते ही गांव के लोगों में उत्साह और जश्न का माहौल बन गया। इस दौरान बड़ी संख्या में एकत्र हुए युवाओं और ग्रामीणों ने देवेन्द्र को फूल-मालाओं से लाद दिया। समाज के प्रबुद्ध जनों और वरिष्ठ नागरिकों ने राजस्थानी परंपरा के अनुसार साफा (पगड़ी) बांधकर और तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया।
जुलूस और आतिशबाजी: ढोल-नगाड़ों की गूंज और आतिशबाजी के बीच देवेन्द्र को जुलूस के रूप में पोटलां से उनके पेतृक गांव उम्मेदपुरा उनके निवास स्थान तक ले जाया गया। जुलूस के दौरान जगह-जगह ग्रामीणों और महिलाओं ने पुष्प वर्षा कर अपनी खुशी जाहिर की।
बुजुर्गों का मिला भरपूर आशीर्वाद, मिठाइयों से बढ़ा मिठास जुलूस के पश्चात आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में गांव के गणमान्य नागरिकों ने देवेन्द्र को मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। परिजनों ने देवेन्द्र की इस सफलता को उनकी दिन-रात की मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम बताया। इस दौरान भावुक माहौल में बुजुर्गों ने देवेन्द्र के सिर पर हाथ रखकर उन्हें समुद्र की लहरों के बीच भी देश का नाम चमकाने का आशीर्वाद दिया।
ग्रामीण युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
समारोह को संबोधित करते हुए स्थानीय प्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ ग्रामीणों ने कहा कि मर्चेंट नेवी एक चुनौतीपूर्ण लेकिन गौरवशाली करियर विकल्प है। छोटे से गांव से निकलकर इस क्षेत्र में जगह बनाना कोई मामूली बात नहीं है। देवेन्द्र की यह उपलब्धि गांव के अन्य विद्यार्थियों और युवाओं के लिए एक मिसाल बनेगी और उन्हें रक्षा, नौसेना व मर्चेंट नेवी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
देवेन्द्र पुर्बिया ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और ग्रामीणों के अटूट स्नेह को दिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाएंगे और गांव का मान सदैव ऊंचा रखेंगे।