विशेष रिपोर्ट -आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ । स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा और खेरवाड़ा समेत राजस्थान के विभिन्न जिलों की करीब 50 बेटियों का नर्सिंग कोर्स और उनका उज्ज्वल भविष्य आज एक गंभीर संकट के साये में है । पंजाब नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (PNRC) की ANM नर्सिंग परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं,लेकिन इन बेटियों को अभी तक एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) नसीब नहीं हुआ है। कारण? भीलवाड़ा की ‘श्री बालाजी कोचिंग एंड कंसल्टेंसी’ द्वारा किया गया वह कथित फर्जीवाड़ा, जिसने मासूम छात्राओं की गाढ़ी कमाई और उनके सपनों को दांव पर लगा दिया है । गौरतलब है कि श्री बालाजी कोचिंग एंड कंसल्टेंसी का एक कार्यालय प्रतापनगर चित्तौड़गढ़ में है सूत्रों का कहना हैै कि इसमें सामान्य जिला चिकित्सालय कें कर्मचारीयों की मिली भगत से इंकार नही किया जा सकता । क्या जिला प्रशासन इस पर त्वरीत कार्यवाही कर के इस संस्थान पर तालें लगायेगा ।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कंसल्टेंसी ने पंजाब के एक नर्सिंग कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर प्रत्येक छात्रा से 45,000 से 60,000 रुपये तक वसूले। कुल मिलाकर यह ठगी 25 लाख रुपये से अधिक की बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जब परीक्षा का समय आया, तो कॉलेज का कहना है कि उनके पास फीस पहुंची ही नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर छात्राओं के दिए गए लाखों रुपये गए कहाँ ? क्या यह किसी बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा है, जिसमें शिक्षा माफिया और कुछ भ्रष्ट तंत्र के लोग मिले हुए हैं ? सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खेल में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता की भी सुगबुगाहट है, जिसकी परतें खुलना अभी बाकी है।
PNRC के नियम क्या कहते हैं
पंजाब नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (PNRC) और शिक्षा संस्थानों के स्थापित नियमों के मुताबिक यदि किसी अधिकृत या अनधिकृत कंसल्टेंसी/एजेंसी ने फीस ले ली है और कॉलेज ने दाखिला दिया है, तो इसका खमियाजा छात्राओं को नहीं भुगतना चाहिए । कॉलेज और कंसल्टेंसी के बीच का वित्तीय या आपसी विवाद आंतरिक मामला है। इस वजह से किसी भी छात्र या छात्रा को परीक्षा से वंचित करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता । ऐसे मामलों में संकटग्रस्त छात्राओं को प्रोविजनल (अस्थायी) अनुमति देकर परीक्षा में शामिल करने का प्रावधान और न्यायसंगत तरीका अपनाया जाना चाहिए ताकि उनका एक कीमती शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो।
राजस्थान में फल-फूल रहा ‘कंसल्टेंसी माफिया’ !
भीलवाड़ा की यह घटना केवल एक बानगी भर है। आज पूरे राजस्थान—जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ जैसे शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में ऐसी अनगिनत फर्जी कोचिंग और कंसल्टेंसी एजेंसियां सक्रिय हैं। ये भोले-भाले ग्रामीण परिवारों की बेटियों को कम फीस या आसान दाखिले का झांसा देकर अपने जाल में फंसाती हैं और बाद में उन्हें भगवान भरोसे छोड़ देती हैं। जब तक इन पर सख्त प्रशासनिक और कानूनी शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा इन ठगों की तिजोरी भरने का जरिया बनता रहेगा ।
पीड़ित छात्राओं की न्यायोचित मांगें
छात्राओं को तत्काल प्रोविजनल एडमिट कार्ड जारी किया जाए ताकि वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी परीक्षा दे सकें । फीस का जो भी आंतरिक विवाद है, उसे कॉलेज और कंसल्टेंसी आपस में सुलझाएं, इसमें छात्राओं के भविष्य को बलि का बकरा न बनाया जाए । इस पूरी ठगी के मुख्य आरोपियों और उनके संरक्षकों पर राजस्थान पुलिस तुरंत मामला दर्ज कर जेल भेजे ।
समय आ गया है कठोर कार्रवाई का
पीड़ित छात्राओं ने इस संदर्भ में PNRC को आधिकारिक शिकायत दे दी है और न्याय न मिलने पर न्यायालय की शरण लेने की पूरी तैयारी कर ली है। अब यह जिला प्रशासन, पुलिस और राज्य सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे इस ‘शिक्षा माफिया’ पर त्वरित और कठोर प्रहार करें । यदि समय रहते इन जालसाजों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो यह न केवल इन 50 बेटियों के साथ अन्याय होगा, बल्कि पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा रहेगा ।