आकाश शर्मा
स्मार्ट हलचल|नगर परिषद निम्बाहेड़ा में हाल ही में हुए निर्विरोध निर्वाचन सभापति शिल्पा भूतड़ा और उप सभापति नीलेश मेहता के बाद, जहाँ एक ओर राजनीतिक स्थिरता के ढोल पीटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ परदे के पीछे चल रहे स्याह खेल की चर्चाएं अब आम जनता की जुबान पर आ चुकी हैं। पिछले अंक में हमने बेनकाब किया था कि कैसे ये ‘कलमवाले बाऊजी’ नारद रूपी बहरूपिया हर दरवाजे पर दस्तक देकर सत्ता के गलियारों में अपनी पैठ जमाने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। अब पर्दाफाश है उनके उस दोहरे चरित्र का, जिसे वे अपनी तथाकथित ‘पत्रकारिता’ के मुखौटे के पीछे बड़ी चालाकी से छिपाए रखते हैं!
मंचों पर बड़े-बड़े भाषण, पर हकीकत में सिर्फ खोखलापन !
निम्बाहेड़ा में प्रेस क्लब के उद्घाटन समारोह के दौरान चित्तौड़गढ़ के सांसद एवं मुख्य अतिथि श्रीचन्द कृपलानी ने एक बेहद मार्मिक और कड़वी सच्चाई बयां की थी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा था बड़े अखबार तो चार पन्नों में सिमट जाते हैं, लेकिन छोटे अखबार ही असली जन-समस्याओं को बेबाकी से उठाते हैं। चित्तौड़गढ़ जिले के पत्रकारों के लिए निम्बाहेड़ा में प्रेस क्लब का अपना कार्यालय बनना गर्व की बात है।उस वक्त सांसद महोदय का यह बयान छोटे और संघर्षरत स्थानीय पत्रकारों के मान-सम्मान और उनकी जनहितकारी भूमिका को समर्पित था। लेकिन विडंबना देखिए! जिस गरिमामयी मंच पर श्रीचन्द कृपलानी, सी.पी. सोनी और एस.एम. गोयल जैसी दिग्गज शख्सियतें आसीन थीं, उसी पवित्र पत्रकारिता की आड़ में कुछ ऐसे घिनौने पात्र भी सक्रिय हैं जो इस महान पेशे को सिर्फ निजी स्वार्थ, उगाही और ब्लैकमेलिंग का धंधा मानते हैं।
‘कलमवाले बाऊजी’… सच्ची पत्रकारिता या सत्ता की खुली दलाली?
आखिर कौन हैं ये ‘कलमवाले बाऊजी’? इनकी कारगुजारियों का सच अब किसी से छिपा नहीं है। इन तथाकथित बाऊजी का मुख्य पेशा जनहित की निष्पक्ष खबरें लिखना कतई नहीं है; बल्कि इनका असली काम है सत्ता के गलियारों और सीमेंट कंपनियों के दफ्तरों के चक्कर काटना, अधिकारियों व नेताओं की चाटुकारिता करना और अपनी जेबें भरना !नगर परिषद हो या कोई अन्य प्रशासनिक कार्यालय, इनका एकमात्र उद्देश्य अपने निजी काम निकलवाना और धौंस जमाना होता है। जब तक काम बनता है, तब तक चापलूसी और जैसे ही स्वार्थ आड़े आया, तुरंत तेवर बदल लेना इनकी पुरानी और घटिया फितरत रही है।
सांसद कृपलानी ने जिन छोटे अखबारों को जन-आवाज बताया था, ये बाऊजी उन्हीं छोटे पोर्टलों और पर्चों का इस्तेमाल केवल अपना निजी रसूख कायम करने और लोगों को डराने-धमकाने के लिए करते हैं।अब जबकि निम्बाहेड़ा नगर परिषद में शिल्पा भूतड़ा और नीलेश मेहता के नेतृत्व में नई टीम ने कार्यभार संभाला है, ये बाऊजी एक बार फिर अपने पुराने पैंतरों और चाटुकारिता के साथ सक्रिय हो गए हैं ताकि किसी तरह नई व्यवस्था में भी अपनी मलाईदार एंट्री पक्की कर सकें!
श्रीचन्द कृपलानी दें जवाब,कहाँ है प्रेस क्लब की जमीन?
अब वक्त आ गया है कि सीधे और कड़े सवाल पूछे जाएं। श्रीचन्द कृपलानी जी, निम्बाहेड़ा की जनता और प्रबुद्ध नागरिक आपसे यह जानने की पुरजोर मांग करते हैं कि निम्बाहेड़ा में प्रेस क्लब के उद्घाटन के नाम पर आवंटित सरकारी जमीन आज आखिरकार कहाँ गायब हो गई है? इस शहर के जमीन से जुड़े सच्चे और ईमानदार पत्रकारों का हक किसने और किसके इशारे पर मारा है? क्या आपके द्वारा सराहे गए छोटे अखबारों का हक यूँ ही इन दलालों की भेंट चढ़ता रहेगा?
‘कलमवाले बाऊजी’… अब आप पूरी तरह सावधान हो जाइए !
हमारे सच्चे और मेहनती पत्रकार साथियों के हक और सम्मान के लिए अब हमने भी कमर कस ली है। आने वाले दिनों में हम ऐसे-ऐसे खुलासे करेंगे, जिन्हें पढ़कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी और हमारे बाकी पत्रकार साथी भी चौंक उठेंगे।आप शायद यही सोच रहे होंगे कि एक कलमकार के खिलाफ यह सब क्यों? तो सुनिए— क्योंकि अब ‘अति’ की सारी सीमाएं पार हो चुकी हैं !
क्या सत्ता के नए हुक्मरान लेंगे कड़ा सबक ?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या निम्बाहेड़ा का नया राजनीतिक नेतृत्व और यहाँ की सजग जनता इन अवसरवादी और गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले तत्वों के इस गंदे खेल को नहीं समझ रही है? आज शहर के जागरूक युवाओं और राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा सिर्फ एक ही है क्या ‘विष्णु’ रूपी उप सभापति नीलेश मेहता या अन्य वरिष्ठ नेता इन ब्लैकमेलर चाटुकारों को संरक्षण देंगे, या फिर पूरी तरह से पारदर्शी और स्वच्छ राजनीति की मिसाल पेश करते हुए इन्हें हमेशा के लिए नेपथ्य में धकेल दिया जाएगा?
सच्चाई और निष्पक्षता की यह विस्फोटक रिपोर्ट यहीं समाप्त नहीं होती ।आने वाले दिनों में इनके काले कारनामों, जमीनों के खेल और अवैध वसूली की पूरी फेरिस्त (कुंडली) के साथ और बड़ा पर्दाफाश होना अभी बाकी है।
जुड़े रहिए, सच का यह बेखौफ कारवां अब रुकने वाला नहीं है… जारी रहेगा !