हाईवे पर पट्टा, स्वीकृति या नक्शा पास होने के बावजूद भी 75 मीटर के दायरे में निर्माण अवैध: हाईवे किनारे अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की बड़ी चोट

शिवराज बारवाल मीना
जयपुर/टोंक।स्मार्ट हलचल|सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट कर दिया है कि अब हाईवे के किनारे तय सीमा के भीतर आने वाले सभी पक्के निर्माण अवैध माने जाएंगे। कोर्ट ने साफ कहा कि सुरक्षित सफर नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का हिस्सा है और सड़क किनारे अनियंत्रित निर्माण दुर्घटनाओं को बढ़ावा देते हैं।
*क्या कहा कोर्ट ने?*
अदालत ने अपने आदेश में माना कि हाईवे किनारे बढ़ते अतिक्रमण और अनियोजित निर्माण से हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि एक विशेष टास्क फोर्स गठित कर ऐसे अवैध निर्माणों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।
*नई गाइडलाइन*
नो कंस्ट्रक्शन जोन
* नेशनल व स्टेट हाईवे: 75 मीटर
* मुख्य जिला सड़क (एमडीआर): 60 मीटर
* ग्रामीण सड़कें: 17.5 मीटर।
इन सीमाओं के भीतर किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
*पट्टा भी नहीं देगा राहत*
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई निर्माण तय सीमा के भीतर पाया जाता है तो पट्टा, स्वीकृति या नक्शा पास होने के बावजूद उसे अवैध माना जाएगा। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
*किसानों को आंशिक राहत*
अदालत ने किसानों को खेती जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन खेतों में घर, दुकान या गोदाम जैसे पक्के निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
*क्या पड़ेगा असर?*
* सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद।
* हाईवे किनारे अतिक्रमण पर लगेगी रोक।
* प्रशासन द्वारा बड़े स्तर पर अभियान चलाकर हटाए जाएंगे अवैध निर्माण।
*निष्कर्ष:*
हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि अब कानून के आगे कोई भी अतिक्रमण नहीं टिक पाएगा।