बांकरा गांव से सामने आई तस्वीरों ने खोली स्वास्थ्य तंत्र की पोल; वर्षों से शिकायतों के बाद भी कार्रवाई सिफर, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा विभाग?
अलकेश पारीक
जहाजपुर, स्मार्ट हलचल।तहसील क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में कथित झोलाछापों द्वारा बिना किसी वैध डिग्री, पंजीकरण एवं चिकित्सकीय अनुमति के खुलेआम चिकित्सा गतिविधियां संचालित करने के आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। गांव-गांव में कथित अनधिकृत क्लीनिकों के संचालन की लगातार शिकायतों के बीच बांकरा गांव से सामने आई तस्वीरों ने हड़कंप मचा दिया है, जहां चारपाई पर लिटाकर मरीजों को ड्रिप लगाई जा रही है।
चारपाई पर ड्रिप: जिंदगी से खिलवाड़ का खुला खेल
बांकरा गांव से सामने आई तस्वीरों में पुरुष मरीज चारपाई पर लेटे नजर आ रहे हैं और उन्हें ड्रिप लगी हुई है। सवाल उठता है कि उपचार करने वाले व्यक्ति के पास कौन-सी अधिकृत डिग्री है, मरीजों को क्या दवा दी जा रही है और क्या उस स्थान के पास क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का वैध पंजीयन है? बिना उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन के गलत इंजेक्शन या ड्रिप चढ़ाना किसी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
बीसीएमओ बोले—’सीएमएचओ स्तर से टीम बनने पर ही होगी कार्रवाई’
मामले को लेकर स्थानीय ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बीसीएमओ) भागीरथ मीणा ने बताया कि कथित झोलाछापों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए भीलवाड़ा सीएमएचओ को लिखित में अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर उनके अधिकार क्षेत्र में सीधी कार्रवाई संभव नहीं है; सीएमएचओ द्वारा विशेष टीम गठित किए जाने के बाद ही मौके पर कार्रवाई की जा सकेगी।
🛑 चिकित्सा विभाग से जनता के 5 सीधे सवाल:
- सीएमएचओ द्वारा कथित झोलाछापों पर नकेल कसने हेतु विशेष टीम का गठन कब किया जाएगा?
- जहाजपुर मुख्यालय व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित अवैध क्लीनिकों का विभाग के पास क्या रिकॉर्ड है?
- मरीजों का उपचार करने वाले कथित चिकित्सकों की डिग्री और दवा के स्टॉक की जांच क्यों नहीं होती?
- पूर्व में मीडिया व नागरिकों द्वारा की गई शिकायतों पर अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई हुई?
- ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपखंड स्तर पर सघन औचक निरीक्षण अभियान कब चलेगा?
मिलीभगत की आशंका, निष्पक्ष जांच की दरकार
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से अब विभागीय मिलीभगत की आशंकाएं भी गहराने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मरीजों के जीवन से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील मामले में तत्काल सीएमएचओ स्तर से उच्चस्तरीय टीम भेजकर क्लीनिकों की वैधता, दवाओं के स्टॉक और उपचारकर्ताओं की योग्यताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।