खजूरी की 14 पंचायतों में महिला सरपंचों के हाथ में कमान, अब चलेगी महिलाओं की सरकार या पतियों का रहेगा दखल?
27 ग्राम पंचायतों में से 14 में महिला सरपंच निर्वाचित; महिला सशक्तीकरण और पंचायती राज व्यवस्था की मंशा पर रहेंगी सबकी नजरें
अलकेश पारीक | स्मार्ट हलचल
खजूरी। पंचायती राज चुनाव के बाद खजूरी पंचायत समिति क्षेत्र में महिला नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। क्षेत्र की 27 ग्राम पंचायतों में से 14 पंचायतों में महिला सरपंच निर्वाचित हुई हैं। अब देखने वाली बात होगी कि ये महिला सरपंच गांवों के विकास की कमान स्वयं संभालती हैं या पंचायतों के कामकाज में उनके पतियों का दखल प्रभावी रहता है। महिला आरक्षण के उद्देश्य और जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व की वास्तविक भूमिका को लेकर आने वाले समय में इन पंचायतों का कामकाज महत्वपूर्ण रहेगा।
खजूरी पंचायत समिति क्षेत्र की आमल्दा, बांगुदार, भागूनगर, बेई, भरणीकलां, फतेहपुर गड़बोदिया, हरसालों का खेड़ा, काबरी, पीपलूंद, श्रृंगारचवरी, खजूरी, मनोहरपुरा, नाथूण और उलेला ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच निर्वाचित हुई हैं। इन पंचायतों में अब महिला नेतृत्व की भूमिका और कामकाज पर ग्रामीणों की नजर रहेगी।
महिला आरक्षण का उद्देश्य नेतृत्व का अवसर देना
पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को आरक्षण देने का उद्देश्य उन्हें राजनीतिक भागीदारी के साथ निर्णय लेने का अधिकार देना और ग्रामीण विकास में उनकी भूमिका मजबूत करना है। सरपंच का पद केवल नाम या पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पंचायत के विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं, ग्राम सभा की बैठकों और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शामिल है।
महिला सरपंचों के निर्वाचित होने के बाद यह अपेक्षा रहती है कि वे पंचायत की जिम्मेदारियों को स्वयं संभालें और गांव के विकास से जुड़े फैसलों में सक्रिय भूमिका निभाएं। ऐसे में खजूरी की इन पंचायतों में महिला नेतृत्व की वास्तविक स्थिति आने वाले दिनों में उनके कामकाज से सामने आएगी।
क्या खुद संभालेंगी पंचायत की जिम्मेदारी?
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज में उनके पति या परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में खजूरी की इन 14 पंचायतों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महिला सरपंच स्वयं ग्राम सभा की बैठकों का नेतृत्व करती हैं या नहीं, विकास कार्यों की निगरानी करती हैं या नहीं और ग्रामीणों की समस्याओं पर अपने स्तर पर निर्णय लेती हैं या नहीं।
कानून के तहत निर्वाचित सरपंच ही अपने पद की जिम्मेदारियों के लिए उत्तरदायी होती हैं। उनके पति या रिश्तेदार उनकी जगह आधिकारिक अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसलिए महिला सरपंचों की वास्तविक भागीदारी पंचायतों के कामकाज में महत्वपूर्ण रहेगी।
14 पंचायतों में महिला नेतृत्व की परीक्षा
आमल्दा से उलेला तक इन 14 ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों के सामने गांवों के विकास और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी होगी। सड़क, नाली, पेयजल, सफाई और सरकारी योजनाओं जैसे मुद्दों पर उनके फैसले यह दिखाएंगे कि पंचायतों में महिला नेतृत्व किस तरह काम कर रहा है।
ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान, ग्राम सभा में सक्रिय भागीदारी और विकास कार्यों की निगरानी महिला सरपंचों की कार्यशैली को सामने लाएगी। पंचायतों में महिला नेतृत्व की सफलता केवल निर्वाचित होने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके स्वतंत्र निर्णय और जिम्मेदारी निभाने से भी जुड़ी होगी।
अब कामकाज से सामने आएगी महिला नेतृत्व की तस्वीर
खजूरी पंचायत समिति की इन 14 पंचायतों में महिला सरपंच अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए खुद नेतृत्व करेंगी या पंचायत के कामकाज में पतियों का दखल चर्चा का विषय बना रहेगा, यह आने वाला समय बताएगा।
महिला सरपंचों के कामकाज, निर्णयों और विकास कार्यों से यह स्पष्ट होगा कि पंचायतों में महिला नेतृत्व कितना प्रभावी रहता है। अब सबकी नजरें इन पंचायतों पर रहेंगी कि महिला सरपंच गांवों की सरकार को किस तरह संचालित करती हैं और ग्रामीणों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती हैं।