पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, मानसिक सुकून और स्वस्थ जीवनशैली का भी आधार : प्रो. अनुकृति शर्मा

‘द बैलेंस्ड लाइफ’ विषय पर दिया व्याख्यान, शारीरिक सक्रियता, मानसिक शांति और पर्यटन के अंतर्संबंधों को समझाया; लाइव डेमोंस्ट्रेशन से बताई स्वस्थ जीवन की राह

कोटा। स्मार्ट हलचल|जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए केवल शारीरिक सक्रियता पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और तनाव प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। योग, ध्यान और खेल जहां शरीर को स्वस्थ रखते हैं, वहीं पर्यटन व्यक्ति को रोजमर्रा की एकरसता से बाहर निकालकर प्रकृति, संस्कृति और नए अनुभवों से जोड़ता है। इसी विचार को केंद्र में रखते हुए कोटा विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं पर्यटन विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा ने उत्तराखंड के नैनीताल में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में पर्यटन को संतुलित जीवनशैली और मानव कल्याण से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने संगोष्ठी में कोटा विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए अकादमिक सहभागिता की।

कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से खेल, योग, ध्यान, स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण, खेल विज्ञान, प्रबंधन, वाणिज्य और वेलनेस जैसे विषयों को एक साझा अकादमिक मंच पर लाने के उद्देश्य से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण एवं शोध संस्थानों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें सऊदी अरब की किंग फहद यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड मिनरल्स, इंडोनेशिया की योग्याकर्ता स्टेट यूनिवर्सिटी, मिस्र की मंसूरा यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय और लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान ग्वालियर सहित अनेक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रो. अनुकृति शर्मा ने ‘द बैलेंस्ड लाइफ : इंटीग्रेटिंग मूवमेंट, माइंड एंड वेल-बीइंग’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियां कम होने और मानसिक दबाव बढ़ने से व्यक्ति का जीवन असंतुलित होता जा रहा है। ऐसे में शरीर, मन और व्यवहार के बीच सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है। तनाव का एक बड़ा कारण अनावश्यक चिंताओं और नकारात्मक विचारों को लगातार मन में बनाए रखना है। व्यक्ति को ‘लेट गो’ अर्थात ऐसी बातों और परिस्थितियों को छोड़ना सीखना चाहिए, जिन्हें बदलना उसके नियंत्रण में नहीं है।

उन्होंने पर्यटन के स्वास्थ्य संबंधी पक्ष को स्पष्ट करते हुए कहा कि यात्रा केवल नए स्थान देखने या मनोरंजन का माध्यम नहीं है। यह व्यक्ति को प्रकृति के करीब लाकर मानसिक थकान दूर करने और दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में मदद करती है। स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली से परिचय व्यक्ति को नए अनुभव देता है। प्रकृति के बीच पैदल भ्रमण और शांत वातावरण में समय बिताना मानसिक सुकून तथा सकारात्मकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। इस दृष्टि से पर्यटन को शारीरिक सक्रियता, मानसिक विश्राम और समग्र स्वास्थ्य से जोड़कर देखने की आवश्यकता है।

प्रो. शर्मा ने अपने व्याख्यान को व्यावहारिक स्वरूप देते हुए स्वस्थ जीवनशैली और मानव कल्याण से संबंधित गतिविधियों का लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से उन्होंने प्रतिभागियों को शारीरिक सक्रियता, मानसिक सजगता और दैनिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक तरीके समझाए। उन्होंने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए हमेशा बड़े बदलाव जरूरी नहीं होते, बल्कि नियमित दिनचर्या में छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

संगोष्ठी के दूसरे दिन ‘फ्रॉम पॉलिसी टू प्रैक्टिस : एडवांसिंग स्पोर्ट्स, योगा एंड मेडिटेशन फॉर ह्यूमन वेल-बीइंग इन उत्तराखंड-लेसंस फॉर इंडिया एंड द वर्ल्ड’ विषय पर पैनल डिस्कशन आयोजित हुआ। इसमें डॉ. सरस्वती खेतवाल, प्रो. जतिन सोनी, प्रो. राजीव चौधरी और प्रो. अनुकृति शर्मा ने विचार साझा किए। चर्चा में खेल, योग और ध्यान को नीतिगत स्तर से व्यावहारिक जीवन तक पहुंचाने तथा मानव कल्याण में इनकी भूमिका पर मंथन किया गया।
संगोष्ठी का उद्घाटन कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने किया। आयोजन ने विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को शोध प्रस्तुत करने, अकादमिक संवाद स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर प्रदान किया।
संगोष्ठी में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण और शोध संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें सऊदी अरब की किंग फहद यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड मिनरल्स, इंडोनेशिया की योग्याकर्ता स्टेट यूनिवर्सिटी, मिस्र की मंसूरा यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय तथा ग्वालियर स्थित लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (एलएनआईपीई) सहित अन्य प्रमुख संस्थानों के शिक्षाविद एवं शोधकर्ता शामिल रहे। संगोष्ठी में खेल, योग, ध्यान, खेल विज्ञान, स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण, प्रबंधन और वेलनेस के विभिन्न आयामों पर अकादमिक विमर्श हुआ। साथ ही शोध प्रस्तुतियों, विशेषज्ञों के संवाद और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग की संभावनाओं को भी मंच मिला।