70वीं जिला स्तरीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता में शाहपुरा सीनियर सेकेंडरी स्कूल विजेता, मॉडल स्कूल रहा उपविजेता,
सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा-खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना जगाते हैं
रायला(शाहपुरा)-मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|रायला के एसकेएम विद्यालय का खेल मैदान कई दिनों तक वॉलीबॉल की तेज रफ्तार, खिलाड़ियों के जोश और जीत के जुनून का गवाह बना रहा। कभी जोरदार स्मैश से तालियां गूंजीं तो कभी शानदार ब्लॉक और रक्षात्मक खेल ने दर्शकों को रोमांचित किया। 70वीं जिला स्तरीय 17 वर्ष छात्र-छात्रा वॉलीबॉल प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला जैसे-जैसे निर्णायक दौर में पहुंचा, मैदान का उत्साह भी चरम पर पहुंचता गया।
भीलवाड़ा जिले की 47 टीमों की भागीदारी वाली इस प्रतियोगिता का फाइनल एवं समापन समारोह खेल भावना और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। प्रतियोगिता में शाहपुरा सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि शाहपुरा मॉडल स्कूल उपविजेता रहा। विद्या सीनियर स्कूल पालड़ी ने तीसरा तथा मंडफिया चारणान की टीम ने चैथा स्थान प्राप्त किया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए खेलों को युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना का विकास करते हैं तथा विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने जीत के लिए पूरा दमखम लगाया। नेट के दोनों ओर से लगाए गए जोरदार स्मैश, सटीक ब्लॉक और बेहतरीन डिफेंस ने मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा।
हर अंक के साथ खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ता गया और मैदान के बाहर मौजूद साथी खिलाड़ियों, शिक्षकों तथा खेलप्रेमियों की तालियों ने उनका हौसला बढ़ाया। फाइनल में खिलाड़ियों ने सिर्फ तकनीकी कौशल ही नहीं दिखाया, बल्कि दबाव के बीच संयम और टीम के साथ तालमेल की मिसाल भी पेश की। यही खेल की वास्तविक खूबसूरती है एक खिलाड़ी की प्रतिभा तभी टीम को जीत की ओर ले जाती है, जब उसके साथियों का सहयोग और सामूहिक रणनीति मजबूत हो।
47 टीमों ने दिखाया खेल कौशल–
जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 47 टीमों की भागीदारी ने जिले में वॉलीबॉल के प्रति विद्यार्थियों की रुचि को सामने रखा। कई दिनों तक चले मुकाबलों में विभिन्न विद्यालयों के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों के लिए ऐसी प्रतियोगिताएं केवल मुकाबले का मंच नहीं होतीं, बल्कि अपने कौशल को बड़े स्तर पर परखने और आगे की प्रतियोगिताओं के लिए अनुभव हासिल करने का अवसर भी देती हैं। एक-एक मैच के साथ खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल, टीम रणनीति और दबाव में प्रदर्शन करने का अनुभव मिला। यही अनुभव भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचने वाले खिलाड़ियों की नींव मजबूत कर सकता है।
सांसद अग्रवाल ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला–
समापन समारोह में सांसद दामोदर अग्रवाल ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और उनके प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना का विकास करते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए खेलों में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया। सांसद का संदेश इस मायने में महत्वपूर्ण रहा कि विद्यार्थियों के लिए खेल केवल प्रतियोगिता में जीत हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया भी है। उन्होंने खिलाड़ियों को मेहनत, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
‘मैदान की सीख जीवन में भी काम आती है’–
नवग्रह आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष व कार्यक्रम के अध्यक्ष वैद्य हंसराज चैधरी ने खिलाड़ियों को खेल भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खेल को हमेशा खेल की भावना से खेलना चाहिए। उन्होंने वॉलीबॉल को तेज गति वाला टीम खेल बताते हुए कहा कि इसमें खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल, अनुशासन और सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी है। खेल विद्यार्थियों को जीत के साथ-साथ हार को स्वीकार करना, गलतियों से सीखना और अगले मुकाबले के लिए फिर से तैयारी करना भी सिखाता है। उन्होंने खिलाड़ियों से नियमित अभ्यास करने और अपने खेल कौशल को लगातार निखारने का आह्वान किया। साथ ही शिक्षा के साथ खेलों में भी आगे बढ़ने की बात कही।
