55.23 लाख जमा कर खुला सीज भवन, अब 60 दिन में अवैध निर्माण हटाने की चुनौती

गांधीनगर के तीन भूखंडों पर बिना अनुमति बेसमेंट से पहली मंजिल तक हुआ था निर्माण, स्वायत्त शासन विभाग ने सशर्त दी सीज खोलने की मंजूरी

भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी)
स्मार्ट हलचल|शहर के गांधीनगर में नियमों को ताक पर रखकर किए गए निर्माण पर नगर निगम की सीज कार्रवाई के बाद अब नया मोड़ आ गया है। भूखंड संख्या 9-सी, 10-सी और 11-सी पर बने भवन को सीज मुक्त करने के लिए 55 लाख 23 हजार 800 रुपए जमा कराए गए हैं। इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग ने भवन की सीज खोलने की अनुमति तो दे दी, लेकिन साथ ही नगर निगम को 60 दिन में अवैध निर्माण हटाने और नियमानुसार कार्रवाई पूरी करने के सख्त निर्देश भी दिए हैं।
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशकालय ने 2 नवंबर 2026 को नगर निगम आयुक्त को जारी आदेश में स्पष्ट किया कि राकेश सुथरिया पुत्र कन्हैयालाल सुथरिया के गांधीनगर स्थित तीन भूखंडों पर बिना स्वीकृति बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल पर छत निर्माण किए जाने के कारण 29 अक्टूबर को भवन सीज किया गया था।
इसके बाद भवन मालिक ने सीज मुक्त करने का आवेदन दिया। नगर निगम ने विभाग को प्रस्ताव भेजते हुए बताया कि विभागीय आदेश 14 जुलाई 2022 के तहत निर्धारित 55,23,800 रुपए निगम कोष में जमा करा दिए गए हैं। भवन मालिक ने शपथ पत्र भी दिया है कि सीज खुलने के बाद निर्माण स्वीकृत मानचित्र और भवन निर्माण नियमों के अनुसार ही होगा। उल्लंघन होने पर निगम की कार्रवाई स्वीकार होगी।
सीज खोलने की अनुमति, लेकिन अवैध निर्माण पर राहत नहीं:-
विभाग ने सीज खोलने की अनुमति देते हुए साफ किया है कि इसका मतलब अवैध निर्माण को वैध मान लेना नहीं होगा। स्वीकृति योग्य निर्माण को नियमानुसार स्वीकृति जारी करनी होगी, जबकि गैर-स्वीकृति योग्य निर्माण को मौके से हटाना अनिवार्य होगा। मास्टर प्लान और भवन निर्माण विनियमों की पालना के साथ सड़क मार्गाधिकार और सरकारी भूमि भी सुरक्षित रखनी होगी।
60 दिन की समयसीमा, नहीं हटाया तो फिर चलेगी कार्रवाई:-
आदेश में नगर निगम को अधिकतम 60 दिन यानी दो माह के भीतर पूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में अवैध निर्माण नहीं हटाने पर निगम अपने खर्चे के बजाय अवैध निर्माणकर्ता के हर्जे-खर्चे पर ध्वस्तीकरण और दोबारा सीज करने की कार्रवाई करेगा। साथ ही जमा धरोहर राशि जब्त करने और सक्षम न्यायालय में अभियोजन की कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने नगर निगम को पूरे मामले की मौके पर लगातार मॉनिटरिंग करने और 60 दिन में कार्रवाई पूरी कर पालना रिपोर्ट भेजने को कहा है।
अब निगम की असली परीक्षा:-
सीज खोलने की अनुमति मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम 55.23 लाख रुपए जमा होने के बाद अवैध निर्माण पर कितनी सख्ती दिखाता है? क्या 60 दिन में नियम विरुद्ध निर्माण वास्तव में हटेगा या आदेश फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा? अब निगम की कार्रवाई ही तय करेगी कि शहर में भवन निर्माण नियमों की पालना सिर्फ कागजों में होगी या जमीन पर भी।