बिलोता पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई नहीं-जिम्मेदारों पर दोषियों को संरक्षण देने के आरोप

 

– दोषी लोकसेवकों व सरपंच (प्रशासक) के खिलाफ मुख्यमंत्री, लोकायुक्त सचिवालय, पंचायती राज व ग्रामीण विकास मंत्री, शासन सचिव एवं आयुक्त से दोषियों पर कार्यवाही की मांग

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलचल|उनियारा उपखण्ड क्षेत्र की पंचायत समिति उनियारा के अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलोता में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, गबन और अनियमितताओं की जांच में गम्भीर आरोप सामने आए हैं। जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों सहित सरपंच (प्रशासक) पर अब तक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गम्भीर सवाल उठते नजर आ रहे है। इस संबंध में परिवादी लोकेश मीणा सहित ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, शासन सचिव व आयुक्त को सचिवालय जयपुर में ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पंचायत में निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, अधूरे कार्यों को पूर्ण दिखाकर भुगतान उठा लिया गया तथा विभिन्न योजनाओं में भारी अनियमितताएं की गईं। स्कूल भवन, शौचालय निर्माण, सीसी व इंटरलॉकिंग सड़क और मनरेगा कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी कर वित्तीय गड़बड़ियां की गईं। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में पात्र परिवारों को वंचित कर अपात्र लोगों को लाभ देने के आरोप भी लगाए गए हैं। वहीं मनरेगा योजना में फर्जी मस्टररोल चलाकर मृतक व बाहर रह रहे लोगों के नाम पर भुगतान उठाने और एक ही व्यक्ति की फर्जी फोटो हाजिरी सॉफ्टवेयर में अपलोड कर फर्जी उपस्थिति दर्ज करने जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। इतना ही नहीं सरपंच /प्रशासक सुरेश मीणा को नियम विरूद्ध बिना स्वीकृति सरकारी हरे पेड़ कटवाने के मामले में दोषी ठहराया जा चुका हैं। जांच में दोषी पाए गए कार्मिकों से ही कई बार गलत तरीके से जांच करवाई गई, जिसके चलते अब तक दोषियों के विरुद्ध कानूनी, गबन रिकवरी व निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई है। ज्ञापन में बताया गया कि जिला प्रशासन की जांच में ग्राम पंचायत बिलोता और पंचायत समिति स्तर के कुछ अधिकारी व कार्मिक दोषी पाए गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। जिला परिषद टोंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परशुराम धानका ने 14 फरवरी 2026 को पत्र जारी कर दोषी सरपंच (प्रशासक) सुरेश मीणा को पद से हटाने का प्रस्ताव शासन सचिव एवं आयुक्त को भेजा है।वहीं सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी जसराम मीणा एवं वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी जगमोहन मीणा के खिलाफ भी विभागीय व कानूनी कार्रवाई के लिए जिला परिषद को पत्र भेजे जा चुके हैं। दोनों के खिलाफ चार्जशीट व 17 सीसीए नोटिस जारी किए जाने की भी पुष्टि हुई है, लेकिन कार्रवाई अभी जिला परिषद स्तर पर लंबित है।ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ जिम्मेदार अधिकारी दोषियों को संरक्षण दे रहे हैं और जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। परिवादी लोकेश मीणा निवासी खेड़ली बालाजी, शिवराज बारवाल सहादत नगर सहित ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी लोकसेवकों और सरपंच (प्रशासक) सुरेश मीणा को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जाए तथा गबन की राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए। वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्यायालय की शरण लेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।