– सरकारी अफसर पर ही बड़ा आरोप-किसानों को डराने के लिए मंडी परिसर में लिखवा दिया ‘पुलिस चौकी’
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/निवाई। स्मार्ट हलचल|राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सुशासन व जीरो टॉलरेंस नीति के दावों के बीच टोंक जिले की निवाई कृषि उपज मंडी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मंडी में पदस्थ मंडी सचिव ने बिना किसी आधिकारिक स्वीकृति के मंडी परिसर में “फर्जी पुलिस चौकी” ही बनवा दी।
किसान महापंचायत राजस्थान के युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि निवाई कृषि उपज मंडी परिसर में बने पुराने जनरेटर रूम पर मण्डी सचिव व समिति द्वारा पेंट करवा कर नियम विरूद्ध “पुलिस चौकी” लिखवा दिया गया, जबकि पुलिस विभाग से मिली जानकारी व आरटीआई से प्राप्त सूचना के मुताबिक निवाई कृषि उपज मंडी में किसी भी प्रकार की पुलिस चौकी स्वीकृत नहीं है।
*मण्डी सचिव के भांजे के नाम टेंडर-लाखों का भुगतान*
मामले को और गंभीर बनाता है यह आरोप कि मंडी सचिव ने अपने ही भांजे के नाम से टेंडर स्वीकृत करवाया और इस तथाकथित पुलिस चौकी के नाम पर करीब एक लाख रुपये का भुगतान भी उठा लिया गया।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
*किसानों को डराने का हथकंडा?*
किसान संगठनों का आरोप है कि मंडी में जब किसान अपनी फसल बेचने आते हैं और दाम को लेकर व्यापारियों से विवाद होता है, तब इस कथित पुलिस चौकी का इस्तेमाल किसानों को डराने-धमकाने के लिए किया जाता है। किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि मंडी सचिव व्यापारियों से मिलीभगत कर कृषि जिंसों के कम दाम लगवाते हैं, और जब किसान इसका विरोध करते हैं तो उन्हें दबाने के लिए फर्जी पुलिस चौकी का माहौल बनाया जाता है।
*शिकायतें हुईं-कार्रवाई अब तक नहीं*
किसान संगठनों के मुताबिक इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक कई बार की जा चुकी है। इसके बावजूद न तो फर्जी पुलिस चौकी हटाई गई और न ही आरोपित मंडी सचिव के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई।
*आंदोलन की चेतावनी*
किसान संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही
आरोपित मंडी सचिव को निलंबित नहीं किया गया
और फर्जी पुलिस चौकी को बंद नहीं किया गया तो किसान बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
*प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल*
पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है— क्या कोई सरकारी अधिकारी अपने स्तर पर पुलिस चौकी घोषित कर सकता है?, सरकारी राशि का भुगतान किस आधार पर हुआ?
और शिकायतों के बावजूद प्रशासन अब तक मौन क्यों है?
