मांडलगढ़।स्मार्ट हलचल|गांधीनगर सेक्टर पांच स्थित, आर.एन.टी. विधि महाविद्यालय में विधि तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए फौजदारी मूट कोर्ट का सफल आयोजन किया गया। यह सत्र का द्वितीय मूट कोर्ट था. जिसका आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर के निर्धारित पाठ्यक्रमानुसार किया गया। विधि विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह एवं गंभीरता के साथ इसमें भाग लिया। महाविद्यालय के समन्वयक गौरव त्यागी एवं उप-प्राचार्य डॉ. प्रभा भाटी ने बताया कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक विधिक प्रशिक्षण प्रदान करने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से इस मूट कोर्ट का आयोजन किया गया। विधि व्याख्याता जफ्फर हुसैन वैलिम ने कहा कि मूट कोर्ट विद्यार्थियों के लिए न्यायालय की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का सर्वोत्तम माध्यम है। इससे उनमें तर्कशक्ति, विधिक विश्लेपण क्षमता एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण कौशल का विकास होता है। मूट कोर्ट में “महाराष्ट्र राज्य बनाम शीना बोरा” अपराधिक मामले पर आधारित था जिसमें मामले की तथ्य ये है कि वर्ष 2015 में मुंबई पुलिस ने एक अलग मामले में एक ड्राइवर को अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि साल 2012 में उसने अपनी मालकिन इंद्राणी मुखर्जी के कहने पर एक युवती की हत्या में मदद की थी। जांच करने पर पता चला कि वह युवती शीना बोरा थी, जिसे दुनिया के सामने इंद्राणी की बहन बताया जाता था, लेकिन वास्तव में वह उनकी बेटी थी। ड्राइवर के अनुसार 24 अप्रैल, 2012 को इंद्राणी ने शीना को मिलने के लिए बुलाया, कार में इंद्राणी, उनके पूर्व पति संजीव खन्ना और ड्राइवर मौजूद थे, और उसी दौरान कथित रूप से शीना की गला दबाकर हत्या कर दी गई। बाद में उसके शव को महाराष्ट्र के रायगढ़ के जंगल क्षेत्र में ले जाकर जला दिया गया और ठिकाने लगा दिया गया। घटना के बाद शीना के दोस्त और उसके करीबी राहुल को संदेश भेजे गए कि वह विदेश चली गई है और संपर्क नहीं रखना चाहती। कुछ समय तक सभी को यही विश्वास दिलाया गया कि शीना जीवित है और बाहर रह रही है। लेकिन 2015 में ड्राइवर के बयान के बाद पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य सबूतों की जांच की, जंगल से मिले अवशेषों की जांच कराई
गई और मामला धीरे-धीरे सामने आया। इसके बाद इंद्राणी मुखर्जी, संजीव खन्ना और बाद में पीटर मुखर्जी को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया। जांच आगे चलकर सीबीआई को सौंप दी गई। अभियोजन का कहना था कि यह पहले से रची गई साजिश थी, जबकि बचाव पक्ष का कहना था कि यह मामला केवल परिस्थितियों और एक गवाह के बयान पर आधारित है। इसी कारण यह मामला देशभर में बहुत चर्चित रहा।
मूट कोर्ट में विधि विद्यार्थियों ने विभिन्न न्यायालयीन भूमिकाएँ निभाईं, जिनमें सेशन न्यायाधीश की भूमिका में कविता धाकड़, अभियोजन अधिवक्ता की भूमिका में क्रमशः अर्चना वर्मा, हर्षवर्धन सिंह रहे। अभियुक्त अधिवक्ता की भूमिका में क्रमशः मोहम्मद हमजा, देवेन्द्र सिंह, चिकित्सा अधिकारी की भूमिका में मुकेश रेगर, फॉरेंसिक साइंटिस्ट की भूमिका में सचिन सिंगल, पुलिस ऑफिसर सी.बी.आई. की भूमिका राज गोपाल सिंह भाटी रहे। रीडर निशा नीलगर, स्टेनोग्राफर राज्यवर्धन सिंह एवं सरकारी गवाह की भूमिका में हरलाल बैरवा ने निभाई। विधि विद्यार्थियों ने तथ्य एवं विधिक प्रावधानों के आधार पर अपने-अपने पक्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता बी.एल. पोखरना सहित विधि सहायक आचार्य जमीर आलम, सोनिया राजोरा, मेहा डाड, डॉ. प्रियंका शर्मा, सोनू कुमार मेघवंशी, ललित कुमार मीणा, डॉ. अनिल कुमार एवं दीपक शर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने विधि विद्यार्थियों के तर्कों की सराहना करते हुए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। मूट कोर्ट आयोजन में विधि व्याख्याता अमित कोहली एवं गजेंद्र जोशी एवं अन्य व्याख्यातागण का विशेष सहयोग रहा। मूट कोर्ट के अंत में उपस्थित सभी विधि विद्यार्थियों को सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय आयोजन कमेटी ने बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया।
