उत्तम आर्जव धर्म की आराधना, मन-वचन-कर्म में सरलता का दिया संदेश

जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा व पूजा-अर्चना; 1008 दीपकों से हुई भव्य महाआरती

अनिल कुमार खींची

ब्यावर। स्मार्ट हलचल|दिगंबर जैन समाज के दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को उत्तम आर्जव धर्म की पूजा-अर्चना श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ की गई। शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। जिनालयों में अभिषेक, शांतिधारा, विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान हुए।
सुधा सागर कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ जिनालय में स्वर्ण कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। भगवान जिनेंद्र देव का अभिषेक कर विश्व में सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगल कामना की गई। मारवाड़ी समाज अध्यक्ष रूपचंद कासलीवाल ने बताया कि स्वर्ण कलशाभिषेक एवं शांतिधारा के पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य शकुंतला देवी, अभिषेकजी एवं वीरजी जैन, पाटनी परिवार तथा रूपचंद, अखिलेश, चेतन एवं प्राकुल जैन, छाबड़ा परिवार को प्राप्त हुआ।
समाज के मंत्री आनन्द गंगवाल ने बताया कि शाम को श्री आदिनाथ जिनालय में 1008 दीपकों से भव्य महाआरती की गई। भक्ति संगीत एवं जयकारों से जिनालय का वातावरण भक्तिमय हो गया।
दोपहर में दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर से पधारे विद्वान प्राचार्य पंडित अरुण कुमार जैन शास्त्री ने तत्वार्थ सूत्र का अध्ययन कराया और उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि आर्जव धर्म जीवन में सरलता, सीधापन और निष्कपट आचरण अपनाने की प्रेरणा देता है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखते हुए छल-कपट एवं दिखावे का त्याग करना चाहिए। सरलता और ईमानदारी से आत्मशुद्धि के साथ जीवन में शांति एवं विश्वास का संचार होता है।
कल उत्तम सत्य धर्म की आराधना
समाज के विकल कासलीवाल ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन शनिवार को उत्तम सत्य धर्म की पूजा-अर्चना की जाएगी। दस दिवसीय महापर्व के दौरान प्रतिदिन श्रद्धालु विभिन्न धर्मों की आराधना कर आत्मशुद्धि, संयम एवं आध्यात्मिक साधना का संदेश ग्रहण कर रहे हैं।