18 घंटे भक्तों के कंधों पर नगर भ्रमण कर निज धाम पहुंचे चारभुजानाथ

:- भक्ति में डूबा कोटड़ी, जयकारों से गूंजा, सुबह 9 बजे सिंहासन पर विराजे प्रभु, किसान रूप में दिए भक्तों को दर्शन
राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी
स्मार्ट हलचल|मेवाड़ के आराध्य देव एवं जनजन की आस्था के केंद्र श्री चारभुजानाथ के जलझूलनी महोत्सव का समापन बुधवार को भक्तिमय वातावरण में हुआ। जलझूलनी एकादशी के अवसर पर भगवान चारभुजानाथ करीब 18 घंटे तक भक्तों के कंधों पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हुए बुधवार सुबह अपने निज धाम पहुंचे। इस दौरान पूरे नगर में श्रद्धा का सैलाब उमड़ा रहा। भगवान के दर्शन और बेवाण को कंधा लगाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ सी लगी रही।

18 घंटे तक चला प्रभु का नगर भ्रमण

मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे श्री चारभुजानाथ मंदिर से भगवान की जलझूलनी यात्रा शुरू हुई। सजे-धजे रजत बेवाण में विराजमान प्रभु के दर्शन के लिए मंदिर परिसर से लेकर नगर के प्रमुख मार्गों तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान के नगर भ्रमण के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। घरों की छतों और रास्तों के दोनों ओर खड़े भक्तों ने भगवान की आरती उतारी और जयकारे लगाए।
शाम को भक्तो के संग भगवान धर्माऊ तालाब के घाट पर पहुंचे जहां परंपरानुसार जलविहार कराया गया। जलझूलन के इस धार्मिक आयोजन को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कोटड़ी पहुंचे। तालाब परिसर में भी देर तक भक्ति का माहौल बना रहा।

बेवाण को कंधा लगाने के लिए मची होड़

जलविहार के बाद भगवान चारभुजानाथ को बेवाण में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। भगवान को कंधा लगाने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया। जैसे ही बेवाण भक्तों के बीच पहुंचता, उसे अपने कंधों पर उठाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती। कई भक्तों ने इसे अपना सौभाग्य मानते हुए भगवान के बेवाण को कंधा दिया। रातभर भगवान के साथ श्रद्धालुओं का कारवां नगर में भ्रमण करता रहा। श्री चारभुजानाथ के जयकारों से कोटड़ी का वातावरण गूंजता रहा। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु सुबह 9 बजे भगवान के निज धाम पहुचने तक यात्रा में शामिल रहे।
रातभर जागते रहे भक्त, सुबह हुआ निज धाम में प्रवेश

करीब 18 घंटे के नगर भ्रमण के बाद बुधवार सुबह 9 बजे भगवान चारभुजानाथ निज धाम पहुंचे। भगवान के मंदिर पहुंचते ही श्रद्धालुओं में मेला सकुशल सम्पन्न होने पर खुशी की लहर दौड़ गई। मंदिर परिसर में जयकारों के साथ भगवान का स्वागत किया गया। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान को पुनः उनके सिंहासन पर विराजमान किया गया।भगवान के वापस सिंहासन पर विराजमान होने के साथ ही श्रद्धालुओं ने राहत और आनंद के साथ दर्शन किए। कई भक्तों ने भगवान के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और क्षेत्र में अच्छी वर्षा की कामना की।

किसान रूप में सजे प्रभु, दर्शन को उमड़ा जनसैलाब

निज धाम पहुंचने के बाद भगवान चारभुजानाथ ने किसान रूप में भक्तों को दर्शन दिए। भगवान का यह विशेष स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। सुबह से ही मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की कतारें लग गईं। ग्रामीण क्षेत्र से आए श्रद्धालु विशेष रूप से किसान स्वरूप के दर्शन करने पहुंचे। किसान रूप में भगवान के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने अच्छी फसल, खुशहाली और क्षेत्र की समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।

पूरे नगर में दिखाई दिया आस्था और एकता का संगम

जलझूलनी महोत्सव के दौरान कोटड़ी में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी अनूठा नजारा देखने को मिला। अलग-अलग समाजों और गांवों से आए श्रद्धालु भगवान की यात्रा में शामिल हुए। जगह-जगह स्वागत और सेवा शिविर लगाए गए। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रसाद और अन्य व्यवस्थाएं की गईं। मंदिर ट्रस्ट, आयोजन समिति, स्वयंसेवकों और प्रशासन की ओर से भी व्यवस्थाओं को संभाला गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए कार्यकर्ता लगातार जुटे रहे। जलझूलनी महोत्सव के समापन पर भगवान श्रीचारभुजानाथ के 18 घंटे के नगर भ्रमण ने कोटड़ी की धार्मिक परंपरा, आस्था और जनभागीदारी की भव्य तस्वीर पेश की। प्रभु के निज धाम लौटने और किसान रूप में दर्शन देने के साथ ही श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर महोत्सव को विदाई दी। श्री चारभुजा मन्दिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुदर्शन गाड़ोदिया, सचिव श्याम सुन्दर चेचानी, कोषाध्यक्ष चम्पा लाल तेली, उपखण्ड अधिकारी प्रीति मीणा, पुलिस उपाधीक्षक सुरेश डाबरिया, थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह ने सकुशल मेला सम्पन्न होने पर एक दूसरे को बधाई दी।