बेगूं के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह विधूड़ी के पाले में सरगर्मी ……
विशेष राजनीतिक रिपोर्ट #3 – आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़।स्मार्ट हलचल|पंचायतीराज चुनावों की उल्टी गिनती शुरू होते ही गुटबाजी और आपसी खींचतान की बेड़ियों को तोड़ते हुए जिला कांग्रेस आखिरकार एक जाजम पर एकजुट नजर आने लगी है। राजनीतिक गलियारों और पुख्ता सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, कांग्रेस के लिए सबसे सुखद और चौंकाने वाली खबर यह है कि ‘चित्तौड़गढ़ जिला प्रमुख का ताज किसके सिर सजेगा’ इसकी पूरी कमान और जिम्मेदारी जिले के सबसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के कंधों पर सौंप दी गई है। सभी क्षेत्रीय क्षत्रप अब अपने-अपने गढ़ को मजबूत करने और चुनावी व्यूह रचना रचने में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं । हालांकि,इस पूरी चुनावी बिसात का सबसे रोमांचक पहलू यह सवाल बना हुआ है कि पर्दे के पीछे से जीत का पासा फेंकने वाला असली ‘किंगमेकर’ कौन साबित होगा ? वहीं, अंदरखाने की रणनीतियों से यह भी लगभग साफ हो चुका है कि यदि कांग्रेस जिला परिषद पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब होती है, तो जिला प्रमुख की कुर्सी की चाबी कपासन विधानसभा क्षेत्र के खाते में जाना तय माना जा रहा है। गुटबाजी का इतिहास भुलाकर कांग्रेस का इस तरह एक मंच पर आना विरोधी खेमे के लिए किसी बड़े राजनीतिक भूचाल से कम नहीं है !
आंजना बन सकतें है ‘चीफ कमांडर, क्षत्रपों को शत-प्रतिशत जीत का कड़ा अल्टीमेटम !
चित्तौड़गढ़ जिला परिषद की कुर्सी पर कब्जा जमाने का सपना देख रही कांग्रेस के लिए गुटबाजी भले ही अब तक सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई थी,लेकिन चुनावी बिगुल बजते ही पार्टी के अंदरखाने से आई एक खबर ने सियासी पारे को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है ! आंतरिक खींचतान और धड़ेबंदी को दरकिनार कर चित्तौड़गढ़ कांग्रेस आखिरकार एक जाजम पर पूरी ताकत के साथ एकजुट नजर आ रही है । हालांकि रणनीतिक चुप्पी साधते हुए पार्टी ने अपने पत्ते तो पूरी तरह नहीं खोले हैं, लेकिन पुख्ता सूत्रों की मानें तो इस पूरी चुनावी बिसात के असली ‘सेनापति’ और मास्टरमाइंड की कमान जिले के सबसे कद्दावर दिग्गज एवं पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के हाथों में सौंपना लगभग तय हो चुका है। खबर यह भी है कि चुनाव प्रभारी भरोसी लाल जाटव की सफल मध्यस्थता और ‘एकजुटता मिशन’ के दम पर सभी क्षेत्रीय क्षत्रपों को अपने-अपने गढ़ से शत-प्रतिशत सीटें निकालकर देने का कड़ा ‘टारगेट’ थमा दिया गया है। आंजना के अनुभव, जाटव की व्यूह रचना और क्षत्रपों की साख दांव पर लगने से चित्तौड़गढ़ जिला परिषद का यह संग्राम अब बेहद दिलचस्प और आक्रामक मोड़ पर पहुंच गया है !
कपासन से सजेगा जिला प्रमुख का ताज, दिग्गजों की पत्नियों ने ठोकी दावेदारी !
