विश्व आयुर्वेद परिषद ने राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
भीलवाड़ा, 23 सितंबर। स्मार्ट हलचल|आयुर्वेद को केवल ‘वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति’ के रूप में नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रतिष्ठित करने की मांग को लेकर विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट एवं अतिरिक्त जिला कलेक्टर (शहर) श्रीमती प्रतिभा देवठिया, RAS को सौंपा गया।ज्ञापन में कहा गया कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन एवं वैज्ञानिक चिकित्सा परंपरा है, जिसका इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। आयुर्वेद केवल चिकित्सा विज्ञान ही नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, रोगों की रोकथाम तथा दीर्घकालीन स्वास्थ्य संरक्षण की समग्र व्यवस्था प्रस्तुत करता है। इसके मूल सिद्धांत स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा तथा रोगी के रोग का निवारण करने पर आधारित हैं।
विश्व आयुर्वेद परिषद ने कहा कि वर्तमान समय में आयुर्वेद के प्रति देश-विदेश में बढ़ती स्वीकार्यता तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के निरंतर विस्तार को देखते हुए इसे केवल ‘वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति’ के रूप में देखना उचित नहीं है। परिषद ने आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता एवं प्रतिष्ठा प्रदान किए जाने की मांग की।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी एवं अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों को देश की पहचान और गौरव के रूप में सम्मान प्राप्त है। उसी प्रकार भारत की हजारों वर्ष पुरानी चिकित्सा विरासत आयुर्वेद को भी राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रतिष्ठित किया जाना चाहिए। परिषद का कहना है कि इससे भारतीय चिकित्सा ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान मिलेगी तथा आयुर्वेद के संरक्षण, संवर्धन, शिक्षा और अनुसंधान को नई गति मिल सकती है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आयुर्वेद की विशेषता केवल रोग उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण, रोगों की रोकथाम, आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या एवं स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य पर केंद्रित है। ऐसे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था में आयुर्वेद की भूमिका को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाने की आवश्यकता है।
ज्ञापन में आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, चिकित्सालयों एवं औषधीय अनुसंधान को मजबूत करने तथा आमजन तक गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेद चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की मांग भी रखी गई।
इस अवसर पर विश्व आयुर्वेद परिषद के चित्तौड़ प्रांत प्रभारी डॉ. संजय नागर, भीलवाड़ा विभाग संयोजक डॉ. संजय शर्मा, जिला संयोजक डॉ. मुकेश वैष्णव, चिकित्साधिकारी संघ अध्यक्ष डॉ. सतीश शर्मा, परिषद के सदस्य डॉ. ज्ञानेंद्र गोयल, डॉ. दिलीप सिंह परमार सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।