बाँसवाड़ा में पहली बार गोवर्धन लीला के दिव्य दर्शन, बालमुकुंद चौक पर सजी आकर्षक चलित झांकी

बाँसवाड़ा में पहली बार गोवर्धन लीला के दिव्य दर्शन, बालमुकुंद चौक पर सजी आकर्षक चलित झांकी

भगवान गणेश ने धारण किया गिरिराज पर्वत का स्वरूप, कम्प्यूटराइज्ड मोटरों से संचालित झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

बाँसवाड़ा, स्मार्ट हलचल। गणेशोत्सव के पावन पर्व पर बाँसवाड़ा शहर के किशनपोल स्थित बालमुकुंद गणेश मंडल तेली समाज की ओर से इस वर्ष गोवर्धन लीला की अनूठी एवं भव्य झांकी सजाई गई है। बालमुकुंद चौक पर सजी यह झांकी इन दिनों श्रद्धालुओं एवं शहरवासियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

झांकी में भगवान गणेश को गिरिराजधरण के दिव्य स्वरूप में गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण करते हुए दर्शाया गया है। साथ ही इंद्रदेव, गोवर्धन पर्वत, मूषकराज एवं गोकुलवासियों के दृश्यों को भी आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस वर्ष मंडल द्वारा मात्र 2 फीट की बालमुकुंद गणेशजी की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे बाँसवाड़ा के प्रसिद्ध कलाकार मांगीलालजी प्रजापत एवं उनके परिवार ने मिट्टी से तैयार किया है। झांकी के निर्माण में थर्मोकोल, लोहा, मिट्टी सहित विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया गया है। प्रतिमा एवं पूरी झांकी को तैयार करने में करीब दो माह का समय लगा।

गोवर्धन लीला के दिव्य स्वरूप में भगवान गणेश

झांकी की खासियत यह है कि इसके अधिकांश दृश्य कम्प्यूटराइज्ड मोटरों द्वारा स्वचालित रूप से संचालित होते हैं। इससे झांकी के दृश्य जीवंत प्रतीत होते हैं। मंडल के अनुसार यह बाँसवाड़ा जिले की अनूठी एवं पूर्ण रूप से कम्प्यूटराइज्ड ऑटोमेटिक चलित झांकी है।

झांकी देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों द्वारा भी मंडल के इस प्रयास की सराहना की जा रही है। श्रद्धालु झांकी के फोटो, वीडियो एवं सेल्फी लेकर इस दिव्य दृश्य को यादगार बना रहे हैं।

2 फीट की गणेश प्रतिमा, 10 फीट ऊंची झांकी

बालमुकुंद गणेश मंडल तेली समाज की ओर से प्रतिवर्ष गणेशोत्सव में अन्य पांडालों से अलग और अनूठी थीम पर झांकी तैयार की जाती है। मंडल द्वारा पूर्व वर्षों में श्रीराम मंदिर मॉडल, प्रभु रथ में सवार, कालिया मर्दन, सागर मंथन, मटकी फोड़ एवं बाललीला और मथुरा जन्मभूमि जैसी विभिन्न झांकियां प्रस्तुत की जा चुकी हैं।

भारत साधु समाज के महामंत्री एवं महामंडलेश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज, पीठाधीश्वर तपोभूमि लालीवाव मठ के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा प्रतिवर्ष छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प लिया गया है। इसी संकल्प के तहत प्रतिवर्ष करीब 2 से 3 फीट की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

इस वर्ष भी भगवान गणेश की मूल प्रतिमा केवल 2 फीट की है, जबकि थर्मोकोल एवं अन्य सामग्री से तैयार पूरी झांकी करीब 10 फीट ऊंची है। झांकी खोलने के बाद विसर्जन के समय भगवान गणेश की मूल 2 फीट की प्रतिमा का ही विसर्जन किया जाएगा।

23 सितंबर को प्रतिभा सम्मान समारोह एवं महाप्रसादी

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 23 सितंबर, बुधवार को किशनपोल बालमुकुंद गणेश मंडल तेली समाज की ओर से प्रतिभा सम्मान समारोह एवं महाप्रसादी (भंडारा) का आयोजन किया जाएगा। समारोह में समाज की विभिन्न प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत साधु समाज के महामंत्री एवं महामंडलेश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज, पीठाधीश्वर तपोभूमि लालीवाव मठ होंगे।

शाम 7 बजे से शुरू होते हैं दर्शन

बालमुकुंद गणेश मंडल में प्रतिदिन शाम 7 बजे से दर्शन प्रारंभ होते हैं। दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रात्रि 8 बजे से तेली समाज आचार्य श्री योगेश्वरजी के आचार्यत्व में गणपति महापूजा, अभिषेक, भोग एवं आरती के बाद प्रसादी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

मंडल की ओर से सनातन प्रेमियों एवं श्रद्धालुओं से इस दिव्य एवं अनूठी गोवर्धन लीला झांकी के दर्शन करने तथा धार्मिक आयोजनों में सहभागी बनने का सादर आग्रह किया गया है।