जिला परिषद की सत्ता पर काबिज होने के लिए रणनीति बना रही कांग्रेस ने भले ही आधिकारिक तौर पर जिला प्रमुख के चेहरे पर से पर्दा न उठाया हो, लेकिन सियासी गलियारों में यह लगभग साफ हो चुका है कि यदि कांग्रेस बहुमत का आंकड़ा छूती है,तो ताज कपासन विधानसभा क्षेत्र के सिर ही सजेगा ! इस एक फैसले ने चित्तौड़गढ़ के राजनीतिक समीकरणों में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है । कपासन के वार्ड नंबर 10 से पूर्व डेयरी चेयरमैन और बड़ी सादड़ी से चुनाव लड़ चुके दिग्गजों के साथी बद्रीलाल जगपुरा की धर्मपत्नी रतनी देवी जाट का नाम सबसे आगे तैर रहा है। जगपुरा का राजनीतिक रसूख हाल ही में मंत्री गौतम दक के गढ़ बड़ी सादड़ी नगरपालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनाकर साबित हो चुका है। इसी कपासन की धरा से कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष व पूर्व प्रधान भैरूलाल चौधरी की पत्नी ने भी वार्ड नंबर 10 से ताल ठोककर मुकाबला कड़ा कर दिया है । हालांकि,सबसे रहस्यमयी मोड़ यह है कि कद्दावर नेता उदयलाल आंजना के परिवार से किसी ने दावेदारी नहीं जताई है और बड़ी सादड़ी के पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी ने अपने पत्ते छुपा रखे हैं ! वहीं, चित्तौड़गढ़ विधानसभा के वार्ड 17 से शंभूपुरा मंडल अध्यक्ष विक्रम जाट की पत्नी पिंटू जाट की मौजूदगी ने इस मुकाबले को बहुकोणीय और बेहद आक्रामक बना दिया है ।
कौन बनेगा असली ‘किंगमेकर’,राजेंद्र सिंह विधूड़ी के गणित पर टिकी निगाहें !
पिछले करीब दो दशकों से आंजना,जाड़ावत और सिसोदिया गुटों की अंतहीन खींचतान में उलझी चित्तौड़गढ़ कांग्रेस के लिए यह किसी ‘सियासी चमत्कार’ से कम नहीं है कि जिला परिषद चुनावों की रणभेरी बजते ही पार्टी तमाम गिले-शिकवे भुलाकर आखिरकार ‘एक जाजम’ पर बैठती नजर आ रही है ! हालांकि, इस बार असली रोमांच जिला प्रमुख के नाम पर नहीं, बल्कि उस ‘मास्टरमाइंड किंगमेकर’ के चेहरे को लेकर है,जो परदे के पीछे से पूरी चुनावी बिसात को पलटने की कूवत रखता है । समीकरणों के इस भारी-भरकम चक्रव्यूह में कपासन से बड़ी सादड़ी तक सक्रिय और उदयलाल आंजना के करीबी माने जाने वाले बद्रीलाल जगपुरा का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिन्हें जाड़ावत गुट से भी कोई बड़ी अदावत नहीं है और जिनके प्रबल विरोधी पूर्व विधायक प्रकाश जाट फिलहाल बैकफुट पर हैं। वहीं, जिला कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के खासमखास रहे भैरूलाल चौधरी की आंजना से बढ़ती दूरी उनकी राह में बड़ा कांटा बन सकती है। ऐसे में जब बात ‘किंगमेकर’ की आती है, तो सबसे बड़ा दांव बेगूं से दो बार विधायक रहे राजेंद्र सिंह विधूड़ी के पाले में जाता दिख रहा है ! बेगूं के 9 जिला परिषद वार्डों में यदि कांग्रेस आधा पासा भी पलट लेती है, तो विधूड़ी का सियासी कद उन्हें सीधा किंगमेकर बना देगा। हालांकि,आंजना के साथ उनका पुराना छत्तीस का आंकड़ा और जाड़ावत के साथ उनके सौहार्दपूर्ण रिश्ते इस खेल को और अधिक पेचीदा बनाते हैं । सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस जीतेगी या हारेगी,असली सवाल यह है कि विधूड़ी आखिरकार किस पाले में बैठकर इस पूरे महासंग्राम का पासा पलटेंगे !………. .भाजपा-कांग्रेस में महिला नेत्री के नाम पर कोई बड़ा चेहरा नही !
चित्तौड़गढ़ जिले की राजनीति में इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां कद्दावर महिला चेहरे के अकाल से जूझ रही हैं। जिले में ऐसा कोई बड़ा नाम नहीं है जिस पर पार्टियां आंख मूंदकर दांव लगा सकें। नतीजतन, इस बार जिला प्रमुख की कुर्सी संगठन और जनप्रतिनिधियों की कृपा पात्र महिला के हाथ लगना तय माना जा रहा है । पूर्व प्रधान वीणा दशोरा और तारावती धाकड़ का क्षेत्र नगर निकाय सीमा में आने व राजनीतिक खींचतान के कारण दोनों बैकफुट पर हैं, जबकि रेखा व्यास से पार्टी पहले ही दूरी बना चुकी है । कांग्रेस में भी कोई बड़ा चेहरा नहीं है। भाजपा से आई भगवती देवी झाला का नाम सर्वमान्य हो सकता था, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वे राजनीति से दूर हैं । ऐसे में दिवंगत निर्मला सिंह शक्तावत जैसी मजबूत और सर्वमान्य महिला नेत्री की कमी आज भी जिले की राजनीति को साफ खल रही है।