दूधधारा या मिलावट का खेल? मालपुरा के केरिया गांव में बढ़ी दूध-पनीर सप्लाई पर उठे गंभीर सवाल

 

– ग्रामीणों ने की सैंपलिंग व जांच की मांग-प्रशासन व जिम्मेदारों की चुप्पी से गहराया संदेह

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/मालपुरा। स्मार्ट हलचल|मालपुरा उपखण्ड क्षेत्र के केरिया गांव में इन दिनों दूध और पनीर की असामान्य रूप से बढ़ी सप्लाई को लेकर ग्रामीणों के बीच गंभीर चर्चा और शंकाएं पैदा हो गई हैं। अचानक बड़े पैमाने पर हो रही आपूर्ति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतनी भारी मात्रा में दूध कहां से आ रहा है और इसकी गुणवत्ता कितनी विश्वसनीय है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से कुछ व्यापारी दूध और डेयरी उत्पादों के कारोबार से जुड़े हुए हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से सप्लाई का स्तर अचानक बढ़ जाना कई तरह के संदेह को जन्म दे रहा है। लोगों को आशंका है कि कहीं इस पूरे मामले में मिलावट या रासायनिक पदार्थों के जरिए नकली दूध और पनीर तैयार कर बाजार में तो नहीं पहुंचाया जा रहा।
*पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले*
स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में पहले भी नकली डेयरी उत्पादों को लेकर कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद यदि फिर से इसी तरह की गतिविधियां सक्रिय हो रही हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
*स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका*
ग्रामीणों ने बताया कि बाजार में बड़ी मात्रा में पहुंच रहे दूध और पनीर की गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी है। यदि इनमें किसी प्रकार की मिलावट या रासायनिक तत्वों का उपयोग किया जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर आमजन के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए ऐसे उत्पाद बेहद नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
*प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल*
इस पूरे मामले में प्रशासनिक भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इतने बड़े स्तर पर दूध और पनीर की सप्लाई हो रही है तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है। और यदि जानकारी है तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
*जांच की मांग तेज*
क्षेत्रवासियों ने खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन से मांग की है कि केरिया गांव में चल रही दूध और पनीर की सप्लाई की तत्काल सैंपलिंग कर जांच कराई जाए। ताकि दूध की गुणवत्ता और इसकी वास्तविकता सामने आ सके।अब सवाल यह है कि केरिया गांव में बह रही यह “दूधधारा” वास्तव में शुद्धता का प्रतीक है या फिर मिलावट के किसी बड़े खेल की परतें छिपी हुई हैं। इसका जवाब अब प्रशासन और जांच एजेंसियों सहित जिम्मेदारों को ही देना होगा।