लाडपुरा: 10 साल बाद चारभुजा नाथ मंदिर में लौटी रौनक, चैत्र नवरात्रि पर पारंपरिक ‘गैर नृत्य’ की धूम

शिव लाल जांगिड़

लाडपुरा (स्मार्ट हलचल। लाडपुरा कस्बे के श्री चारभुजा नाथ मंदिर प्रांगण में लोक संस्कृति का एक अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां मंगलवार रात 8 बजे से पारंपरिक ‘गैर नृत्य’ का पांच दिवसीय आयोजन शुरू हुआ है।

एक दशक बाद पुनर्जीवित हुई परंपरा

इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि गांव में करीब दस वर्षों से बंद पड़े इस राजस्थानी लोक नृत्य को ग्रामीणों ने फिर से शुरू किया है। इस पहल ने पूरे गांव को एक साथ ला दिया है और लोगों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति भारी उत्साह जगा दिया है। इस रंगारंग कार्यक्रम का समापन शनिवार रात्रि (दशमी) को होगा।

युवाओं का जोश और लोक संस्कृति के रंग

  • पारंपरिक वेशभूषा: रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधानों में सजे युवाओं और पुरुषों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर गोल घेरा बनाकर नृत्य किया।
  • युवाओं की भागीदारी: इस पारंपरिक कला में युवा पीढ़ी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो संस्कृति के संरक्षण का एक शुभ संकेत है।
  • दर्शकों की भीड़: ढोल की थाप और नृत्य देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं मंदिर प्रांगण में उमड़ीं।

“10 साल बाद गैर नृत्य की वापसी से गांव में उत्सव का माहौल है। यह आयोजन केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति और देवी भक्ति का अटूट संगम है।” – स्थानीय ग्रामीण, लाडपुरा