• मेहनत और पूंजी लगने के बाद भी किसानों के हाथ खाली

मानसून की बेरुखी से खरीफ फसल उत्पादन हुआ प्रभावित, सोयाबीन में तो लागत निकालना भी मुश्किल

चित्तौड़गढ़। स्मार्ट हलचल|इस वर्ष मानसून की बेरुखी और कमजोर बारिश का असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर देखने को मिला है। विशेष रूप से सोयाबीन की फसल ने किसानों को गहरी निराशा में डाल दिया हैं। खाद-बीज और मेहनत मजदूरी पर खर्च होने के बावजूद किसानों को इतनी आमदनी भी नहीं हो पाई कि उनकी लागत निकल सके, ऐसे में किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और आगामी खेती को लेकर चिंतित हैं। इस बार क्षेत्र में कमजोर मानसून होने से बारिश की कमी के चलते किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। फसल का अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सोयाबीन उत्पादन करने वाले किसानों के सामने स्थिति ऐसी बन गई है कि फसल बेचने के बाद भी खेती में लगाया गया खर्च प्राप्त करना मुश्किल हो रहा है।
भादसोड़ा निवासी किसान राधे सुथार का कहना है कि खेती में हर साल खर्च बढ़ता जा रहा है। खाद, बीज और मजदूरी की बढ़ती लागत के बीच किसान पहले ही आर्थिक दबाव में हैं। इस बार कमजोर मानसून ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी। सोयाबीन की फसल से अच्छी कमाई की उम्मीद तो दूर, अब लागत की भरपाई करना भी चुनौती बन गया है। सीजन की मेहनत के बाद हाथ खाली रहने से किसानों में निराशा और चिंता का माहौल है। किसानों की पीड़ा यही है कि जिस खेती से परिवार की आजीविका चलती है, उसी खेती में इस बार लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। अब किसान सरकार और प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द राहत प्रदान की जाएगी।