@शाश्वत तिवारी
लखनऊ।स्मार्ट हलचल|जनप्रतिनिधि होना केवल चुनाव जीतकर कुर्सी पर बैठना नहीं, बल्कि जनता के सुख-दुख में उसके साथ खड़ा होना है। पद की असली गरिमा तब दिखाई देती है, जब संकट के समय जनप्रतिनिधि वातानुकूलित कमरों से निकलकर उसी सड़क पर खड़ा दिखाई दे, जहां आम नागरिक परेशान हो रहा हो।
लखनऊ में इस समय लगातार हो रही बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। राजधानी के अनेक इलाकों में जलभराव, कीचड़, गंदगी और यातायात की परेशानी की तस्वीरें सामने आ रही हैं। 24 सितंबर से जारी भारी बारिश के बाद से ही शहर के कई प्रमुख इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई।
ऐसे चुनौतीपूर्ण मौसम में डालीगंज के मनकामेश्वर वार्ड के पार्षद, लखनऊ यूनिर्वसिटी के चर्चित छात्र रहे, एक बेहतरीन खिलाड़ी और गोमती सफाई अभियान के मुख्य सूत्रधार, रणजीत सिंह का अपने क्षेत्र में सक्रिय रहना चर्चा का विषय बना है।
स्थानीय लोगों के अनुसार मनकामेश्वर वार्ड के विभिन्न मोहल्लों में जलनिकासी व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने के साथ रणजीत सिंह स्वयं नालियों और सड़कों की सफाई के काम में जुटे दिखाई देते हैं। बारिश हो या सामान्य दिन, क्षेत्र की छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर उनका मौके पर पहुंचना और कर्मचारियों के साथ मिलकर समाधान कराने का प्रयास स्थानीय स्तर पर उनकी कार्यशैली को अलग पहचान देता है। खास बात यह है कि जिस काम को केवल सफाईकर्मियों या नगर निगम के कर्मचारियों की जिम्मेदारी मानकर छोड़ दिया जा सकता था, उसमें हमारे पार्षद स्वयं हर मौके पर खड़े दिखाई देते हैं। यही वह भावना है, जो जनप्रतिनिधि और जनता के बीच विश्वास का पुल बनाती है। मनकामेश्वर वार्ड के वरिष्ठ समाजसेवी विष्णु तिवारी सहित कई नागरिकों का कहना है कि लगातार बारिश के बावजूद क्षेत्र में जलभराव की स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए नालियों की सफाई और जलनिकासी पर लगातार ध्यान दिया गया। इसका परिणाम यह रहा कि भारी बारिश के दौर में भी इस क्षेत्र के कई हिस्से दूसरे जलभराव प्रभावित इलाकों की तुलना में कम प्रभावित रहे।
यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी एक वार्ड की बेहतर स्थिति का पूरा श्रेय केवल एक व्यक्ति को देना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा। जलनिकासी में नगर निगम के कर्मचारी, सफाई व्यवस्था, नालों की संरचना, पंपिंग व्यवस्था और स्थानीय नागरिकों का सहयोग, सभी की भूमिका होती है। लेकिन जनप्रतिनिधि का मौके पर सक्रिय रहना और व्यवस्थाओं की निगरानी करना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लोकतंत्र में पार्षद जनता का सबसे नजदीकी निर्वाचित प्रतिनिधि होता है। सांसद और विधायक की अपनी बड़ी जिम्मेदारियां हैं, लेकिन मोहल्ले की सड़क, नाली, सफाई, जलभराव और रोजमर्रा की नागरिक समस्याओं से सबसे पहले सामना पार्षद और स्थानीय निकाय का होता है।
इसीलिए एक पार्षद की जिम्मेदारी केवल बैठकों में भाग लेने तक सीमित नहीं हो सकती।
जहां पानी भरा हो, वहां पहुंचना। जहां नाली बंद हो, वहां सफाई सुनिश्चित कराना। जहां सड़क टूटी हो, वहां समाधान के लिए आवाज उठाना। और जहां नागरिक परेशान हो, वहां उसके बीच खड़ा होना, यही जनसरोकार की वास्तविक तस्वीर है। रणजीत सिंह का अपने वार्ड में इस तरह सक्रिय रहना इस दृष्टि से एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
लखनऊ के अनेक क्षेत्रों में बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों में हजरतगंज, कृष्णानगर, अलीगंज, गोमतीनगर, इंदिरानगर, चारबाग, चौक और अन्य क्षेत्रों में बारिश से जनजीवन प्रभावित होने का उल्लेख है।
इस परिस्थिति में मनकामेश्वर वार्ड का उदाहरण एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करता है,
क्या हर वार्ड में जनप्रतिनिधि इसी तरह मौके पर उतरकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं?
अगर पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों में बारिश से पहले नालियों की सफाई, जलनिकासी के संवेदनशील स्थानों की पहचान, सफाई कर्मचारियों की निगरानी और नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान पर लगातार ध्यान दें, तो निश्चित रूप से बरसात के दौरान आम लोगों की परेशानी कम की जा सकती है।
नगर निगम ने भी इस वर्ष नालों की सफाई और जलभराव की रोकथाम को लेकर समयबद्ध निर्देश दिए थे। अब जरूरत केवल आदेशों की नहीं, बल्कि जमीन पर उनकी प्रभावी निगरानी और क्रियान्वयन की है।
जनप्रतिनिधि के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि उसके पोस्टर कितने बड़े हैं या उसके नाम के कितने नारे लगते हैं।
सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि, बारिश में हर परिवार अपने घर में सुरक्षित रह सके, बच्चे बिना जोखिम स्कूल पहुंच सकें, बुजुर्गों को कीचड़ भरे पानी से होकर न गुजरना पड़े, और हर नागरिक को यह महसूस हो कि उसकी समस्या सुनने वाला कोई तो है। यही जनप्रतिनिधित्व की असली परीक्षा है।
रणजीत सिंह की सक्रियता को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की सड़क और नाली की समस्या को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझकर उसके समाधान के लिए दिन-रात जुटता है, तो यह निश्चित रूप से अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रेरणा का विषय बन सकता है।
हालांकि केवल जनप्रतिनिधि या नगर निगम ही जलभराव की समस्या का समाधान नहीं कर सकते। नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि नालियों में कूड़ा न डालें, जलनिकासी के रास्तों को अवरुद्ध न करें और जहां समस्या दिखाई दे, वहां समय रहते संबंधित विभाग को सूचित करें।
शहर हमारा है, सड़क हमारी है और नाली भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मनकामेश्वर वार्ड की यह तस्वीर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि जब जनप्रतिनिधि और जनता मिलकर अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होते हैं, तो कठिन परिस्थितियों का सामना अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से किया जा सकता है।
बारिश अभी जारी है और चुनौतियां भी।
ऐसे समय में जरूरत है कि हर वार्ड का जनप्रतिनिधि जनता के बीच दिखाई दे, सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि संकट के हर समय।
क्योंकि लोकतंत्र में पद सम्मान देता है, लेकिन जनसेवा उस सम्मान को सार्थक बनाती है।
और जब कोई जनप्रतिनिधि जनता की परेशानी को अपनी परेशानी समझकर सड़क पर उतरता है, तो वह केवल अपना दायित्व नहीं निभाता, वह जनप्रतिनिधित्व की परिभाषा को जमीन पर जीवंत करता है।
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