आस्था की नगरी मंडफिया में लूट और संरक्षण का खेल……….
विशेष लेख-आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ l स्मार्ट हलचल|मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलियाजी की नगरी मंडफिया आज अपनी पावन छवि के लिए नहीं, बल्कि बेशकीमती जमीनों, प्राकृतिक नालों और जलस्रोतों पर चल रहे सुनियोजित कब्जे और भ्रष्टाचार के चलते सुर्खियों में है। सांवलियाजी की इस पावन धरा पर सत्ता चाहे कांग्रेस की रही हो या भाजपा की, दोनों ही दलों के जनप्रतिनिधियों और रसूखदारों ने मिलकर इस क्षेत्र को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह विडंबना ही है कि भगवान श्री सांवलियाजी के नाम पर आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का उपयोग राजनीतिक रोटियां सेकने और अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है । सांवलियाजी की नगरी में अब वों हर चेहरा बेनकाब होगा जिसनें शासकीय एवं मंदिर मण्डल अध्यक्ष पदों पर रहतें हुए अपनों को अनुचित लाभ पहुचाया है जल्द ही हमारी टीम बडा खुलासा करेंगी बने रहें हमारें साथ l
जलस्रोतों से खिलवाड़ और प्राकृतिक नालों का सौदा !
मंडफिया में नवोदय स्कूल के पीछे स्थित ऐतिहासिक पुराने तालाब का हाल इस व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। कभी दो-दो बरसात में लबालब भरने वाले इस तालाब को 2005 में ‘गहरा करने’ के नाम पर ऐसा खोखला किया गया कि इसका प्राकृतिक वजूद ही संकट में पड़ गया। इसके बाद एणिकट को बड़ा कर तालाब का भरना पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिससे क्षेत्र में जल संकट गहरा गया । इससे भी गंभीर मामला इसी नाले पर फर्जी पट्टे तैयार कर बंदरबांट करने का है। एसीबी तक शिकायत पहुंचने के बावजूद राजनीतिक रसूख और मिलीभगत के कारण मुकदमों को दबाए रखा गया । इतना ही नहीं, एक प्राइवेट कॉलोनी को फायदा पहुंचाने के लिए बरसाती नाले पर पुलिया बना दी गई, और जब ग्राम पंचायत ने इसका विरोध किया, तो कांग्रेसराज में पूर्व मंत्री सुरेंद्रसिंह जाडावत से सांठगांठ कर आवाज उठाने वाले सचिव का ही ट्रांसफर करवा दिया गया । श्री सांवलियाजी मंदिर के गत कांग्रेस बोर्ड ने तो हद ही पार कर दी; लगभग 9 करोड़ रुपये खर्च करके बरसाती नाले का रास्ता ही बदल दिया गया ताकि कुछ चुनिंदा लोगों की जमीनों को बचाया जा सके । प्राकृतिक नालों से यह छेड़छाड़ न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और ‘राज्य सरकार बनाम अब्दुल रहमान’ मामले के स्पष्ट आदेशों की भी सरेआम धज्जियां उड़ाती है ।
सरकारी छुट्टियों और प्रशासनिक संरक्षण में अतिक्रमण का खेल !
हालिया हालात यह हैं कि सरकारी अवकाश और दशहरा की छुट्टियों का फायदा उठाकर गौचर भूमि और मंदिर मंडल की बेशकीमती जमीनों पर अवैध कब्जे, वायर फेंसिंग और प्लॉट काटने का खेल तेजी से चल रहा है। जब मंदिर मंडल और प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जे हो रहे हैं, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस सांठगांठ में साझीदार हैं ? भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों ही दलों के कार्यकाल में रसूखदारों को बचाने और सरकारी संपत्तियों को लुटवाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। नाले के बहाव क्षेत्र में अवैध निर्माण और बस स्टैंड के पास अतिक्रमण के चलते आम जनता और यात्रियों के लिए जगह सिकुड़ती जा रही है, लेकिन सियासतदानों को जनता की असुविधा से ज्यादा अपने करीबियों की तिजोरियां भरने की चिंता है।
जनहित की मांग
मंडफिया की जनता अब इस अंधी लूट और राजनीतिक मिलीभगत से त्रस्त हो चुकी है। यह समय केवल बयानबाजी का नहीं, बल्कि ठोस और पारदर्शी कार्रवाई का है। हमारी पुरजोर मांग है कि तालाब के सौंदर्यीकरण और गहराने के नाम पर हुए खेल से लेकर बरसाती नाले का रास्ता बदलने तक के मामलों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। मंदिर मंडल और गौचर भूमि पर हुए तमाम अवैध निर्माणों व कब्जों को तुरंत हटाया जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो । प्राकृतिक नालों से छेड़छाड़ करने वाले और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों तथा राजनीतिक चेहरों बेनकाब किया जाए । सांवलियाजी की नगरी भगवान की शरणस्थली है, इसे भ्रष्टाचार और लूट का अड्डा बनने से रोकने के लिए अब जनता को खुद आगे आना होगा ।