शाहपुरा के लाल सुल्तान खान ने समुद्र में लहराया परचम, मर्चेंट नेवी में बने थर्ड ऑफिसर, IMU-CET में हासिल की थी ऑल इंडिया सेकंड रैंक

पिता शाहपुरा में चलाते हैं ई-मित्र, माता ने अजमेर में रहकर बच्चों को बनाया काबिल
चेन्नई पोर्ट से साउथ अफ्रीका (केपटाउन) के लिए पहली यात्रा पर हुए रवाना

शाहपुरा,भीलवाड़ा (राजस्थान)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा।स्मार्ट हलचल|शाहपुरा के एक साधारण लेकिन बेहद प्रतिभाशाली परिवार के होनहार युवक सुल्तान खान पुत्र शब्बीर हुसैन खान ने भारतीय व्यापारिक नौसेना (मर्चेंट नेवी) में थर्ड ऑफिसर बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने मैरिटाइम पायलट के तौर पर चेन्नई से अपनी आधिकारिक ड्यूटी जॉइन कर ली है। पद व कार्यभार ग्रहण करते ही वे अपनी पहली समुद्री यात्रा के लिए चेन्नई पोर्ट से साउथ अफ्रीका के केपटाउन के लिए रवाना हो गए हैं।
एक ही छत के नीचे प्रतिभाओं का गढ़ है यह परिवार:
सुल्तान खान का परिवार सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिभाओं की खान है। उनके पिता शब्बीर हुसैन खान शाहपुरा में फुलिया गेट पर एक ई-मित्र संचालक हैं। बच्चों की उच्च शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी माता ताहिरा बानू बच्चों के साथ अजमेर में रहती हैं, जहाँ वे निवास से ही छोटे पैमाने पर महिलाओं के कपड़ों का व्यवसाय चलाती हैं।
माता-पिता के इस कड़े संघर्ष और अभावों को उनके सभी बच्चों ने अपनी मेहनत और कामयाबी से सार्थक किया है:
• बड़ी बहन: अजमेर के प्रतिष्ठित मेयो कॉलेज की मयूर शाखा में तैराकी कोच (Swimming Coach) हैं।
• छोटी बहन: एडवोकेट मेहर नौशीन ने हाल ही में अपनी एलएलबी (LLB) की पढ़ाई पूरी की है।
• छोटे भाई: मोहम्मद रजा खान ने खेल जगत में देश का मान बढ़ाया है। वे जूनियर बास्केटबॉल में देश के लिए गोल्ड मेडल जीत चुके हैं और स्कूली भारतीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान भी रह चुके हैं।
सुल्तान के संघर्ष की शुरुआत में उन्होंने बचपन में मॉडर्न एकेडमी शाहपुरा से अपनी पढ़ाई शुरू करके, एमानुएल मिशन स्कूल शाहपुरा से अपनी कक्षा 7 तक की पढ़ाई पूर्ण की फिर भाई बहनों के साथ उनको पिता ने अजमेर भेज दिया और वहाँ 12वीं तक की पढ़ाई ख्वाजा मॉडल स्कूल से पूरी कर फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स विषयों से 95%अंकों के साथ 12वीं कक्षा में उन्होंने स्कूल टॉप किया और जेईई की कोचिंग के दौरान बी टेक करने के बजाय मर्चेंट नेवी में जाने का फैसला किया। उन्होंने ने वर्ष 2020 में इंडियन मैरिटाइम यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा (IMU-CET) दी थी, जिसमें उन्होंने (AIR) पूरे भारत में दूसरा (2nd) स्थान प्राप्त किया था। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण उनका कोर्स एक साल की देरी से शुरू हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पिता के पास फीस के पैसे नहीं होने पर भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा शाहपुरा से एजुकेशन लोन लिया और पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने ‘ग्रेट ईस्टर्न मैरिटाइम यूनिवर्सिटी’ लोनावाला, पुणे से ‘DNS डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस’ का कोर्स पूरा किया। इसके बाद 18 महीने की कठिन कैडेटशिप (इंटर्नशिप) पूरी की, जहाँ वे ‘बेस्ट कैडेट’ के रूप में कार्यरत रहे। आखिरकार आईएमयू का फाइनल एग्जाम क्लियर कर उन्होंने नॉटिकल साइंस में बीएससी की डिग्री हासिल कर थर्ड ऑफिसर का प्रतिष्ठित पद प्राप्त किया। मर्चेंट नेवी में थर्ड ऑफिसर (मैरीटाइम पायलट) के रूप में सुल्तान की पहली पोस्टिंग ‘जग लीना’ (Jag Leena) नामक जहाज पर हुई है।
ट्रेनिंग और कैडेटशिप के दौरान सुल्तान खान पहली बार ‘जग ललित’ नामक जहाज पर लगातार 11 महीने और फिर ‘जग अमीषा’ नामक जहाज पर 8 महीने तक तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने यूएई, सऊदी अरब, इटली, ब्राजील, चीन, सिंगापुर, पनामा, तुर्की, ईरान, इराक, मलेशिया, फ्लोरिडा (USA), इजिप्ट और लीबिया समेत दुनिया के दर्जनों देशों की समुद्री यात्राएं कीं और नयी अनुभव हासिल किये।
एक साधारण परिवार से निकलकर समुद्र की लहरों पर देश का परचम लहराने वाले और चौथाई किलोमीटर लंबे, भारी भरकम जहाज को नीले समंदर में भगाने वाले सुल्तान खान और उनके पूरे परिवार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से शाहपुरा कस्बे सहित पूरे समाज परिवार और मित्रगणों में खुशी का माहौल है। सुल्तान की इस कामयाबी पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, आमजन, मित्र, रिश्तेदार और प्रबुद्ध जन उनके माता-पिता व परिवारजनों को बधाईयाँ और शुभकामनाएं दे रहे हैं।