बिना नोटिस मकान तोड़ने और झूठे मुकदमों में फंसाने का आरोप: घुमन्तु जनाधिकार समिति का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, कलेक्टर और एसपी को सौंपा ज्ञापन

पुनित चपलोत

भीलवाड़ा // घुमंतू जनाधिकार समिति (अजमेर संभाग) ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर घुमन्तु परिवारों के साथ हो रहे अन्याय और मानवाधिकार हनन के मामलों में न्याय की गुहार लगाई है। समिति ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

समिति के जिला संयोजक जगदीश दास रंगास्वामी के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि सुरेश कालबेलिया का परिवार पिछले 25 वर्षों से निवास कर रहा है। उनके पास सरकार द्वारा स्वीकृत इंदिरा आवास योजना का मकान और वैध बिजली कनेक्शन भी है

आरोप है कि बीती 13 मार्च को अतिक्रमण दस्ते ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के अचानक कार्रवाई करते हुए मकान और स्नानघर को तहस-नहस कर दिया। ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई के समय घर की महिलाएं स्नान कर रही थीं, जिन्हें अर्धनग्न अवस्था में बाहर निकलने पर मजबूर होना पड़ा, जो अत्यंत शर्मनाक और अमानवीय व्यवहार है। समिति ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को वैकल्पिक आवास देने की मांग की है।

वहीं, पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए एक अन्य ज्ञापन में पोटला (सहाड़ा) निवासी मीठूलाल बागरी के परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने का मुद्दा उठाया गया। समिति ने बताया कि बच्चों के आपसी विवाद को गंभीर आपराधिक रूप देकर बागरी समुदाय के लगभग 10 निर्दोष सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

ज्ञापन के अनुसार, कुछ स्थानीय दबंग व्यक्ति आए दिन परिवार को एससी/एसटी एक्ट के झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां देते हैं। पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि बिना उचित अनुसंधान के एकतरफा कार्रवाई की गई और पीड़ित पक्ष की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की जा रही है। समिति ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और निर्दोष व्यक्तियों को शीघ्र रिहा करने की मांग की है।

इस दौरान प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार मालावत, भानचंद बागरिया, सोहनलाल, रामनाथ और मगनलाल सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।