भक्ति की डगर पर उमड़ा आस्था का सैलाब, आज ठाकुरजी करेंगे जलविहार

:- पदयात्रियों के स्वागत में श्याम भक्तों ने बिछाए पलक-पावड़े, लंगरों में तरह-तरह के व्यंजनों से की मेहमाननवाजी
:- भीलवाड़ा, सवाईपुर, जहाजपुर, काछोला व बनेड़ा मार्गों पर पदयात्रियों की जबरदस्त भीड़
:- भोर तक गूंजे भजन, आज 11 भगवानों का होगा ऐतिहासिक मिलन
राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी
स्मार्ट हलचल|मेवाड़ अंचल के प्रसिद्ध धार्मिक धाम कोटड़ी में भगवान श्रीचारभुजानाथ के ऐतिहासिक जलझूलन महोत्सव को लेकर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। जलझूलनी एकादशी के मुख्य आयोजन से पहले ही कोटड़ी की ओर आने वाले सभी प्रमुख मार्ग श्रद्धालुओं से गुलजार हो गए। भीलवाड़ा, सवाईपुर, जहाजपुर, काछोला और बनेड़ा मार्गों पर सोमवार से ही हजारों पदयात्रियों की आवाजाही रही। हाथों में ध्वज, मुख पर श्रीचारभुजानाथ के जयकारे और भजनों की धुन के साथ श्रद्धालु कोटड़ी श्याम के दरबार की ओर बढ़ते रहे।
पदयात्रियों के स्वागत के लिए श्याम भक्तों ने रास्तों में पलक-पावड़े बिछा दिए। जगह-जगह लगाए गए सेवा शिविरों और लंगरों में श्रद्धालुओं की जमकर मेहमाननवाजी की गई। कहीं पूड़ी-सब्जी, कहीं दाल-बाटी, खिचड़ी, कचौरी और हलवा, आलूबड़ा, जलेबी, खिचड़ी तो कहीं चाय, दूध और ठंडे पेय से पदयात्रियों की मनुहार की गई। सेवा शिविरों में युवा और ग्रामीण देर रात तक पदयात्रियों की सेवा में जुटे रहे।
जयकारों से गूंजते रहे रास्ते, रातभर चलता रहा जत्थों का कारवां
सोमवार दोपहर बाद से शुरू हुआ पदयात्रियों के आने का सिलसिला रातभर जारी रहा। कई जत्थे ढोल-नगाड़ों और डीजे पर भक्ति गीतों के साथ कोटड़ी पहुंचे। कुछ श्रद्धालु परिवार के साथ तो कुछ संगठित समूहों में पैदल यात्रा करते हुए पहुंचे। रास्ते में जगह-जगह सेवा शिविर देखकर पदयात्रियों के चेहरे पर खुशी नजर आई। श्रद्धालुओं ने सेवा में जुटे लोगों का आभार जताते हुए कहा कि रास्ते में मिलने वाला अपनापन और सेवा यात्रा की थकान को दूर कर देता है।
भोर तक चली भजन संध्या, भक्ति में झूमते रहे श्रद्धालु

जलझूलन महोत्सव के तहत सोमवार रात आयोजित भव्य भजन संध्या में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। भजन गायक कलाकार लेहरु दास वैष्णव, नरेश प्रजापत, तृषा सुथार तथा पुष्पेंद्र जैसाना ने देर रात से लेकर भोर तक एक से बढ़कर एक भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां दीं। मंदिर परिसर जयकारों और भजनों से गूंजता रहा। रात बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता गया। भक्त भजनों पर झूमते, तालियां बजाते और भगवान श्रीचारभुजानाथ के जयकारे लगाते नजर आए। भोर तक चले इस भक्ति आयोजन के बाद अब मंगलवार को मुख्य जलझूलनी मेले को लेकर उत्साह चरम पर पहुंच गया है।

आज होगा जलझूलनी का ऐतिहासिक मेला

11 भगवानों के बेवाण निकलेंगे नगर भ्रमण पर, चौकी मंदिर पर होगा भावुक मिलन

जलझूलनी एकादशी पर मंगलवार को कोटड़ी में मुख्य जलझूलन महोत्सव आयोजित होगा। कस्बे के विभिन्न मंदिरों से भगवानों के बेवाण निकलेंगे। सभी बेवाण नगर भ्रमण करते हुए चौकी मंदिर पहुंचेंगे, जहां 11 भगवानों का ऐतिहासिक मिलन होगा। एक
वर्ष बाद होने वाले इस मिलन के दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहेंगे। भगवानों के बेवाण के मिलन के दौरान भक्तों में विशेष उत्साह रहेगा और कई श्रद्धालु भावविभोर नजर आएंगे।
चौकी मंदिर पर मिलन के बाद धर्माऊ तालाब तक निकलेगा बेवाण

