नलों में सीवरेज, सड़कों पर जानलेवा गड्ढे! सड़ी-गली पाइपलाइन के सहारे शहर की प्यास बुझा रहा जलदाय महकमा

नलों में सीवरेज, सड़कों पर जानलेवा गड्ढे!
सड़ी-गली पाइपलाइन के सहारे शहर की प्यास बुझा रहा जलदाय महकमा; वार्ड 35 में पीला-बदबूदार पानी, पुराने भीलवाड़े में भी हाहाकार—एक साल से ‘अमृत-2’ का आश्वासन, जनता बोली- अब पूरी पाइपलाइन बदलो

भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी)
स्मार्ट हलचल|शहर में पेयजल व्यवस्था को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। वार्ड 35 में घरों तक पहुंच रहे पानी के पीले और बदबूदार होने तथा उसमें सीवरेज की मिलावट की शिकायतों ने जलदाय विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुराने भीलवाड़े के कई हिस्सों में भी लोग ऐसी ही समस्या से परेशान होने की बात कह रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलदाय विभाग वर्षों पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों के भरोसे शहर की पेयजल व्यवस्था चला रहा है। पाइपलाइन में लीकेज और सीवरेज के संपर्क में आने की आशंका के बीच लोगों को यह डर सता रहा है कि घरों में पहुंच रहा पानी कहीं बीमारी का कारण न बन जाए।
‘अमृत-2 आएगी’… एक साल से यही जवाब!
सबसे बड़ा सवाल अधिकारियों के आश्वासन पर है। लोगों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जाने पर जवाब मिलता है—‘अमृत-2 योजना में समस्या का स्थायी समाधान कर दिया जाएगा।’
लेकिन जनता अब पूछ रही है—आखिर कब तक?
एक साल से समस्या बनी हुई है तो तत्काल राहत के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? दूषित पानी की शिकायत सामने आने के बाद प्रभावित इलाकों की पाइपलाइन की तकनीकी जांच और पानी के नमूनों की नियमित जांच क्यों नहीं हो रही?
पैबंद नहीं, पूरी पाइपलाइन बदलने की मांग
लोगों का कहना है कि पुरानी पाइपलाइनें जगह-जगह जर्जर हो चुकी हैं। ऐसे में बार-बार लीकेज ठीक करने या टूटे हिस्सों पर मरम्मत का काम करने से समस्या स्थायी रूप से खत्म नहीं होगी।
जनता की मांग है कि जर्जर पाइपलाइन को चिन्हित कर आवश्यक क्षेत्रों में पूरी पाइपलाइन बदली जाए। पेयजल लाइन को सीवरेज से पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए क्रॉस-कनेक्शन और लीकेज की व्यापक जांच कराई जाए तथा जहां पाइपलाइन अपनी उम्र पूरी कर चुकी है, वहां नई पाइपलाइन बिछाई जाए।
पाइपलाइन खोदी, गड्ढे छोड़े—सड़क भी बनी आफत
जलदाय विभाग की पाइपलाइन संबंधी खुदाई के बाद सड़कों पर छोड़े गए गड्ढे भी लोगों के लिए परेशानी और हादसे का कारण बन रहे हैं, ऐसी शिकायतें स्थानीय स्तर पर सामने आ रही हैं।
लोगों का कहना है कि पाइपलाइन का काम जरूरी है, लेकिन काम पूरा होने के बाद सड़क को सुरक्षित तरीके से बहाल करना भी विभाग की जिम्मेदारी है। एक तरफ नल में गंदा पानी और दूसरी तरफ सड़क पर गड्ढे—शहरवासी आखिर जाएं तो जाएं कहां?
दो साल भाजपा बोर्ड, तीसरी बार की तैयारी… जनता पूछ रही हिसाब
भीलवाड़ा नगर निगम में लगातार दो साल से भाजपा का बोर्ड है और तीसरी बार बोर्ड बनने की राजनीतिक कवायद के बीच पानी और शहर की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा सियासी सवाल बनता जा रहा है।
जनता का सवाल सीधा है—अगर शहर के लोगों को साफ और सुरक्षित पेयजल तक नहीं मिल पा रहा तो विकास के दावों का पैमाना क्या है?
चुनावी राजनीति में बोर्ड बनाने और बचाने की कवायद तेज है, लेकिन वार्डों में लोगों की रोजमर्रा की परेशानी अब राजनीतिक दलों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
जनता का आक्रोश—‘आश्वासन नहीं, नल में साफ पानी चाहिए’
स्थानीय लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। लोगों का कहना है कि शिकायतें सुनना और आश्वासन देना आसान है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान करना जरूरी है।
जनता अब अमृत-2 के नाम पर और इंतजार करने को तैयार नहीं दिख रही। मांग है कि:
दूषित पानी की तत्काल जांच हो।
जर्जर पाइपलाइन चिन्हित की जाए।
जरूरत वाले इलाकों में पूरी पाइपलाइन बदली जाए।
सीवरेज-पेयजल क्रॉस कनेक्शन की जांच हो।
पाइपलाइन कार्य के बाद सड़कें तत्काल दुरुस्त हों।
खुले गड्ढों को सुरक्षित कर हादसों पर रोक लगाई जाए।
अब सवाल सिर्फ पानी का नहीं, जवाबदेही का है।
जनता पूछ रही है—अमृत-2 का इंतजार कब खत्म होगा और नलों में साफ पानी कब आएगा?