(हरिप्रसाद शर्मा)
अजमेर/ स्मार्ट हलचल|जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयान पर अजमेर दरगाह के उत्तराधिकारी और ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के अध्यक्ष दीवान सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को पड़ोसी देश के प्रति अपनी सोच पर पुनर्विचार करने की सलाह दी। चिश्ती ने कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देकर आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक, आतंकवाद के कारण कई निर्दोष लोगों की जान गई और जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपनी शहादत दी। ऐसे में पाकिस्तान को मददगार बताना बलिदान देने वालों के सम्मान के खिलाफ है।
पाकिस्तान को बताया कश्मीर का गुनहगार
दीवान सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि पाकिस्तान किसी नेता के लिए भले ही मददगार हो, लेकिन कश्मीर के लोगों के लिए वह गुनहगार ही रहेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 के बाद से जम्मू-कश्मीर में हुई आतंकवादी घटनाओं ने न केवल लोगों की जान ली, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू- कश्मीर की वर्तमान सरकार और वहां के मुख्यमंत्री लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपने पद पर हैं, न कि पाकिस्तान की वजह से। चिश्ती ने नेताओं से अपील की कि वे संवेदनशील मुद्दों पर बयान देते समय जिम्मेदारी बरतें और अपने शब्दों के प्रभाव को समझें ।
पीओके के लोगों के भारत से जुड़ने का किया दावा
चिश्ती ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां के निवासी भी भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर के भविष्य पर चर्चा करते समय आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फारूक अब्दुल्ला को सोच पर पुनर्विचार की सलाह
दीवान चिश्ती ने पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को अपने बयान और पाकिस्तान के प्रति अपनी सोच पर पुनर्विचार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के कारण अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के दुख और सुरक्षा बलों के जवानों के बलिदान को ध्यान में रखकर ही ऐसे संवेदनशील मामलों पर बयान दिए जाने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से प्रभावित लोगों की पीड़ा को समझना और उनके बलिदान का सम्मान करना जरूरी है।