जबरन बेदखली और ब्लास्टिंग के आरोपों से घिरी आदित्य सीमेंट फैक्ट्री, अमराना वासियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

🔴 बड़ी खबर | हाईकोर्ट पहुंचा मामला

जबरन बेदखली और ब्लास्टिंग के आरोपों से घिरी आदित्य सीमेंट फैक्ट्री, अमराना वासियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

बिना मुआवजा घर-मकान खाली कराने, मुकदमों में फंसाने और धमकाने के आरोप;
150-200 मीटर दूर माइंस में ब्लास्टिंग से मकानों को नुकसान पहुंचने का ग्रामीणों का दावा

आदित्य सीमेंट फैक्ट्री के विरुद्ध अमराना ग्रामीणों की हाईकोर्ट में याचिका

फोटो : संबंधित पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई

चित्तौड़गढ़। स्मार्ट हलचल।सावा-शम्भुपुरा क्षेत्र की आदित्य सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ रेल का
अमराना गांव के ग्रामीण अब राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। ग्रामीणों ने फैक्ट्री
प्रबंधन पर बिना मुआवजा दिए घर-मकान और बाड़ों से बेदखल करने, दबाव बनाने,
पुलिस के माध्यम से परेशान करने और मुकदमे दर्ज करवाने
जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

ग्रामीणों के प्रमुख आरोप
  • बिना मुआवजा दिए घर-मकान खाली कराने का दबाव
  • विरोध करने वाले ग्रामीणों पर मुकदमे दर्ज करवाने का आरोप
  • गांव खाली नहीं करने पर रोजगार प्रभावित करने की धमकी का दावा
  • गांव से 150-200 मीटर दूर माइंस में ब्लास्टिंग का आरोप
  • ब्लास्टिंग से मकानों की छतों और सामान को नुकसान पहुंचने का दावा

जबरन बेदखली का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि आदित्य सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा अपने प्रभाव और
ताकत का इस्तेमाल कर उन्हें उनके घरों, मकानों और बाड़ों से हटाने के प्रयास किए
जा रहे हैं। उनका कहना है कि उचित मुआवजा दिए बिना पुश्तैनी रिहायशी
स्थान छोड़ने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार विरोध करने वालों को पुलिस के माध्यम से परेशान किया जा रहा है
तथा उनके विरुद्ध मुकदमे दर्ज करवाने के आरोप भी लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने इसे
अपनी रोजी-रोटी और रिहायशी अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए न्याय की
मांग की है।

कलेक्ट्रेट पर धरना, नोटिस के बाद हाईकोर्ट पहुंचे ग्रामीण

प्रेस नोट के अनुसार ग्रामीण इस मामले को लेकर पूर्व में चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्रेट
पर धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। ग्रामीणों की ओर से अधिवक्ताओं के माध्यम से
फैक्ट्री प्रबंधन को कानूनी नोटिस भी दिए गए, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद
समस्या का समाधान नहीं हुआ।

इसके बाद ग्रामीणों ने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर का रुख किया। ग्रामीणों की ओर
से अधिवक्ता जसवंत सिंह राठौड़, चित्तौड़गढ़ एवं सत्यप्रकाश सिंह,
जोधपुर
के माध्यम से एस.बी. सिविल रिट पिटीशन दायर
की गई है।

150-200 मीटर दूर माइंस, ब्लास्टिंग को लेकर गंभीर सवाल

ग्रामीणों ने माइंस में होने वाली ब्लास्टिंग को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है।
उनका दावा है कि गांव से महज 150 से 200 मीटर की दूरी पर माइंस
संचालित होती है, जहां भारी ब्लास्टिंग किए जाने से आसपास के मकानों को नुकसान
पहुंच रहा है।

ग्रामीणों का दावा:
ब्लास्टिंग के कारण घरों की छतें टूट गईं, पक्के मकानों को नुकसान पहुंचा और
घरों में रखा सामान नीचे गिरने लगा। ग्रामीणों ने बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों
की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।

हाईकोर्ट में सुनवाई, ग्रामीणों को न्याय की उम्मीद

ग्रामीणों की ओर से दायर याचिका न्यायालय में विचाराधीन है। प्रेस नोट के अनुसार
मामले में अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है। अब ग्रामीणों की निगाहें
हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।

महत्वपूर्ण:
इस खबर में आदित्य सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन के संबंध में उल्लेखित बातें
ग्रामीणों/याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। मामला न्यायालय
में विचाराधीन है और आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
फैक्ट्री प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

आधार: अधिवक्ता जसवंत सिंह राठौड़ द्वारा जारी प्रेस नोट,
दिनांक 22 सितंबर 2026।

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