भीलवाड़ा में करीब 10 हरे-भरे नीम के पेड़ काटने का मामला, पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और एसपी से की सख्त कार्रवाई की मांग
भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल|शहर में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक ओर जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विशालकाय पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने से पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी है। तेज सिंह सर्किल से हरनी महादेव मार्ग पर नीम के करीब 10 विशालकाय पेड़ों को काट दिए जाने पर पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और पुलिस अधीक्षक से पेड़ काटने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
जाजू ने कहा कि पेड़ केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि जीवन के आधार हैं। विशेष रूप से नीम जैसे उपयोगी वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, वायु को स्वच्छ रखने और राहगीरों को छाया उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में वर्षों में तैयार होने वाले विशालकाय पेड़ों को काट देना पर्यावरण के लिए गंभीर क्षति है। शहर में पहले ही बढ़ते यातायात, निर्माण गतिविधियों और प्रदूषण के कारण हरित क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में पेड़ों की कटाई चिंता का विषय है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तेज सिंह सर्किल-हरनी महादेव मार्ग पर काटे गए पेड़ों के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह पता लगाया जाए कि पेड़ों को किसने, किन परिस्थितियों में और किसकी अनुमति से काटा। यदि बिना वैधानिक अनुमति के पेड़ों की कटाई की गई है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में शहर के किसी भी क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों को मनमाने तरीके से काटने की पुनरावृत्ति न हो।
जाजू ने जिला प्रशासन और नगर निगम से शहर में पेड़ों की सुरक्षा के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल अभियानों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर पेड़ों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। सार्वजनिक मार्गों और आवासीय क्षेत्रों में लगे वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर हरियाली को नुकसान पहुंचाना भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। पेड़ों की कटाई से न केवल प्राकृतिक छाया समाप्त होती है, बल्कि पक्षियों के आश्रय और स्थानीय जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में प्रशासन को गंभीरता दिखाते हुए दोषियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं तथा पेड़ों की कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। शहरवासियों की अपेक्षा है कि मामले की जांच कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रशासन अपनी गंभीरता प्रदर्शित करेगा।