राजेश जीनगर
भीलवाड़ा/जिले में राजीविका (राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद) परियोजना के तहत सीएचसी योजना में ट्रैक्टर खरीद को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिसको लेकर गुरुवार को बड़ी संख्या में सीएलएफ द्वारा जिला प्रशासन को भी अवगत करवाया गया। राजीविका सीएलएफ सखी संगठन के संयोजक दिपक व्यास ने जिला प्रशासन को इस बारे में ज्ञापन भी सोंपा है। जिसमें बताया गया है की सीएलएफ पदाधिकारी और क्लस्टर टीम को जिला परियोजना द्वारा संदेश दिया गया और उनके अनुसार प्रथम मीटिंग हमारे साथ कृषि अधिकारी की मिलकर करवाई गई। जिसमें सीएलएफ द्वारा पॉलिसी अनुसार सीएलएफ कार्यकारिणी सहमति अनुसार के क्रय करने के लिए हमने उनको बताया था। जिला अनुसार उन्होंने प्रथम बार जिले पर टेंडर कर हमे ट्रैक्टर के टेंडर के लिए डॉक्यूमेंट खाली लेकर जिले पर टेंडर के दिन बुलाया गया जिसमें पहले से हमे कुछ पता नहीं था और हमे बोला ट्रैक्टर के टेंडर किए, सीएलएफ पदाधिकारी गए और उन्होंने सील साइन के साथ बुलाया और फिर बोल दिया कि हमने टेंडर निरस्त कर दिए तो पदाधिकारी वापिस लौट गये, सीएलएफ को इसके कोई दिशानिर्देश नहीं दिए कि टेन्डर क्यों निरस्त किये गये। कुछ दिनों बाद वापिस जिले से टेंडर किए और बोला कि डॉक्यूमेंट जिले से भेज रहे है। सीएलएफ से साइन कर के भेज दो और सीएलएफ ने साइन कर भेज दिए, इसके बारे में सीएलएफ को कुछ नहीं बताया। टेंडर जिला वालों ने डीपीएम नागेंद्र तोलंबिया और अकाउंटेंट गौरव के निर्देशानुसार हुए और हमे टेंडर के दिन नहीं सूचना की और खुद ने ही टेंडर को सील बंद किया और स्वयं के पास ही चाबी रखी गई और हमारी कोई कमेटी को सूचना नहीं की गई। अगले दिन बोला गया कि आपके 2 महिलाओं को जिले पर खाली लेटर हेड और सील लेकर भेजे तो हमने बोला कि टेंडर खोलने है और आप लोगों को जो टेंडर में ट्रैक्टर आया है महेंद्रा और ग्रौमेक्स 6.90 लाख की दर से टेंडर में आया जो लेना ही है सीएलएफ दोनों पदाधिकारी पर दबाव बनाकर लेने के लिए बोला है। पदाधिकारी द्वारा और हमारी सीएलएफ ई.सी. द्वारा जानकारी की गई तो वो ट्रैक्टर मार्केट में 5.80 लाख में ही मिल रहा है। हमे लगा ये मिलीभगत से टेंडर प्रक्रिया हुई है और सीएलएफ को सीधा एक लाख का नुकसान हों रहा है। सीएलएफ पदाधिकारी द्वारा बताया कि हमने प्रथम मीटिंग में तो इसी सहमति अनुसार ट्रैक्टर के लिए बोला था वो ट्रैक्टर चाहिए हमे तो परंतु उन्होंने दबाव बनाकर बोला कि ये ही लेना पड़ेगा। एक उच्चाधिकारी का नाम लेकर डराया गया और बताया हमे तो हमने दबाव में कुछ सीएलएफ ने साइन कर दिए परंतु हमने हमारी ई.सी. मीटिंग में जाकर बताया और सभी ने फिर निर्णय किया कि ट्रैक्टर लेंगे पर रिहायत दर पर जो वास्तविक मार्केट में रेट दर पर मिल रहा वो ही लेना है। ज्ञापन में मांग की गई है की सरकार की स्कीम में हमे जो प्रथम मीटिंग में निर्णय हुआ ट्रैक्टर लेने का वो हमे रियायत दर पर कमेटी को ट्रैक्टर क्रय करवाया जाए और हम आर्थिक स्तर पर कमजोर महिलाओं को ज्यादा दर पर ट्रैक्टर नहीं दिलवाया जाए, जिससे सरकार के पैसों की भी बचत हो और हमे वास्तविक मार्केट दर का पसंदीदी ट्रैक्टर अच्छी गुणवत्ता का ट्रैक्टर मिले ।
विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप
उधर, दुसरी और विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की शिकायत की गई है। जिसमें स्पष्ट किया है की सीएचसी पॉलिसी के अनुसार सीएलएफ की कार्यकारिणी अपनी सहमति से मनचाहा ट्रैक्टर खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, बावजूद इसके अधिकारियों द्वारा एक विशेष ट्रेक्टर फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए ऊंची दरों पर ट्रैक्टर थोपे जा रहे हैं। जिससे सभी सीएलएफ में गहरा रोष व्याप्त है। परियोजना के अंतर्गत 12 ट्रैक्टर खरीदे जाने हैं आप है कि इस प्रक्रिया में सीएलएफ संकुल स्तरीय संघ की स्वायत्तता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया। अधिकारियों को अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सीएलएफ के कुछ पदाधिकारी को व्हाट्सएप कॉल के जरिए मजबूर किया गया है और उन्हें कार्यालय बुलाकर खाली लेटर हेड और सील ले ली गई, वहीं बताया जा रहा है कि जिस ट्रैक्टर की वास्तविक खरीद बाजार दर लगभग 5 लाख 70 हजार रुपए है उसका टेंडर मिलीभगत कर के 06 लाख 90 हजार की ऊंची दर पर करवाया जा रहा है यानी प्रति ट्रैक्टर करीब 01 लाख 20 हजार रुपए का सीधा आर्थिक नुकसान सीएलएफ और सरकारी खजाने को पहुंचाया जा रहा है। अब इस ट्रैक्टर खरीदने का मामला गहरा था जा रहा है और मांग की जा रही है कि ऊंची दरवाजे इन विवादित टेंडर को तुरंत निरस्त किया जाए भ्रष्टाचार और मिली भगत में शामिल विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंड मत करवाई किया जाए सीएफ को उनकी पसंद और नियमानुसार सही बाजार दर पर ट्रैक्टर खरीदने की अनुमति दी जाए।
