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झुनझुनों का पिटारा: राजस्थान के बजट में आंकड़ों की बाजीगरी, जनता को मिला ‘शून्य’

द बजट एक्सपोज

राजस्थान बजट 2026-27 विशेष रिपोर्ट

झुनझुनों का पिटारा: राजस्थान के बजट में आंकड़ों की बाजीगरी, जनता को मिला ‘शून्य’

भजनलाल सरकार के तीसरे पूर्ण बजट में विकास के नाम पर केवल लोकलुभावन वादों की चाशनी घोली गई है। धरातल पर न तो निवेश है और न ही रोजगार।

जयपुर। राजस्थान के बजट 2026-27 के पेश होते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है। वित्त मंत्री ने ‘विकसित राजस्थान’ का जो खाका पेश किया है, वह हकीकत से कोसों दूर एक काल्पनिक दस्तावेज नजर आता है। बजट में सबसे बड़ी चिंता राजस्थान पर बढ़ता अभूतपूर्व कर्ज का बोझ है, जो अब हर राजस्थानी के सिर पर एक भारी बोझ बन गया है।

कर्ज का जंजाल: विकास के नाम पर गिरवी भविष्य

सरकारी दावा: सरकार का दावा है कि वित्तीय प्रबंधन सुदृढ़ है और बजट घाटा कम हुआ है।

धरातल की हकीकत: हकीकत यह है कि राजस्थान पर कुल कर्ज 7.5 लाख करोड़ पार कर चुका है। प्रति व्यक्ति कर्ज में 25% की वृद्धि हुई है। विकास कार्य केवल कागजों पर हैं, जबकि ब्याज भुगतान बजट का बड़ा हिस्सा खा रहा है।

आंकड़ा: कर्ज में 18% की रिकॉर्ड वृद्धि

युवा शक्ति से विश्वासघात: ‘रोजगार उत्सव’ के पीछे बेरोजगारी का अंधेरा

सरकारी दावा: 5 लाख नई सरकारी नौकरियों का वादा और निजी क्षेत्र में निवेश का ढिंढोरा।

धरातल की हकीकत: पेपर लीक की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है। ‘सीईटी’ के नाम पर युवाओं को अटकाया जा रहा है। संविदा कर्मियों के नियमितीकरण का मुद्दा ठंडे बस्ते में है।

आंकड़ा: बेरोजगारी दर 28% (राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक)

अन्नदाता की अनदेखी: केवल नारों तक सीमित किसान कल्याण

सरकारी दावा: कृषि बजट में भारी बढ़ोतरी और मुफ्त बिजली का दावा।

धरातल की हकीकत: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करना तो दूर, एमएसपी पर खरीद का बुनियादी ढांचा भी ध्वस्त है। फसल बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है।

आंकड़ा: 50% किसानों को नहीं मिला उचित मुआवजा

स्वास्थ्य सेवा का संकट: विज्ञापन में एम्स, धरातल पर रेफरल केंद्र

सरकारी दावा: हर जिले में मेडिकल कॉलेज और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं।

धरातल की हकीकत: पुरानी योजनाओं (चिरंजीवी) का नाम बदलकर उन्हें जटिल बना दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 40% पद रिक्त हैं।

आंकड़ा: ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 45% डॉक्टरों की कमी

संपादकीय: जनता को गुमराह करने का ‘मास्टरक्लास’

“बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं होता, यह सरकार की नीयत का दर्पण होता है। बढ़ते कर्ज और घटते रोजगार के बीच राजस्थान को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने का दावा एक क्रूर मजाक से अधिक कुछ नहीं है।”

— विशेष संवाददाता

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