भीलवाड़ा, 9 अक्टूबर:
स्मार्ट हलचल|अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (महिला उत्पीड़न) के विद्वान न्यायाधीश ने करीब पांच साल पुराने एक दिल दहला देने वाले मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने बनेड़ा कस्बे में एक घर में घुसकर महिला और उसकी नौ वर्षीय पोती पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला करने के आरोपी आबिद हुसैन उर्फ बल्लू निवासी प्रतापनगर चित्तौड़गढ़ को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर कुल 35 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
क्या था मामला?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बनेड़ा के घाटी के बालाजी रोड निवासी नरेंद्र पुत्र रमेश सांसी ने 15 जुलाई 2021 को थाने में मामला दर्ज कराया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 जुलाई 2021 की रात को उनकी माँ गुरगुल और नौ वर्षीय बेटी तनीषा घर के कमरे में सो रही थीं। इसी दौरान अज्ञात बदमाश (आबिद हुसैन) ने घर में घुसकर धारदार हथियार से दोनों पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनेड़ा और फिर वहां से महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा रेफर किया गया था। जहां उपचार के दौरान गुरगुल की मृत्यु हो गई ।
मामले में राज्य सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक अदिति सेठिया ने मजबूत पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष 27 गवाह और 102 महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए गए। इन पुख्ता साक्ष्यों और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
विद्वान न्यायाधीश ने दोषी आबिद हुसैन को भारतीय दंड संहिता की कुल पांच धाराओं के तहत निम्नानुसार सजा और जुर्माना सुनाया है।जिसमें भादस की धारा 302 (हत्या): आजीवन कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड।
धारा 307 (हत्या का प्रयास): आजीवन कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड।
धारा 324 (धारदार हथियार से चोट पहुंचाना): तीन वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड।
धारा 201 (साक्ष्य मिटाना): तीन वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड।
धारा 406 (रात में घर में जबरन घुसना): पांच वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी द्वारा अर्थदंड की राशि जमा नहीं कराई जाती है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। करीब पांच साल पुराने इस जघन्य मामले में आए इस फैसले से पीड़िता के परिवार को न्याय मिला है।