शिवप्रकाश चौधरी
स्मार्ट हलचल|केकड़ी सिटी थाने में हुए ताज़ा प्रशासनिक फेरबदल ने शहर के माहौल को एकाएक भावुक, चर्चित और संवेदनशील बना दिया है। अपनी निष्पक्ष, निर्भीक और अनुशासित कार्यशैली से आमजन के बीच “लेडी सिंघम” के रूप में विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाली सिटी थानाधिकारी इंस्पेक्टर कुसुमलता मीणा को लाइन हाजिर कर दिया गया है। उनके स्थान पर अनिल शर्मा को सिटी थानाधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। इस निर्णय के बाद शहरभर में चर्चाओं का दौर तेज है, वहीं सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की मानो बाढ़ सी आ गई है, लोग एसपी के आदेश को लेकर असंतोष जाहिर कर रहे है। 22 अक्टूबर 2024 को कार्यभार संभालने वाली इंस्पेक्टर कुसुमलता मीणा ने लगभग एक वर्ष तीन माह के अपने कार्यकाल में सख़्त पुलिसिंग, त्वरित कार्रवाई और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का ऐसा संतुलन प्रस्तुत किया, जिसने पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली को नई ऊर्जा प्रदान की। 80 से महिला व बच्चियों को दस्तयाब कर सुरक्षित परिजनों तक पहुँचाने की कार्रवाई ने न केवल उनकी संवेदनशीलता और सजगता को रेखांकित किया, बल्कि समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना को भी सुदृढ़ किया। कॉलेज और स्कूलों में पहुँचकर छात्राओं से सीधा संवाद स्थापित करना, उन्हें महिला सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और अपना स्वयं का संपर्क नंबर उपलब्ध कराते हुए किसी भी परिस्थिति में बेझिझक संवाद का संदेश दिया।
एक साल में गिरा आपराधिक थाने का आपराधिक ग्राफ, बड़ी वारदातों का हुआ खुलासा–
अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर भी इंस्पेक्टर मीणा का कार्यकाल उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरा रहा। महिलाओं में सुरक्षा की भावना विकसित करते हुए 5 नथ लूट की वारदातों का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिससे शहर में राहत और संतोष की अनुभूति हुई। एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई प्रभावी कार्यवाहियों ने अवैध गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार किया। वाहन चोरी जैसे आमजन को प्रभावित करने वाले अपराधों पर भी उनकी सख़्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। डंपर, ट्रैक्टर, बाइक सहित कई वाहनों की चोरी के मामलों में तुरंत कार्रवाई कर न केवल रिकवरी सुनिश्चित की गई, बल्कि वाहन चोरों के गिरोहों का पर्दाफाश कर अपराधियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाया गया। लंबे समय से फरार चल रहे स्थाई वारंटियों की धरपकड़, दर्ज प्रकरणों की समयबद्ध जांच और कोर्ट में चालान पेश करने की प्रक्रिया में तेजी लाते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूती प्रदान की।
आमजन से सीधा संवाद और सहज उपलब्धता से बनी पहचान–
इंस्पेक्टर कुसुमलता मीणा की कार्यशैली की सबसे उल्लेखनीय विशेषता रही—आमजन से सीधा संवाद और सहज उपलब्धता। थाने की चौखट आम नागरिकों के लिए भरोसे का दरवाज़ा बनी रही, जहाँ हर व्यक्ति अपनी समस्या बिना झिझक रख सकता था। इंस्पेक्टर कुसुमलता मीणा ने केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रही, बल्कि थाने की आंतरिक व्यवस्था और पुलिस कर्मियों के कल्याण पर भी समान रूप से केंद्रित रही। थाने परिसर में स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करना, फैली अव्यवस्था को सुधारना, मैस का नए सिरे से निर्माण करवाना और पुलिस कर्मियों की समस्याओं का निस्तारण कर उन्हें बेहतर कार्यपरिस्थिति उपलब्ध कराई। साथ ही थाने में आने वाले पीड़ितों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था कर उन्होंने पुलिसिंग के मानवीय पक्ष को सशक्त किया।
जाते-जाते भी मानवीय मूल्यों की मिसाल–
लाइन हाजिर किए जाने के पश्चात विदाई के क्षणों में भी इंस्पेक्टर मीणा ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एक जरूरतमंद गरीब महिला को निजी व्यय से 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसके कच्चे घर की दीवार गिरने से वह विपरीत परिस्थितियों से जूझ रही थी। सहायता पाकर महिला और उसके विकलांग पति की आँखों में झलकते आभार और भावनाओं ने उस क्षण को अत्यंत मार्मिक बना दिया।
