*_शाहपुरा चेयरमैन की कुर्सी सियासी बिसात….. आखिरी गेंद किसके पाले में?_* ❓🤔
*_कांग्रेस के रमेश सेन या निर्दलीय बालमुकुंद तोषनीवाल…22 का आंकड़ा, बगावत का बिगुल और बाड़ाबंदी की चर्चाओं के बीच शाहपुरा में सियासी पारा हाई..❓_*
_✒️किशन वैष्णव……_
शाहपुरा। स्मार्ट हलचल|शाहपुरा नगर पालिका की चेयरमैन कुर्सी के लिए अब सिर्फ इंतजार बचा है उस एक दिन का,जब सियासी दावों, चर्चाओं,कयासों और बंद कमरों की रणनीतियों के बीच पार्षद अपने वोट के जरिए फैसला लिखेंगे।21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा और इसके बाद मतगणना होगी।
*मैदान में अब दो चेहरे आमने-सामने हैं।कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी रमेश सेन और कांग्रेस के टिकट पर वार्ड 16 से पार्षद निर्वाचित होने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे बालमुकुंद तोषनीवाल।* नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों के बीच सीधा मुकाबला तय हो चुका है।❓🤔 *कुर्सी एक… चेहरे दो… लेकिन वोटों का गणित किस करवट बैठेगा?*
शाहपुरा के 35 वार्डों के चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने 22 वार्डों में जीत दर्ज की है।भाजपा के 8 और निर्दलीय 5 पार्षद निर्वाचित हुए हैं।अध्यक्ष पद के लिए बहुमत का आंकड़ा 18 है। यानी कांग्रेस के पास बहुमत से चार पार्षद अधिक हैं। आंकड़ों की भाषा में देखें तो कांग्रेस मजबूत संख्या के साथ खड़ी है, लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के ही टिकट पर जीते एक पार्षद के निर्दलीय मैदान में उतरने से राजनीतिक चर्चा का नया अध्याय खुल गया है।रमेश सेन वार्ड 15 से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए और पार्टी ने उन्हें अध्यक्ष पद का अधिकृत प्रत्याशी बनाया। वहीं बालमुकुंद तोषनीवाल वार्ड 16 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। अध्यक्ष पद के लिए उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के सामने निर्दलीय दावेदारी पेश की। *19 सितंबर को कांग्रेस ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया।*
पार्टी के आदेश में अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने को पार्टी अनुशासन एवं संविधान का उल्लंघन बताया गया है।
*सिंबल कांग्रेस का… मुकाबला कांग्रेस के ही दो चेहरों से शुरू हुआ… और अब एक अधिकृत, दूसरा निर्दलीय!..❓* ❌🤔यही वह मोड़ है जिसने शाहपुरा के चेयरमैन चुनाव को सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया से निकालकर शहर की सबसे चर्चित सियासी कहानी बना दिया है। कांग्रेस के पास 22 का आंकड़ा है, बहुमत के लिए 18 चाहिए,लेकिन अब चर्चा यह नहीं कि कांग्रेस के पास संख्या कितनी है चर्चा यह है कि मतदान के दिन कांग्रेस के कितने पार्षद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के साथ मतदान करते हैं।..❓🤔 22 का आंकड़ा कांग्रेस के पास है… लेकिन क्या 22 के 22 वोट भी एक साथ रहेंगे..❓यही सवाल फिलहाल शाहपुरा के राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा घूम रहा है। हालांकि किसी भी पार्षद के समर्थन या विरोध को लेकर मतदान से पहले आधिकारिक रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जरूर हैं,लेकिन चर्चा और वास्तविक मतदान के बीच बड़ा अंतर होता है।इधर भाजपा के 8 पार्षदों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं का दौर चल रहा है। बाजारों में यह चर्चा सुनने को मिल रही है कि भाजपा के कुछ पार्षद निर्दलीय प्रत्याशी बालमुकुंद तोषनीवाल के समर्थन में जा सकते हैं।..❓हालांकि भाजपा की ओर से या उनके पार्षदों की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक फैसला या समर्थन घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल सियासी गलियारों की चर्चा और कयास से आगे नहीं माना जा सकता।खैर देखना ये होगा कि❓🤔 भाजपा के 8 वोट… क्या बदल सकते हैं चुनावी तस्वीर? या फिर रहेंगे अपने राजनीतिक फैसले के साथ❓वही पांच निर्दलीय पार्षद भी इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। उनके रुख को लेकर भी तरह-तरह के राजनीतिक अनुमान लगाए जा रहे हैं।.❓☝️ कोई उन्हें संभावित निर्णायक भूमिका में देख रहा है, तो कोई मान रहा है कि पूरा चुनाव कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों से ही तय होगा। लेकिन इन दोनों ही बातों की पुष्टि मतदान से पहले संभव नहीं है।पांच निर्दलीय… आठ भाजपा… 22 कांग्रेस… और बहुमत का आंकड़ा 18! 💯🤔 अब जोड़-घटाव तो हर चौराहे पर हो रहा है, लेकिन सही गणित वोटों की गिनती ही बताएगी।