पर्यावरण में जहर घोल रहा नगर पंचायत का कूड़ा, एमआरएफ सेंटर बना शोपीस

सेंटर के बाहर कूड़े का ढेर लगाकर लगाई जा रही आग, जहरीले धुएं से प्रदूषित हो रही आबोहवा; पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई, लेकिन नगर पंचायत पर मेहरबानी क्यों?

खखरेरू/स्मार्ट हलचल|फतेहपुर नगर पंचायत में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अहिल्याबाई होलकर नगर स्थित एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर विभागीय लापरवाही के चलते महज शोपीस बनकर रह गया है। सेंटर के अंदर कूड़े के पृथक्करण और पुनर्चक्रण की व्यवस्था होने के दावों के बीच नगर पंचायत से निकलने वाला कूड़ा परिसर के बाहर ही डाला जा रहा है। आरोप है कि इस कूड़े में लगातार आग लगाई जा रही है, जिससे उठने वाला धुआं आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रहा है।

हैरानी की बात यह है कि जिस एमआरएफ सेंटर का निर्माण कूड़े के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और उपयोगी सामग्री को अलग करने के उद्देश्य से किया गया है, उसी के बाहर कूड़े का ढेर लगाकर उसे जलाया जा रहा है। इससे सेंटर की उपयोगिता और उसके संचालन पर सवाल उठने लगे हैं।

नगरवासियों का कहना है कि कूड़े में आग लगाने का सिलसिला लगातार जारी है। धुएं के कारण आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर प्रशासन पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्ती बरतने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत क्षेत्र में खुलेआम कूड़ा जलाए जाने पर जिम्मेदारों की चुप्पी समझ से परे है।

बड़ा सवाल यह है कि जब कूड़े के निस्तारण के लिए लाखों रुपये की लागत से एमआरएफ सेंटर बनाया गया है, तो फिर कूड़ा बाहर क्यों फेंका और जलाया जा रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

इस संबंध में अधिशासी अधिकारी हरिगेंद्र प्रताप सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हुआ।