रेत की लकीरों से रची इतिहास की इबारत पुष्कर के सैंड आर्टिस्ट अजय रावत को मिला महाराणा सज्जन सिंह पुरस्कार

कला साधना को मिला बड़ा सम्मान

(हरिप्रसाद शर्मा)

पुष्कर/ अजमेर/स्मार्ट हलचल|धार्मिक नगरी पुष्कर की पवित्र रेत से जन्मी कला आज भी पूरे प्रदेश में सम्मान का कारण बन गई है। वर्षों की साधना, मेहनत और अद्भुत कल्पनाशक्ति के बल पर रेत को जीवंत कलाकृति में ढालने वाले पुष्कर के सैंड आर्टिस्ट को महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन के प्रतिष्ठित “महाराणा सज्जन सिंह पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान ने न केवल कलाकार की कला साधना को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है, बल्कि पूरे पुष्कर शहर का मान भी बढ़ाया है।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के बाद कलाकार ने भावुक शब्दों में कहा कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का आशीर्वाद है जिन्होंने उनके संघर्ष के दिनों में उनका साथ दिया और उन पर विश्वास बनाए रखा। उन्होंने कहा कि उनकी कला यात्रा की शुरुआत बेहद साधारण परिस्थितियों में हुई थी, जब वे पुष्कर की रेत पर छोटी-छोटी और कभी-कभी टूटी-फूटी रंगोलियां बनाकर अपनी कल्पनाओं को आकार देने की कोशिश करते थे।
कलाकार ने विशेष रूप से पुष्कर के मीडिया जगत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब उनकी कला को पहचान मिलने की शुरुआत भी नहीं हुई थी, तब स्थानीय मीडिया ने उनकी प्रतिभा को मंच दिया और लगातार उनके कार्यों को लोगों तक पहुँचाया। मीडिया के इस प्रोत्साहन ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और आत्मविश्वास को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि पुष्कर की रेत उनके लिए केवल मिट्टी नहीं बल्कि एक कैनवास है, जिस पर वे अपनी भावनाओं, संस्कृति और संदेशों को उकेरते हैं। वर्षों की अथक मेहनत और समर्पण के बाद आज जब उनकी कला को इतने प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है तो यह क्षण उनके लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण है।
महाराणा सज्जन सिंह पुरस्कार मेवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कला परंपरा को बढ़ावा देने के लिए दिया जाने वाला अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। ऐसे सम्मान से नवाजे जाना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि होती है।
पुष्कर के इस कलाकार की उपलब्धि से पूरे शहर में खुशी और गर्व का माहौल है। शहरवासियों का मानना है कि रेत से अद्भुत कलाकृतियाँ गढ़ने वाले इस कलाकार ने पुष्कर की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश भी देती है कि यदि लगन, मेहनत और विश्वास हो तो साधारण रेत भी असाधारण इतिहास रच सकती है।