शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा शहर के शैक्षिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ते हुए श्री प्रताप सिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के शोध पत्रों को पुस्तक रूप में प्रकाशित किया गया। यह सम्मेलन 30 व 31 जनवरी 2025 को आयोजित हुआ था, जिसमें देशभर से आए विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपने शोध प्रस्तुत किए थे।
इस शोध-संग्रह का संपादन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पुष्कर राज मीणा ने किया, जबकि सम्मेलन के संयोजक धर्म नारायण वैष्णव रहे। इस बहुप्रतीक्षित पुस्तक का विमोचन मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा की साध्वी सरस्वती दीदी के करकमलों द्वारा गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
विमोचन समारोह में साध्वी सरस्वती दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने वेदों, उपनिषदों और प्राचीन भारतीय दर्शन में निहित ज्ञान को आज के परिप्रेक्ष्य में पुनः समझने और अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
पुस्तक के संपादक डॉ. पुष्कर राज मीणा ने बताया कि इस ग्रंथ में खगोल विज्ञान, गणित, आयुर्वेद और योग जैसे विषयों पर प्राचीन भारतीय मनीषियों के योगदान को शोधपरक और प्रमाणिक रूप में संकलित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों के लिए उपयोगी है, बल्कि आम पाठकों को भी भारतीय ज्ञान की गहराई से परिचित कराएगी।
उन्होंने अपने उद्बोधन में यह भी कहा कि केवल साक्षरता से राष्ट्र महान नहीं बनता, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पूर्वजों के बौद्धिक पुरुषार्थ को समझने से ही भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर होगा। इस पुस्तक के माध्यम से युवाओं को अपनी परंपरा से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्र सहसंयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत, डॉ. ऋचा अंगिरा, डॉ. रंजीत जगरिया, प्रियंका ढाका, मुकेश कुमार मीणा, शशिकांत मीणा, विनोद कुमारी एवं डॉ. परमेश्वर कुमावत सहित अनेक गणमान्य विद्वान एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे। समारोह में उपस्थित लोगों ने इस पहल को भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के शोध कार्य भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे।
