नामांकन के अंतिम दिन भाजपा-कांग्रेस के नेताओं की आत्मीय मुलाकात बनी चर्चा का केंद्र, पूर्व विधायक बोले—‘हमारा नाता पुराना है’; वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
(अमर चन्द बैरवा)
दौसा। स्मार्ट हलचल|पंचायत राज चुनाव में जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर सियासी बिसात बिछ चुकी है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी रणनीतियों का दौर जारी है। इसी सियासी घमासान के बीच जिला परिषद सदस्य पद के नामांकन के अंतिम दिन दौसा में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने राजनीतिक अदावत के बीच पुराने रिश्तों की गर्माहट को सुर्खियों में ला दिया। कांग्रेस की पूर्व मंत्री ममता भूपेश और पूर्व विधायक नंदलाल बंसीवाल की आत्मीय मुलाकात ने चुनावी माहौल में नई चर्चा छेड़ दी। इस दौरान ममता भूपेश ने अपनी बेटी को बंसीवाल से आशीर्वाद दिलवाया। मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
चुनावी सरगर्मी के बीच दिखी आत्मीयता
शुक्रवार को जिला परिषद सदस्य पद के नामांकन के अंतिम दिन कलेक्ट्रेट परिसर में प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की भीड़ जुटी रही। इसी दौरान पूर्व विधायक नंदलाल बंसीवाल अपने समर्थक के नामांकन के सिलसिले में पहुंचे, जबकि पूर्व मंत्री ममता भूपेश अपनी बेटी का नामांकन दाखिल कराने आईं। नामांकन स्थल पर दोनों नेताओं का आमना-सामना हुआ तो राजनीतिक औपचारिकताओं के बीच पुराने संबंधों की झलक देखने को मिली।
ममता भूपेश ने अपनी बेटी को पूर्व विधायक नंदलाल बंसीवाल से आशीर्वाद लेने के लिए कहा। बंसीवाल ने भी स्नेहपूर्वक आशीर्वाद दिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने साथ में तस्वीरें खिंचवाईं। चुनावी माहौल में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े नेताओं के बीच इस तरह की आत्मीयता देखकर मौके पर मौजूद लोग भी चर्चा करने लगे।
‘हमारा नाता पुराना है’—बंसीवाल की टिप्पणी ने खींचा ध्यान
मीडिया ने जब इस मुलाकात को लेकर नंदलाल बंसीवाल से सवाल किया तो उन्होंने ममता भूपेश की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘हमारा नाता पुराना है।’ बंसीवाल की यह संक्षिप्त टिप्पणी मुलाकात का सबसे चर्चित हिस्सा बन गई। इसके बाद दोनों नेताओं की तस्वीरें और मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा। राजनीतिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
सियासी प्रतिद्वंद्विता अपनी जगह, रिश्ते अपनी जगह
इस मुलाकात का खास पहलू यह है कि नंदलाल बंसीवाल और ममता भूपेश पूर्व में चुनावी राजनीति में एक-दूसरे के सामने रह चुके हैं। इसके बावजूद नामांकन के दौरान दोनों के बीच जिस तरह की आत्मीयता दिखाई दी, उसने राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत संबंधों के बीच अंतर को उजागर किया।
एक ओर पंचायत राज चुनाव में जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुलाकात ने चुनावी माहौल में एक अलग ही तस्वीर पेश की। अब इस घटनाक्रम को कोई पुराने रिश्तों की मिसाल बता रहा है तो कोई इसे चुनावी सरगर्मी के बीच सामने आया दिलचस्प सियासी दृश्य मान रहा है। फिलहाल, ‘हमारा नाता पुराना है’ वाला बयान और दोनों नेताओं की आत्मीय मुलाकात दौसा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।