कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में कथित कमीशनखोरी के आरोपों से गरमाई राजनीति, बोले कांग्रेस सरकार आते ही जनता की सुविधा के बजाय चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई पंचायतों को पूर्व व्यवस्था में स्थापित किया जाएगा
जहाजपुर अलकेश पारीक
जहाजपुर। स्मार्ट हलचल।पंचायत राज चुनाव की सरगर्मियों के बीच जहाजपुर की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। हनुमान नगर स्थित महेश वाटिका में आयोजित कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में पूर्व विधायक धीरज गुर्जर ने पंचायत समिति प्रधान के पति किशोर कुमार शर्मा को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कथित तौर पर कहा
किशोर कुमार नहीं, कमिशन कुमार हैं! उनके इस बयान ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

कथित कमीशनखोरी पर सीधा हमला
सम्मेलन में धीरज गुर्जर ने मौजूदा कार्यकाल में कथित कमीशनखोरी को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस कार्यकाल में इतनी कमीशनखोरी हुई है, जितनी कहीं भी नहीं हुई होगी। उनके इस बयान के जरिए पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और जवाबदेही का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पंचायतों के गठन पर भी बड़ा ऐलान
धीरज गुर्जर ने पंचायतों के गठन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पंचायतें जनता की सुविधा के बजाय चहेतों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार आते ही ऐसी पंचायतों को वापस पूर्व व्यवस्था में स्थापित कर दिया जाएगा।** इस बयान से पंचायतों के गठन और उनके पीछे के उद्देश्य को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है।
भ्रष्टाचार मुक्त जहाजपुर” बनेगा चुनावी मुद्दा
पूर्व विधायक धीरज गुर्जर ने साफ कहा कि कांग्रेस इस बार जहाजपुर में
भ्रष्टाचार मुक्त जहाजपुर” के मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ेगी। उनके बयान से संकेत मिला कि आगामी चुनाव में पंचायतों की व्यवस्था, कथित भ्रष्टाचार और आमजन की सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।
अब किशोर कुमार शर्मा के जवाब पर नजर
प्रधान के पति किशोर कुमार शर्मा को लेकर की गई तीखी टिप्पणी के बाद अब राजनीतिक गलियारों में उनकी प्रतिक्रिया को लेकर चर्चा है। धीरज गुर्जर के आरोपों पर किशोर कुमार शर्मा का पक्ष सामने आना बाकी है। उनका जवाब आने के बाद इस राजनीतिक विवाद की अगली तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
जहाजपुर की सियासत में अब बड़ा सवाल पंचायतों के गठन और कथित कमीशनखोरी के आरोप आगामी चुनाव में कितना बड़ा मुद्दा बनेंगे?