(महेन्द्र नागौरी)
युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी का संदेश—धर्म केवल सुनने नहीं, जीवन में उतारने का मार्ग
आज से नवपद आयंबिल ओलीजी आराधना का शुभारंभ
भीलवाड़ा | स्मार्ट हलचल|29 दिनों तक सामूहिक जाप, तप और आराधना से गूंजता शांतिभवन शनिवार को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। महाप्रभावक पुच्छिसुणं संपुट सामूहिक जाप की पूर्णाहुति के साथ श्रद्धालुओं ने धर्म-साधना के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। धर्मसभा में श्रमणसंघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने स्पष्ट संदेश दिया कि अनुष्ठान की पूर्णाहुति साधना का अंत नहीं, बल्कि आत्मकल्याण के नए पुरुषार्थ की शुरुआत है।
युवाचार्यश्री ने कहा कि तीर्थंकरों की वाणी को सुनना ही पर्याप्त नहीं, उसके मर्म को समझकर आचरण में उतारना ही सच्ची धर्म-आराधना है। श्रद्धा के साथ विवेक भी जरूरी है। व्यक्ति के विचार, वाणी और व्यवहार में धर्म दिखाई देना चाहिए। क्षणिक स्वार्थ के लिए हिंसा, छल और दूसरों को पीड़ा पहुंचाने से बचना ही आध्यात्मिक जीवन की सार्थकता है।
तप से शुरू, तप के समर्पण के साथ पूर्णाहुति
पुच्छिसुणं जाप की शुरुआत मासखमण तप की पचकावनी से हुई थी। 29 दिनों तक श्रावक-श्राविकाओं ने नियमित जाप में भाग लेकर साधना की निरंतरता का परिचय दिया। युवाचार्यश्री ने सभी आराधकों के समर्पण की सराहना की।
धर्मसभा से पहले युवाचार्यश्री के सान्निध्य में हितेंद्र ऋषिजी, यशोदीप्ति मधुकंवरजी, महासती सुचेताजी और पीयूषदर्शनाजी सहित संत-साध्वीवृंद ने सामूहिक जाप कराया। विभिन्न श्रीसंघों के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भलावत परिवार की ओर से सहभागी श्रद्धालुओं को प्रभावना वितरित की गई।
आज से नवपद आयंबिल ओलीजी की आराधना
जाप की पूर्णाहुति के बाद अब शांतिभवन में रविवार से नवपद आयंबिल ओलीजी आराधना का आध्यात्मिक क्रम शुरू होगा। श्रीसंघ के मंत्री नवरत्नमल भलावत ने बताया कि युवाचार्यश्री एवं साध्वीवृंद के सान्निध्य में होने वाली इस आराधना में श्रद्धालु तप, संयम और भक्ति के साथ सहभागी बनेंगे।
शांतिभवन में जाप की पूर्णाहुति के साथ आस्था का एक अध्याय पूरा हुआ, तो नवपद ओलीजी के रूप में तप और आत्मशुद्धि की नई यात्रा शुरू होने जा रही है।