शाहपुरा की दोनों टीमों का शानदार प्रदर्शन–
प्रतियोगिता का परिणाम शाहपुरा के खेल प्रेमियों के लिए खास रहा। शाहपुरा सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने प्रथम स्थान हासिल कर अपनी श्रेष्ठता साबित की, जबकि शाहपुरा मॉडल स्कूल ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। एक ही क्षेत्र की दोनों टीमों का शीर्ष दो स्थानों पर पहुंचना शाहपुरा में वॉलीबॉल प्रतिभाओं के लिए उत्साहजनक संकेत है। इससे विद्यालयों में खेल गतिविधियों को और मजबूत करने तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण देने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। विजेता और उपविजेता टीमों के खिलाड़ियों को अतिथियों ने सम्मानित किया। खिलाड़ियों को बधाई देते हुए आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दी गईं।
पढ़ाई के साथ खेल भी जरूरी–
समारोह में वक्ताओं ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में खेलों की भूमिका पर जोर दिया। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में शिक्षा के साथ खेलों में रुचि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को अधिक व्यापक बनाती है। खेल मैदान विद्यार्थियों को अनुशासन, समय प्रबंधन, नेतृत्व, टीमवर्क और संघर्ष की भावना सिखाता है। हार के बाद दोबारा मैदान में उतरने का साहस और जीत के बाद संयम बनाए रखना भी खेल जीवन की महत्वपूर्ण सीख है। ऐसे में विद्यालय स्तर पर होने वाली जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं।
रंगारंग प्रस्तुतियों ने बढ़ाई समारोह की रंगत–
समापन समारोह के दौरान एसकेएम विद्यालय के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। विभिन्न सांस्कृतिक एवं मनोरंजक प्रस्तुतियों ने खेल समारोह को एक अलग रंग दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। खेल मैदान की प्रतिस्पर्धा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम ने वातावरण को उत्सव में बदल दिया। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया।
आयोजन में जुटे खेलप्रेमी और गणमान्य नागरिक–
समापन समारोह में पीईओ रायला नंदराम शर्मा, जिला परिषद सदस्य शंकर कुड़ी, विभागीय प्रतिनिधि दिलीप सिंह कानावत, नवग्रह आश्रम संस्थापक हंसराज चैधरी, भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री एवं जिला उपाध्यक्ष कल्पेश चैधरी, एसकेएम विद्यालय निदेशक जितेंद्र चैधरी, चयनकर्ता रामदयाल चैधरी तथा प्रतियोगिता संयोजक नरेश पाल सिंह सहित अनेक अतिथि मौजूद रहे।
इसके अलावा रायला के कार्यकर्ता कृष्ण गोपाल कोगटा, दिलीप नुवाल, अशोक कचोलिया, सत्यनारायण छीपा, ज्ञान राका, देवकीनंदन शर्मा, रघु जीनगर सहित गणमान्य नागरिक भी समारोह में उपस्थित रहे।
जीत से आगे नई प्रतिभाओं की तलाश-
70वीं जिला स्तरीय प्रतियोगिता का समापन भले ही विजेता और उपविजेता के सम्मान के साथ हुआ, लेकिन खेल मैदान से निकला संदेश इससे कहीं बड़ा है। शाहपुरा सीनियर सेकेंडरी स्कूल की जीत और शाहपुरा मॉडल स्कूल का उपविजेता बनना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में वॉलीबॉल की प्रतिभाएं मौजूद हैं। जरूरत है तो उन्हें नियमित अभ्यास, बेहतर मार्गदर्शन और लगातार प्रतियोगिताओं का मंच देने की। सांसद दामोदर अग्रवाल का खेलों को लेकर दिया गया संदेश भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। यदि विद्यालय, खेल प्रशिक्षक, अभिभावक, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संस्थाएं मिलकर प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का वातावरण तैयार करें तो ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के खिलाड़ी भी बड़े मंचों तक पहुंच सकते हैं। रायला के एसकेएम विद्यालय में गूंजती तालियां, खिलाड़ियों के जोशीले स्मैश और शाहपुरा की दोनों टीमों की सफलता ने एक बार फिर यह साबित किया कि प्रतिभा मैदान पहचानता हैकृबस उसे अवसर और निरंतर प्रोत्साहन की जरूरत होती है।