घरेलू LPG के इस्तेमाल से लेकर क्षमता से अधिक बच्चों को स्कूल वैन में बैठाने तक शिकायतें | शिक्षा और परिवहन विभाग से जांच व कार्रवाई की मांग
जहाजपुर अलकेश पारीक
जहाजपुर। स्मार्ट हलचल|ग्रामीण क्षेत्र में संचालित कुछ निजी स्कूलों में नियमों की अनदेखी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्कूल संचालक सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना अपनी मनमानी कर रहे हैं। मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा होने के बावजूद संबंधित विभागों की प्रभावी जांच और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ निजी स्कूलों में घरेलू LPG सिलेंडरों से गैस आधारित उपकरणों का संचालन किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर स्कूल वैन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
स्कूल वाहनों के रंग और पहचान को लेकर भी सवाल
स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर लागू परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना जरूरी है। स्कूल वैन/बसों में निर्धारित क्षमता, फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक का वैध लाइसेंस, आवश्यक सुरक्षा उपकरण तथा निर्धारित पहचान/रंग संबंधी नियमों का पालन होना चाहिए। इसके बावजूद यदि क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है या वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं तो यह जांच का विषय है।
शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग करे संयुक्त जांच
स्थानीय लोगों की मांग है कि शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से निजी स्कूलों तथा उनके वाहनों की जांच करें। स्कूल भवन, अग्नि एवं सुरक्षा व्यवस्था, रसोई में LPG के इस्तेमाल, स्कूल वाहनों की फिटनेस और क्षमता सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाए।
बड़ा सवाल यह है कि यदि नियम बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, तो ग्रामीण क्षेत्र में उनका पालन कौन सुनिश्चित करेगा? अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जांच करते हैं या नहीं।