चित्तौड़गढ़।स्मार्ट हलचल|वित्त वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में प्रदेश सरकार ने चित्तौड़गढ़ जिले को विकास की कई महत्वपूर्ण सौगातें दी हैं। वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा प्रस्तुत बजट में पर्यटन, खेल, सिंचाई और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लगभग 125 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की घोषणा की गई है। साथ ही, लंबे समय से लंबित कुछ योजनाओं को भी इस बार बजट में शामिल कर उन्हें क्रियान्वित करने का संकेत दिया गया है।
बहुप्रतीक्षित रिवर फ्रंट परियोजना को फिर मंजूरी
शहर में पन्नाधाय सेतु से महाराणा प्रताप सेतु तक रिवर फ्रंट विकसित करने की घोषणा एक बार पुनः की गई है। इस परियोजना के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उल्लेखनीय है कि करीब दस वर्ष पूर्व भी इस योजना की घोषणा हुई थी, किंतु वह धरातल पर साकार नहीं हो सकी। इस बार बजट में स्पष्ट वित्तीय प्रावधान के साथ परियोजना के क्रियान्वयन की उम्मीदें बढ़ी हैं।
संभावित लाभ:
शहर की सौंदर्य वृद्धि
पर्यटन को प्रोत्साहन
स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन
बायोलॉजिकल पार्क: पर्यटन और पर्यावरण को नई दिशा
चित्तौड़गढ़ में बायोलॉजिकल पार्क स्थापित करने की घोषणा जिले के पर्यटन मानचित्र को नई पहचान दे सकती है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों के लिए भी यह महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
(परियोजना की विस्तृत लागत का विवरण पृथक रूप से जारी किया जाना संभावित है।)
पुलिया और काजवे निर्माण से यातायात को राहत
बेड़च नदी पर पुलिस लाइन के समीप धनेतकलां को जोड़ने वाली पुलिया के निर्माण हेतु 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
भोई खेड़ा से चंदेरिया तक काजवे निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इन परियोजनाओं से शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बीच संपर्क सुदृढ़ होगा तथा वर्षा ऋतु में आवागमन बाधित होने की समस्या में कमी आएगी।
खेल सुविधाओं का विस्तार
इंदिरा गांधी स्टेडियम में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी और जिले में खेल गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।
40 करोड़ की सड़क परियोजना
घाटा क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से चित्तौड़गढ़-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-27) से बिजयपुर, अभयपुरा, पालेर-गोरसिया होते हुए लगभग 25 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण हेतु 40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
यह परियोजना ग्रामीण कनेक्टिविटी, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय विकास में सहायक सिद्ध होगी।
सिंचाई तंत्र के पुनरुद्धार पर जोर
गंभीरी बांध से निकलने वाली नहरों की मरम्मत एवं सुधार कार्य के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत—
बांई मुख्य नहर की चेन संख्या 600 से टेल तक सुधार कार्य
संबंधित माइनरों का पुनरुद्धार
इससे सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
कुल संभावित निवेश
घोषित परियोजनाओं के आधार पर चित्तौड़गढ़ जिले के लिए लगभग 125 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, सरकारी बजट दस्तावेज में जिलेवार कुल आवंटन की स्पष्ट राशि का विस्तृत उल्लेख अभी प्रतीक्षित है। विभागीय डीपीआर एवं प्रशासनिक स्वीकृतियों के बाद विस्तृत वित्तीय जानकारी सामने आने की संभावना है।
डीपीआर और टेंडर प्रक्रिया: कब शुरू होगा कार्य?
सरकारी प्रक्रिया के अनुसार—
1 से 3 माह के भीतर डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार हो सकती है।
इसके पश्चात 3 से 6 माह में टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ होने की संभावना रहती है।
हालांकि यह समय-सीमा परियोजनाओं की जटिलता और वित्तीय स्वीकृति पर निर्भर करेगी।
सकारात्मक संकेत और चुनौतियाँ
सकारात्मक पक्ष
पर्यटन और पर्यावरण आधारित विकास पर विशेष जोर
शहरी एवं ग्रामीण आधारभूत ढांचे में सुधार
युवाओं और किसानों के हित में योजनाएं
चुनौतियाँ
पूर्व में घोषित योजनाओं का अधूरा क्रियान्वयन
स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव
कुल वित्तीय आवंटन में पारदर्शिता की आवश्यकता।
घोषणा से हकीकत तक का सफर
चित्तौड़गढ़ के लिए यह बजट विकास की संभावनाओं का संकेत देता है। यदि रिवर फ्रंट, बायोलॉजिकल पार्क और अन्य आधारभूत परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होती हैं, तो जिले की शहरी छवि, ग्रामीण संपर्क, खेल प्रतिभा और कृषि व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
अब वास्तविक परीक्षा प्रशासनिक तत्परता, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन की होगी। घोषणाएं हो चुकी हैं—जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि विकास कार्य कब और कितनी गति से धरातल पर दिखाई देते हैं।