चौकी मंदिर पर मिलन के बाद सभी 11 भगवानों के बेवाण धीरे-धीरे धर्माऊ तालाब के सोनी घाट की ओर प्रस्थान करेंगे। यहां एक-एक कर सभी भगवानों को सरोवर में जलविहार कराया जाएगा। अंत में भगवान श्रीचारभुजानाथ भक्तों के साथ धर्माऊ तालाब में डुबकी लगाएंगे। जलविहार के बाद घाट पर सभी भगवानों की सामूहिक आरती होगी। इसके बाद बेवाण वापस लौटेंगे और अलग-अलग मार्गों से अपने निज मंदिरों की ओर प्रस्थान करेंगे।
18 घंटे भक्तों के कंधों पर सवार रहेंगे ठाकुरजी
:- कोटड़ी की अनूठी परंपरा—बेवाण को रास्ते में नहीं रखा जाता, श्रद्धालु ही देते हैं कंधा

कोटड़ी की जलझूलन परंपरा की अपनी अलग पहचान है। भगवान के विराजमान बेवाण को मंदिर से निकलने के बाद जलविहार और वापसी तक भक्त अपने कंधों पर लेकर चलते हैं।
अन्य स्थानों पर रास्ते में विश्राम के दौरान बेवाण को कंधों से उतारकर सहारा दिया जाता है, लेकिन कोटड़ी में भगवान के बेवाण को भक्तों के कंधों पर ही रखने की परंपरा है। श्रद्धालुओं में भगवान के बेवाण को कंधा देने की होड़ रहती है। भक्त इसे भगवान की सेवा और अपना सौभाग्य मानते हैं।
कस्बे के 11 मंदिरों के भगवान देंगे एक साथ दर्शन
जलझूलन महोत्सव में कस्बे के 11 मंदिरों से बेवाण निकलते हैं। इनमें नृसिंहद्वारा से नृसिंह भगवान, डीडवानिया मंदिर से राधा-कृष्ण, वैष्णव मंदिर से राम-जानकी, महंत मंदिर से रघुनाथजी, आंवलीवाला मंदिर से गोपालनाथ, चौकी मंदिर से श्रीचारभुजानाथ, गढ़ स्थित मंदिर से लक्ष्मीनाथ, लढ़ा मोहल्ला से राधा-कृष्ण, अहीर मोहल्ला से रघुनाथजी तथा तोषनीवाल मोहल्ले से भगवान सत्यनारायण सहित अन्य देव प्रतिमाएं बेवाण में विराजमान होकर जलविहार करेंगी। एक ही स्थान पर विभिन्न भगवानों के दर्शन का अवसर मिलने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है।

किसान के वेश में नगर भ्रमण करेंगे श्रीचारभुजानाथ

:- दर्जी समाज के कारीगरों ने हाथों से तैयार की विशेष पोशाक, गोटा-तारी का भी किया काम

जलझूलन महोत्सव में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान श्रीचारभुजानाथ किसान के वेश में भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान के लिए विशेष पोशाक तैयार करने की जिम्मेदारी दर्जी समाज के कारीगरों ने निभाई। मंदिर परिसर में बैठकर हाथ की सूई-धागे से पोशाक तैयार की गई। गोटा-तारी का काम भी हाथों से किया गया। आकर्षक और महंगी पोशाकों के बजाय किसान के रूप में भगवान का नगर भ्रमण करना इस आयोजन की पुरानी परंपरा और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ा विशेष आकर्षण है।

त्रिवेणी के जल से होगा भगवान का अभिषेक

रात 3 बजे 11 पंडित करेंगे मंत्रोच्चार, इसके बाद सेठ के रूप में दर्शन देगे। जलझूलन महोत्सव में बड़ी संख्या में भक्तो की उपस्थिति को लेकर रात 12 से 1 बजे तक 1 घण्टे विश्राम के बाद भक्तो को दर्शन करेंगे। भगवान के शयन के पश्चात रात करीब 3 बजे विशेष अभिषेक होगा। दूध के साथ त्रिवेणीधाम बीगोद से कावड़ यात्रा के जरिए लाए गए पवित्र जल से भगवान श्रीचारभुजानाथ का अभिषेक किया जाएगा। 11 पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक कार्यक्रम होगा। इसके बाद भगवान स्वर्णजड़ित पोशाक धारण कर सेठ के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे।
सद्भावना का प्रतीक है कोटड़ी श्याम
कोटड़ी में भगवान श्रीचारभुजानाथ सभी धर्मों की आस्था के केंद्र माने जाते हैं। यहां हिंदू समाज के साथ मुस्लिम समाज के लोग भी भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु भगवान को प्रसाद चढ़ाकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।इसी सामूहिक आस्था और सहभागिता के कारण कोटड़ी श्याम का जलझूलन महोत्सव सामाजिक सद्भाव और समभाव की मिसाल भी माना जाता है। आयोजन में विभिन्न समाजों के लोग सेवा और व्यवस्थाओं में भागीदारी निभाते हैं।
मेले को लेकर प्रशासन अलर्ट

:- अतिरिक्त पुलिस बल तैनात, यातायात व सुरक्षा व्यवस्था पर रहेगी विशेष नजर
जलझूलनी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। उपखंड अधिकारी कल्पना मीणा, तहसीलदार, पुलिस उपाधीक्षक, थाना प्रभारी सहित विभागीय अधिकारी व्यवस्थाओं पर निगरानी रखेंगे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले से अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। मंदिर ट्रस्ट, पंचायत और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन, यातायात, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्य बाजार से मंदिर परिसर तक विशेष रोशनी की गई है और पूरे कोटड़ी में मेले की रौनक छाई हुई है। आज श्रद्धा, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
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