माता जी का खेड़ा (भटेड़ा) में पंचायती राज चुनाव बहिष्कार की गूंज: 12 सूत्रीय मांगों को लेकर अड़े माता जी का खेड़ा के ग्रामीण

दिनेश कुमार सुवालका, भटेड़ा

भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल|जिले की बनेड़ा पंचायत समिति क्षेत्र की घरटा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले माता जी का खेड़ा (भटेड़ा) गांव में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया है। ग्रामीण चांदमल कुमावत ने बताया कि आज के समय में हर गांवों में सड़क नाली बिजली पानी जैसी मूलभूत बुनियादी सुविधाएं पहुंच चुकी है, लेकिन हमारा गांव माताजी खेड़ा आज भी बुनियादी सुविधाओं से अछूता है। सालों से विकास की राह देख रहे ग्रामीणों ने एकजुट होकर आगामी पंचायत चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने एकत्र होकर “समस्या हमारी, समाधान तुम्हारा – अब और नहीं इंतज़ार!” और “पहले समस्याओं का समाधान, फिर कोई चुनाव अभियान!” नारेबाजी करते हुए बैनर थामकर प्रशासन और राजनेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि हर बार चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन मतदान खत्म होते ही गांव को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है। इस बार ग्रामीणों ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी 12 सूत्रीय मांग पत्र पर जमीनी काम शुरू नहीं होता, तब तक क्षेत्र में किसी भी प्रत्याशी को कदम नहीं रखने दिया जाएगा और न ही कोई ग्रामीण वोट डालने जाएगा।
यह हैं ग्रामीणों की 12 प्रमुख मांगें, जिन पर अड़ा है पूरा गांव:ग्रामीणों ने गांव के समग्र विकास के लिए 12 सूत्रीय मांगें प्रशासन के समक्ष रखी हैं:
* राजस्व व भूमि विस्तार: ‘माताजी का खेड़ा’ को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए और गांव के आबादी क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर उसे दोगुना किया जाए।
* शिक्षा क्षेत्र में सुधार: स्थानीय विद्यालय में लंबे समय से रिक्त चल रहे शिक्षकों के पदों को भरा जाए और छात्रों के लिए नए कमरों का निर्माण कराया जाए।
* सड़क व संपर्क मार्ग की बदहाली: माताजी का खेड़ा से कुंडिया खुर्द जाने वाले रास्ते को तुरंत चालू किया जाए और माताजी का खेड़ा से कासोरिया सड़क का पक्का निर्माण करवाया जाए।
* पेयजल संकट का समाधान: क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या से स्थायी निजात पाने के लिए ऐतिहासिक ‘माता जी की कुड़ी’ का पुनः जीर्णोद्धार (मरम्मत) किया जाए। और पानी की मोटर लगाकर पीने का पानी घरों तक पहुंचाया जाए।
* गांव का ढांचागत विकास: गली मोहल्लों में पक्की सड़कों व नालियों का निर्माण हो, मुख्य मार्ग के दोनों तरफ बड़े नालों का निर्माण किया जाए और रात के अंधेरे से मुक्ति के लिए पूरे क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की उचित व्यवस्था की जाए।
* सार्वजनिक व सामाजिक सुविधाएं: ग्रामीणों के सामूहिक कार्यक्रमों के लिए एक सामुदायिक भवन का निर्माण हो। इसके साथ ही श्मशान घाट के रास्ते को दुरुस्त करने, दाह संस्कार स्थल पर टीन शेड लगाने व लोगों के बैठने के लिए सराय का निर्माण करने की मांग की गई है।
* साफ सफाई व कचरा प्रबंधन: गांव में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित हो और कचरा निस्तारण के लिए एक स्थायी सिस्टम बनाया जाए।
आश्वासनों से टूटना, अब आर-पार की लड़ाई स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पानी, स्कूल और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी यहां के लोगों को दशकों से संघर्ष करना पड़ रहा है। इस बार गांव की इस महापंचायत में युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने एक स्वर में यह फैसला लिया है कि वे किसी भी खोखले आश्वासन के झांसे में नहीं आएंगे। जब तक धरातल पर काम शुरू नहीं होता, तब तक चुनाव का बहिष्कार जारी रहेगा। ग्रामीणों के इस कड़े फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों और स्थानीय राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
चांदमल कुमावत दिलखुश कुम्हार अंकुश रामधन देवराज कैलाश रामराज वैष्णव धनराज कीर ईश्वर गुर्जर जसवंत दरोगा राजू प्रजापत भागचंद वैष्णव सत्तू गुर्जर जमुनालाल वैष्णव सहित अन्य ग्रामीण मोजूद रहे।