इटावा। स्मार्ट हलचल|सनातन धर्म की रक्षा, गौ संरक्षण एवं राष्ट्रहित के व्यापक उद्देश्य को लेकर जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष पीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा “चतुरंगिणी सेना” का गठन किया गया है। इस महत्वपूर्ण गठन में इटावा के बिट्ठल आश्रम के पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर शिवम जी महाराज को ‘जन बल का अंगाध्यक्ष’ नियुक्त किया गया है।
चतुरंगिणी सेना को चार प्रमुख अंगों में विभाजित किया गया है मन बल, तन बल, धन बल और जन बल। इन चारों अंगों के माध्यम से समाज में धार्मिक चेतना, संगठन शक्ति और सेवा कार्यों को मजबूती प्रदान की जाएगी।
शिवम जी महाराज के नेतृत्व में आदि शक्ति गौ रक्षा अखाड़ा इस इस दिव्य एवं संगठित पहल की शुरुआत देश भर से चयनित 27 प्रमुख व्यक्तित्वों के साथ की गई है, जो आगे चलकर पूरे भारत में इस सेना का विस्तार करेंगे। सेना का अभिन्न अंग बनकर कार्य करेगा, जिसके संरक्षक स्वयं शंकराचार्य महाराज होंगे। इससे गौ रक्षा एवं धर्म संरक्षण के कार्यों को एक नई दिशा और गति मिलने की संभावना है। शंकराचार्य महाराज ने इस सेना के लिए एक स्पष्ट और प्रभावशाली नारा दिया है “टोको, रोको और ठोको”। इसका अर्थ स्पष्ट करते हुए बताया गया कि पहले अधर्म एवं अन्याय के विरुद्ध लोगों को टोका जाएगा फिर उन्हें गलत कार्यों से रोका जाएगा। और यदि फिर भी वे नहीं मानते, तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ठोका जाएगा। यह “ठोकना” किसी प्रकार की अराजकता नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहते हुए शिकायत दर्ज कराना, समाज के सामने सत्य प्रस्तुत करना और गलत कार्यों का विरोध करना है। शिवम जी महाराज ने चतुरंगिणी सेना का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा, गौ माता का संरक्षण, निर्बलों एवं पीड़ितों की सहायता, समाज में धर्म एवं नैतिकता का प्रचार-प्रसार बताया है।
प्रथम चरण में चयनित 27 प्रमुख प्रतिनिधियों में आदि शक्ति गौ रक्षा अखाड़ा के महामंडलेश्वर दीपकेश्वरानंद जी महाराज तथा चित्रकूट धाम से महामंडलेश्वर पूज्य राजेंद्र दास जी महाराज का नाम भी सम्मिलित किया गया है, जिससे इस अभियान की गरिमा और व्यापकता और अधिक बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में इस सेना का विस्तार पूरे भारतवर्ष में किया जाएगा, जिससे यह एक मजबूत, संगठित और प्रभावशाली धार्मिक एवं सामाजिक शक्ति के रूप में स्थापित हो सके। इस पहल को लेकर संत समाज एवं धर्मप्रेमियों में उत्साह का वातावरण है और इसे सनातन जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
