उदयपुर के राजपैथोकोन-2026 में डॉ. अरुणा पंचारिया की दो चिकित्सा पुस्तकों का विमोचन, भीलवाड़ा का बढ़ाया गौरव

एमबीबीएस और एमडी पैथोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए लिखी गईं पुस्तकें, सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक निदान से जोड़ने पर जोर

उदयपुर, 24 अक्टूबर। स्मार्ट हलचल|चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान का गौरव बढ़ाते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज, भीलवाड़ा में प्रोफेसर डॉ. अरुणा पंचारिया द्वारा लिखित दो चिकित्सा पुस्तकों का विमोचन शनिवार को उदयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय पैथोलॉजी सम्मेलन राजपैथोकोन-2026 के मंच से किया गया। राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रख्यात शिक्षाविदों की मौजूदगी में पुस्तकों का विमोचन हुआ। इस उपलब्धि से भीलवाड़ा को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान मिली है।

पुस्तक विमोचन समारोह में आरएनटी मेडीकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ राहुल जैन, पैथॉलाजी एचओडी और सम्मेलन की चेयरपर्सन
डॉ नमिता गोयल आदि अतिथियों ने पुस्तकों का विमोचन किया। इस अवसर पर डॉ. नरेंद्र मोगरा, पूर्व डीन, गीतांजलि मेडिकल कॉलेज सहित चिकित्सा शिक्षा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं।

अतिथियों ने दोनों पुस्तकों के प्रकाशन पर लेखिका डॉ. अरुणा पंचारिया को बधाई देते हुए इसे चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए उपयोगी शैक्षणिक पहल बताया। डॉ. पंचारिया ने अतिथियों को पुस्तकों की विषयवस्तु, उनकी उपयोगिता और चिकित्सा शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अवगत कराया।

डॉ. पंचारिया की पहली पुस्तक ‘Pulse of Pathology: Bench-to-Bedside Approach’ एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई है। इसमें पैथोलॉजी के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्लिनिकल केस और रोगों की समझ से जोड़ने का प्रयास किया गया है। वहीं, दूसरी पुस्तक ‘Mastering MD Pathology: Decoding the Clinical Case Diagnosis’ एमडी पैथोलॉजी के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए लिखी गई है। यह पुस्तक क्लिनिकल केस के माध्यम से रोगों के निदान की प्रक्रिया को क्रमबद्ध एवं व्यावहारिक तरीके से समझने में सहायक है।

दोनों पुस्तकों की खासियत यह है कि इनमें चिकित्सा शिक्षा को केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक क्लिनिकल परिस्थितियों, केस-आधारित अध्ययन और व्यावहारिक निदान से जोड़ने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के पाठ्यक्रम तथा दक्षता-आधारित चिकित्सा शिक्षा (CBME) की भावना के अनुरूप यह दृष्टिकोण विद्यार्थियों में तार्किक सोच, क्लिनिकल सहसंबंध और निदान संबंधी कौशल विकसित करने में उपयोगी हो सकता है।

चिकित्सा शिक्षण, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्टिंग तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के प्रशिक्षण में योगदान दे रहीं डॉ. अरुणा पंचारिया को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘मेवाड़ गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, उन्हें ‘आयरन लेडी ऑफ राजस्थान’ सम्मान भी प्राप्त हुआ है। वे अपने मेडिकल एजुकेशन यूट्यूब चैनल के माध्यम से जटिल पैथोलॉजी विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचा रही हैं।

उनकी पुस्तकों को प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों से भी सराहना मिली है। एम्स सहित प्रमुख संस्थानों के निदेशकों से प्राप्त प्रशंसा-पत्र उनके शैक्षणिक प्रयासों और विद्यार्थी-केंद्रित चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे कार्यों को रेखांकित करते हैं।

RAJPATHCON जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा सम्मेलन के मंच से दोनों पुस्तकों का विमोचन डॉ. पंचारिया की अकादमिक उपलब्धि के साथ ही राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों को भी सामने लाता है। उनकी यह पहल चिकित्सा विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ और बेहतर निदान कौशल विकसित करने में मार्गदर्शन प्रदान करेगी।