भागवत का श्रवण मनुष्य को भक्ति के मार्ग पर ले जाता है, रामनिवास धाम में कथा का शुभारंभ

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|श्रीमद्भागवत का मंगलाचरण उस आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ है, जिसमें कथा के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अनुभव करता है। भागवत महापुराण का महात्म्य ही यह संदेश देता है कि ईश्वर की कथा का श्रवण मन को निर्मल करता है और जीवन को सद्मार्ग की ओर ले जाता है। इसी आध्यात्मिक भावभूमि में शुक्रवार को रामनिवास धाम में श्रीमद्भागवत कथा का समारोहपूर्वक शुभारंभ हुआ।
रामस्नेही संप्रदाय की मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुरूप आयोजित यह कथा 18 से 24 सितंबर तक रामनिवास धाम की बारादरी में होगी। मालपुरा के संत मस्तरामजी महाराज कथा का वाचन करेंगे। कथा प्रतिदिन सुबह 9 से 11.30 बजे तथा दोपहर 2.30 से शाम 5 बजे तक होगी।
कथा के शुभारंभ से पहले रामनिवास धाम के कार्यवाहक भंडारी संत नवनितरामजी महाराज ने महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के समाधि स्थल स्तंभजी से श्रीमद्भागवत महापुराण की पोथी को कथा के आयोजक परिवार के जगदीश सोनी के सिर पर धारण कराया। पोथी को शोभायात्रा के रूप में लाल चौक होते हुए बारादरी तक ले जाया गया, जहां विधिवत विराजमान कर कथा का शुभारंभ किया गया। शोभायात्रा में रामस्नेही संप्रदाय के संतों के साथ बड़ी संख्या में सत्संगी महिला-पुरुष शामिल हुए।
मंगलाचरण में कथा के महात्म्य का विवेचन
कथा के प्रथम दिन मंगलाचरण करते हुए संत मस्तरामजी महाराज ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उसके संदेश को उतारने का माध्यम है। कथा श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति की भावना जागृत होती है और उसे अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध होता है।
उन्होंने कहा कि आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के 275वें दीक्षा दिवस के पावन अवसर पर शुरू हुई यह भागवत कथा सभी भगवत प्रेमियों के लिए मंगलकारी होगी। कथा में विभिन्न दृष्टांतों के माध्यम से भागवत के आध्यात्मिक संदेशों और उसके महात्म्य को समझाया गया।
संगीत-वाद्य के बजाय शब्द और साधना पर जोर
रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा के अनुरूप कथा का आयोजन बिना संगीत और वाद्य यंत्रों के किया जा रहा है। यहां कथा के श्रवण, चिंतन और आध्यात्मिक संदेश को ही प्रमुखता दी गई है। यह आयोजन रामस्नेही संप्रदाय की सादगीपूर्ण साधना परंपरा का परिचायक बना हुआ है।
कार्यवाहक भंडारी संत नवनितरामजी महाराज ने शाहपुरा के निवासियों एवं रामस्नेही सत्संगीजनों से 24 सितंबर तक प्रतिदिन दोनों सत्रों में आयोजित होने वाली कथा में पहुंचकर श्रीमद्भागवत के महात्म्य का श्रवण करने और आध्यात्मिक लाभ लेने का आह्वान किया।