इसी बीच चुनाव से पहले कुछ पार्षदों की बाड़ाबंदी की जानकारी और चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि कितने पार्षद बाड़ाबंदी में हैं,उन्हें कहां रखा गया है और वे किस खेमे के साथ हैं,इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। स्थानीय राजनीतिक माहौल में बाड़ाबंदी की चर्चाओं ने जरूर उत्सुकता बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।❓🤔 बाड़ाबंदी क्यों? भरोसे की राजनीति या रणनीति की तैयारी? 🤭यही सवाल अब शाहपुरा के बाजारों में भी सुनाई दे रहा है। चुनावी मौसम में पार्षदों की आवाजाही,बैठकों और संपर्कों को लेकर चर्चाएं आम हैं,लेकिन कौन किसके साथ है और किसके साथ जाएगा, इसका दावा केवल मतदान के बाद ही तथ्य के रूप में किया जा सकेगा..❓✍️।उधर शहर में धनबल,बाहुबल और सत्ता पक्ष के प्रभाव को लेकर भी चर्चाएं सुनाई दे रही हैं। कुछ लोग इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं तो कुछ इसे महज राजनीतिक चर्चाएं मान रहे हैं। किसी भी प्रत्याशी या पक्ष के खिलाफ इन चर्चाओं को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा,क्योंकि इनके समर्थन में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं है।धनबल? 💰 बाहुबल? 💪 सत्ता का असर? 🤔 या फिर पार्षद की अपनी पसंद❓ 💯21 सितंबर का मतदान इन सभी चर्चाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। जनता ने 35 वार्डों में अपने पार्षद चुन दिए हैं। अब वही निर्वाचित पार्षद अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। यानी इस बार शहर के मतदाता सीधे चेयरमैन नहीं चुनेंगे, बल्कि चुने हुए 35 पार्षद मतदान के जरिए अध्यक्ष का फैसला करेंगे। मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगा और उसके बाद मतगणना की जाएगी।❓🤔 असली खेल जनता के वोट के बाद अब पार्षदों के वोट में है… किसके पक्ष में पड़ेगा कौन-सा वोट?रमेश सेन के सामने पार्टी का आधिकारिक समर्थन है। बालमुकुंद तोषनीवाल के सामने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी है। एक तरफ कांग्रेस का 22 का आंकड़ा है, दूसरी तरफ मुकाबले में मौजूद निर्दलीय चेहरा है। भाजपा के 8 और निर्दलीय 5 पार्षदों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं।लेकिन यहां एक बात बिल्कुल साफ है—कयासों से चेयरमैन नहीं चुना जाएगा। वोट से चुना जाएगा। 💯शाहपुरा की राजनीति में अब हर मुलाकात पर नजर है,हर बैठक चर्चा में है और हर पार्षद को लेकर अलग-अलग राजनीतिक गणित लगाया जा रहा है। बाजार में कोई कह रहा है कांग्रेस के 22 पार्षद एकजुट रहेंगे,कोई कह रहा है बगावत का असर दिखाई दे सकता है, कोई भाजपा के रुख की बात कर रहा है तो कोई निर्दलीयों को लेकर गणित लगा रहा है।❌ लेकिन अभी किसी के पास अंतिम जवाब नहीं है… क्योंकि वोट अभी पड़े ही नहीं हैं! 🤔शहर में मजाकिया अंदाज में एक सवाल भी खूब घूम रहा है “भाई, चेयरमैन कौन बनेगा?” 🤭 जवाब आता है“नाम तो दो हैं साहब, लेकिन कुर्सी किसके हिस्से आएगी, यह वोटों की गिनती बताएगी!,।।❓यही शाहपुरा के चुनाव की असली कहानी है। चर्चाएं हजार हैं, गणित कई हैं, राजनीतिक दावे अलग-अलग हैं, लेकिन फैसला सिर्फ मतदान से होगा।❓🤔 _*क्या कांग्रेस अपने 22 पार्षदों को एकजुट रख पाएगी?*❓_
*क्या तोषनीवाल की निर्दलीय दावेदारी को पार्षदों का समर्थन मिलेगा..❓🤭* _*क्या भाजपा के 8 और पांच निर्दलीय पार्षद चुनावी समीकरण में कोई नया मोड़ लाएंगे❓*_
❓❌ *क्या बाड़ाबंदी की चर्चाओं के पीछे कोई बड़ा सियासी खेल है, या फिर यह सिर्फ चुनावी माहौल का शोर है?* इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास पक्के तौर पर नहीं हैं।और शायद यही वजह है कि शाहपुरा की चेयरमैन कुर्सी का चुनाव इस समय पूरे शहर की चर्चा का केंद्र बना हुआ है।22 का आंकड़ा बड़ा है 💯… बगावत की कहानी भी छोटी नहीं ❌… भाजपा के 8 और निर्दलीय 5 की भूमिका पर भी नजर 🤔… और कुर्सी सिर्फ एक!
21 सितंबर को सुबह 10 बजे से मतदान शुरू होगा। दोपहर 2 बजे मतदान समाप्त होगा और इसके बाद मतगणना होगी। तब सामने आएगा कि पार्षदों ने किस प्रत्याशी को कितना समर्थन दिया।उस वक्त न बाजार की चर्चा काम आएगी, न सोशल मीडिया के कयास, न राजनीतिक गलियारों की अटकलें। सामने होंगे सिर्फ वोट और उनका परिणाम।
आखिरी गेंद बाकी है… 🏏आखिरी वोट बाकी है… आखिरी फैसला बाकी है… ❓🤔
शाहपुरा की चेयरमैन कुर्सी पर बैठने वाला चेहरा मतगणना के बाद सामने आएगा। तब पता चलेगा कि 22 का आंकड़ा कितना एकजुट रहा, निर्दलीय चुनौती का कितना असर हुआ और चुनाव से पहले चल रही तमाम चर्चाओं में कितना दम था।कुर्सी एक… दावेदार दो… समीकरण कई… चर्चाएं हजार… 🤭🤔
*अब शाहपुरा की नजर सिर्फ एक चीज पर चेयरमैन के नतीजे 💯*